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HRTC की हड़ताल से हजारों लोग बेहाल, कर्मचारियों ने किया प्रदर्शन

Wed, 15 Jun 2016 10:57 AM IST
ब्यूरो, सोलन
ब्यूरो, सोलन Updated Wed, 15 Jun 2016 10:57 AM IST
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HRTC strik creat a problem in solan
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट की रोक के बावजूद एचआरटीसी कर्मचारियों की हड़ताल ने यात्रियों को बेहाल कर दिया। - फोटो : अमर उजाला

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट की रोक के बावजूद एचआरटीसी कर्मचारियों की हड़ताल ने यात्रियों को बेहाल कर दिया। जिला सोलन में सुबह से ही बस सेवा पूरी तरह से ठप रही। इस कारण यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। निजी बसों और व्हीकल पर लोग गंतव्य तक पहुंचे।  हालांकि एनएच में हड़ताल का खासा असर नहीं दिखा।

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पंजाब और हरियाणा रोडवेज की बसों ने क्षतिपूर्ति की। लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में यातायात व्यवस्था बुरी तरह हांफी रही। सोलन जिला में कुल मिलाकर करीब 236 रूट प्रभावित रहे। वहीं मुद्रिका बसों के न चलने से शहर के रूट भी खासे प्रभावित दिखे। एचआरटीसी की बसों में यात्रा करने वालों ने सुबह ही वैकल्पिक व्यवस्था कर ली। कुछ निजी बसें तो कुछ अपनी गाड़ियों और टैक्सियों में गंतव्य तक पहुंचे। कसौली, सुबाथू, कुनिहार, अर्की, साधुपुल और नौणी क्षेत्रों में लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी।
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निजी बसों में खड़े होने की जगह नहीं

नालागढ़ (सोलन)। पथ परिवहन निगम की बसें बंद होने से बीबीएन में यातायात प्रभावित रहा। नालागढ़ क्षेत्र में 171 रूट हैं। इन सभी रूटों पर कोई बस नहीं चली। बसें बंद होने से निगम को छह लाख का नुकसान हुआ। मंगलवार सुबह निगम के कर्मचारी नेता योगेश कपिलेश, दलीप सिंह, संगत सिंह, भीम सिंह, राजन वर्मा आदि कर्मचारियों के नेतृत्व में नालागढ़ की सभी कर्मचारियों ने रोष रैली निकाली।
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इसमें सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। यह रैली नालागढ़ वर्कशाप से शुरू होकर बस स्टैंड बाजार से होते हुए वर्कशाप तक पहुंची। नालागढ़ के विधायक केएल ठाकुर ने भी निगम के कर्मचारियों का समर्थन किया तथा सरकार से उनकी मांग पूरी करने की मांग रखी। उधर निगम की बसें बंद होने से निजी बसों में खड़े होने को भी जगह नहीं मिली।

टैक्सियों का सहारा, मनमानी

अर्की/ कुनिहार (सोलन)। अर्की बस अड्डे पर बसों के लिए सवारियां इंतजार में इधर उधर भटकती रहीं। हालांकि टैक्सी मैक्सी का सहारा लेकर लोगों को कुछ राहत मिली। एचआरटीसी हड़ताल के कारण अर्की उपमंडल के तहत दर्जनों रूटों पर निगम बसें नहीं चल सकी जिससे भूमति, बलेरा, पिपलूघाट, सरयांज, मांझू, जलाणा, रौड़ी, खनलग, दधोगी, घलोत सहित कई स्थानों के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

वहीं सोलन में भी यही आलम दिखा। कई जगह मामानी वसूली की शिकायतें भी हुईं। कुनिहार क्षेत्र में करीब 40 रूटों पर हड़ताल का असर साफ देखने को मिला। कुनिहार न्यू बस स्टैंड पर यात्री परेशान दिखे। लोगों को सोलन और शिमला जाने के लिए टैक्सी के लिए 1500 से 1800 रुपये किराया देना पड़ा। अर्की में बॉडी धार मेले की लोकल अवकाश होने से स्कूल और कॉलेज विद्यार्थियों का भी अवकाश था अन्यथा स्थिति और अधिक विकट होती।

विरोध में जमकर निकाली भड़ास

सोलन। एचआरटीसी के इंटक के अध्यक्ष भीम सिंह, बीएमसी के प्रदेश  प्रवक्ता राजन वर्मा, चालक संघ के प्रधान योगेश कुमार, परिचालक संघ के प्रधान सदीक मोहम्मद, चालक परिचालक संघ के प्रधान संगत सिंह, तकनीकी कर्मचारी संघ के प्रधान राम आसरा, शेर सिंह, नंद कुमार, निजी बस ऑपरेटर को अध्यक्ष चनन सिंह के नेतृत्व में  सभी कर्मचारियों ने

वर्कशाप परिसर में केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर भड़ास निकाली। सभी वक्ताओं का कहना था कि यह विधेयक जन विरोधी है। इसके लागू होने से कोई भी व्यक्ति चालक व परिचालक  का कार्य करने को तैयार नहीं होगा। इस तरह विधेयक में शर्तें और नियम रखे हैं उसी तरह से रोड भी उपलब्ध होने चाहिए।

परवाणू में नहीं चलीं एचआरटीसी बसें

परवाणू (सोलन)। हिमाचल प्रदेश परिवहन संयुक्त समन्वय समिति के आह्वान पर दो दिवसीय हड़ताल के एलान पर मंगलवार को परवाणू के कर्मचारियों ने हड़ताल रखी। इससे यातायात बुरी तरह प्रभावित रहा। परिवहन कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। गेट मीटिंग का भी आयोजन किया गया।


समिति के चेयरमैन नानक चंद शांडिल, प्रधान राम चंद और प्रवक्ता मलकीयत सिंह ने कहा कि मांगें मानी जाएं अन्यथा विरोध तेज होगा। परवाणू के लगभग 23 रूटों पर बसें नहीं चलीं। इससे परवाणू से हिमाचल के दूर-दूर इलाकों के लिए जाने वाले लोगों को कालका से दूसरे प्रदेशों की बसों का सहरा लेना पड़ा।

यह हैं मांगे

- परिवहन निगम को रोडवेज बनाना
- पेंशन और अन्य भत्तों के लिए सरकारी बजट में प्रावधान करना
- पीस-मील कर्मचारियों को एकमुश्त अनुबंध नीति के तहत लाना
- निगम के सभी वाहनों की इंश्योरेंस करना
- नाम के अनुसार हर श्रेणी में सरकार को भर्ती नीति के अनुसार एक समान वेतन दें
- नियमों पर स्टाफ की कमी को पूरा करना
- कर्मचारियों की देनदारियों का एक मुश्त भुगतान
- भर्ती और प्रमोशन नियमों में संगठनों की सहमति से संशोधन
- जीपीएफ ट्रस्ट से खर्चे 150 करोड़ एक मुश्तजमा करें

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