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उम्मीद की मशाल : जंगलों को आग से बचाया, 800 महिलाओं को हुनरमंद बनाया

Mon, 16 May 2022 12:18 AM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Mon, 16 May 2022 12:18 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
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सोलन। चीड़ की पत्तियों से जंगल में फैलने वाली आग को रोकने के लिए कंडाघाट की अनीता ठाकुर की अनूठी पहल कारगर साबित हुई है। रोजाना वह जंगल से चीड़ की पत्तियों को उठाती हैं और उनसे कई तरह के आकर्षक उत्पाद बनाती हैं। इस तरह वह अब करीब 800 महिलाओं को हुनरमंद बना चुकी हैं।
वर्ष 2017 में कंडाघाट के साथ लगते जंगल में आग लग गई। इससे जंगलों में पशुओं को मिलने वाला चारा भी पूरी तरह खत्म हो गया। गांव में चारे का संकट खड़ा हो गया तो लोगों को कई पशु बेचने भी पड़े। इससे परेशान कंडाघाट के समीप डेढ़ घराट की रहने वाली अनीता ठाकुर ने जंगलों में आग लगने का मुख्य कारण मानी जाने वाली चलार (चीड़) की पत्तियों को जंगल से हटाने की सोची।
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उन्होंने पर्यटन विभाग के एक प्रशिक्षण शिविर में चीड़ की पत्तियों से उत्पाद बनाना सीखा। उसके बाद अपने आसपास की महिलाओं को भी उत्पाद बनाना सिखाया। आज वह प्रदेश की कई महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन गई हैं।
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वह जिले के साथ-साथ मंडी और शिमला की करीब 800 महिलाओं को चीड़ की पत्तियों से उत्पाद बनाना सीखा चुकी हैं। हर जगह वह महिलाओं को जंगलों से चीड़ की पत्तियों को हटाने के लिए प्रेरित कर रही हैं ताकि जंगलों में आग न लगे। खुद भी वह रोजाना जंगलों में जाकर कई किलो पत्तियां इकट्ठा करती हैं और इससे फिर साल भर कई तरह के उत्पाद बनाकर बेच रही हैं। इससे उनके जंगल में अब आग लगने का खतरा भी कम हो गया है।
सजावटी सामान की है मांग
अनीता ठाकुर ने बताया कि चीड़ की पत्तियों से बने उत्पादों की मांग बाजार में लगातार बढ़ रही है। वह खुद और उनकी सिखाई महिलाएं जितने भी उत्पाद तैयार कर रही हैं, वह हाथोंहाथ बिक रहे हैं। इन पत्तियों से रोटी रखने का बॉक्स, पेंसिल बॉक्स, पेन स्टैंड, कप ट्रे, चिल्लर बॉक्स आदि उत्पाद बनाए जा रहे हैं। इससे महिलाओं की आमदनी बढ़ गई हैं, वहीं उनका खर्च भी नहीं हो रहा है। लोग घर से ही उत्पाद खरीदने लगे हैं।
कई जगह सीखा चुकी हैं उत्पाद बनाना
अनीता ठाकुर ने बताया कि वह कई जिलों में चीड़ की पत्तियों से उत्पाद बनाना सीखा रही हैं। वह संस्थाओं के जरिये स्वयं सहायता समूहों और सरकारी प्रशिक्षणों में महिलाओं को प्रशिक्षित कर रही हैं। गरीब महिलाओं को निशुल्क प्रशिक्षण देती हैं। इससे महिलाओं की अच्छी खासी आमदनी हो रही है। अब तक इसमें लाखों रुपये बना चुकी हैं। इनके बनाए उत्पादों की मांग बढ़ती जा रही है।

जंगलों के लिए खतरनाक हैं चीड़ की पत्तियां
चलार की पत्तियां जंगलों के लिए खतरनाक होती हैं। गर्मियों के दौरान चीड़ के जंगलों में इन्हीं पत्तियों में आग लगने के कारण जंगल नष्ट हो जाते हैं। इनमें लगी आग को बुझाना मुश्किल है। इस तकनीक ने जहां महिलाओं की आमदनी बढ़ा दी है, वहीं जंगलों को भी आग से बचाने में सहयोग मिल रहा है।
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