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200 भवन मालिकों को नोटिस, अफसरों को चेतावनी
ब्यूरो/अमर उजाला, सोलन
Updated Thu, 11 Feb 2016 05:32 PM IST
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गंदगी में पानी की पाइपों गुजारने वाले भवन मालिकों पर शिकंजा, अफसरों पर कार्रवाई न करने पर शिकंजा
पीलिया के बचाव को लेकर हुई बैठक में उठा मुद्दा
पीलिया के प्रकोप को देखते हुए प्रशासन ने अफसरों और लापरवाह भवन मालिकों पर शिकंजा कस दिया है। सीवरेज और गंदी नालियों के बीच पीने की पाइपों को गुजारने वाले शहर के 200 भवन मालिकों को प्रशासन ने नोटिस जारी किए हैं। हिदायत दी है कि पानी की पाइपों को नए सिरे से साफ जगह से बिछाया जाए। अन्यथा उचित कार्रवाई न करने वाले मकान मालिकों के पानी के कनेक्शन काट दिए जाएंगे। वहीं सीवरेज का कनेक्शन न लेने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिए कि यदि दिए गए दिशानिर्देशों पर उचित कार्य न किया तो दोषी अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। वह वीरवार को पीलिया से बचाव संबंधित बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि पेयजल को कम से कम 20 मिनट तक उबालकर ही प्रयोग में लाएं। अपील की कि स्वच्छता का पूर्ण ध्यान रखें और पूरे जिले में यदि कहीं खुले में शौच किया जा रहा है तो इस पर रोक लगाने के लिए जिला प्रशासन की सहायता करें। बैठक में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आरके दरोच, अधिशासी अभियंता सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग हेमंत तनवर तथा कार्यकारी अधिकारी नगर परिषद सोलन बीआर नेगी उपस्थित थे।
अमर उजाला की ग्राउंड
रिपोर्ट पर कसा शिकंजा
22 जनवरी को उठाया था यह मुद्दा
‘अमर उजाला’ की मुहिम के तहत 22 जनवरी को ग्राउंड रिपोर्ट में अश्वनी और गिरि के पानी में शहर की गंदगी मिलने की हकीकत को बयां किया था। इसके बाद सरकार के निर्देशों के बाद प्रशासन ने संयुक्त कमेटी गठित करते हुए सोलन में ऐसे प्वाइंट या भवन मालिक चिन्हित करने का सर्वे शुरू किया था, जहां से पेयजल पाइपों के साथ गंदगी मिल रही हो। संयुक्त टीम ने पूरे शहर का निरीक्षण करके 200 मामले चिन्हित किए हैं। इन्हें नोटिस जारी हुए हैं।
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पीलिया की चपेट में अब तक 355 लोग
बैठक में जानकारी दी गई कि जिला में अभी तक पीलिया रोग के लिए 1,617 रोगियों के परीक्षण किए हैं। इनमें से 355 रोगियों में पीलिया के लक्षण पाए गए हैं। इन रोगियों में से 193 सोलन शहर से संबंध रखते हैं। 63 रोगी धर्मपुर खंड से संबंधित हैं। पीलिया रोगियों का जिला के सभी अस्पतालों तथा स्वास्थ्य केंद्रों में पूर्ण उपचार सुनिश्चित बनाया जा रहा है।
दूषित बावड़ियों में लगाएं सूचना पट्ट
प्रशासन ने सभी पेयजल प्राकृतिक जल स्रोत, बावड़ियों इत्यादि की जांच कर ली है। जिन बावड़ियों का पानी पीने योग्य नहीं है, वहां इस संबंध में सूचनापट्ट लगा दिए हैं। उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि वे केवल उन्हीं प्राकृतिक जल स्रोतों, बावड़ियों का पानी प्रयोग में लाएं जो सुरक्षित हैं। जिन बावड़ियों पर पानी न पीने के संबंध में चेतावनी बोर्ड लगाए हैं, वहां का पानी प्रयोग में न लाएं।
अश्वनी खड्ड में लगी रहेगी रोक
अश्वनी खड्ड से सोलन शहर को जलापूर्ति पर रोक लगाई है। कहा कि शहर एवं आसपास लगते क्षेत्रों में फिलहाल अश्वनी खड्ड से जलापूर्ति पर रोक लगी रहेगी। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन इस बीमारी की रोकथाम के लिए हर स्तर पर मुस्तैदी से कार्यवाही कर रहा है। उन्होंने आम लोगों से यह आग्रह भी किया कि वे जल का आवश्यकता के अनुरूप प्रयोग करें।
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पीलिया के बचाव को लेकर हुई बैठक में उठा मुद्दा
पीलिया के प्रकोप को देखते हुए प्रशासन ने अफसरों और लापरवाह भवन मालिकों पर शिकंजा कस दिया है। सीवरेज और गंदी नालियों के बीच पीने की पाइपों को गुजारने वाले शहर के 200 भवन मालिकों को प्रशासन ने नोटिस जारी किए हैं। हिदायत दी है कि पानी की पाइपों को नए सिरे से साफ जगह से बिछाया जाए। अन्यथा उचित कार्रवाई न करने वाले मकान मालिकों के पानी के कनेक्शन काट दिए जाएंगे। वहीं सीवरेज का कनेक्शन न लेने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिए कि यदि दिए गए दिशानिर्देशों पर उचित कार्य न किया तो दोषी अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। वह वीरवार को पीलिया से बचाव संबंधित बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि पेयजल को कम से कम 20 मिनट तक उबालकर ही प्रयोग में लाएं। अपील की कि स्वच्छता का पूर्ण ध्यान रखें और पूरे जिले में यदि कहीं खुले में शौच किया जा रहा है तो इस पर रोक लगाने के लिए जिला प्रशासन की सहायता करें। बैठक में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आरके दरोच, अधिशासी अभियंता सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग हेमंत तनवर तथा कार्यकारी अधिकारी नगर परिषद सोलन बीआर नेगी उपस्थित थे।
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अमर उजाला की ग्राउंड
रिपोर्ट पर कसा शिकंजा
22 जनवरी को उठाया था यह मुद्दा
‘अमर उजाला’ की मुहिम के तहत 22 जनवरी को ग्राउंड रिपोर्ट में अश्वनी और गिरि के पानी में शहर की गंदगी मिलने की हकीकत को बयां किया था। इसके बाद सरकार के निर्देशों के बाद प्रशासन ने संयुक्त कमेटी गठित करते हुए सोलन में ऐसे प्वाइंट या भवन मालिक चिन्हित करने का सर्वे शुरू किया था, जहां से पेयजल पाइपों के साथ गंदगी मिल रही हो। संयुक्त टीम ने पूरे शहर का निरीक्षण करके 200 मामले चिन्हित किए हैं। इन्हें नोटिस जारी हुए हैं।
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पीलिया की चपेट में अब तक 355 लोग
बैठक में जानकारी दी गई कि जिला में अभी तक पीलिया रोग के लिए 1,617 रोगियों के परीक्षण किए हैं। इनमें से 355 रोगियों में पीलिया के लक्षण पाए गए हैं। इन रोगियों में से 193 सोलन शहर से संबंध रखते हैं। 63 रोगी धर्मपुर खंड से संबंधित हैं। पीलिया रोगियों का जिला के सभी अस्पतालों तथा स्वास्थ्य केंद्रों में पूर्ण उपचार सुनिश्चित बनाया जा रहा है।
दूषित बावड़ियों में लगाएं सूचना पट्ट
प्रशासन ने सभी पेयजल प्राकृतिक जल स्रोत, बावड़ियों इत्यादि की जांच कर ली है। जिन बावड़ियों का पानी पीने योग्य नहीं है, वहां इस संबंध में सूचनापट्ट लगा दिए हैं। उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि वे केवल उन्हीं प्राकृतिक जल स्रोतों, बावड़ियों का पानी प्रयोग में लाएं जो सुरक्षित हैं। जिन बावड़ियों पर पानी न पीने के संबंध में चेतावनी बोर्ड लगाए हैं, वहां का पानी प्रयोग में न लाएं।
अश्वनी खड्ड में लगी रहेगी रोक
अश्वनी खड्ड से सोलन शहर को जलापूर्ति पर रोक लगाई है। कहा कि शहर एवं आसपास लगते क्षेत्रों में फिलहाल अश्वनी खड्ड से जलापूर्ति पर रोक लगी रहेगी। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन इस बीमारी की रोकथाम के लिए हर स्तर पर मुस्तैदी से कार्यवाही कर रहा है। उन्होंने आम लोगों से यह आग्रह भी किया कि वे जल का आवश्यकता के अनुरूप प्रयोग करें।