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लापरवाही से मरीज हुआ परेशान: क्रस्ना की रिपोर्ट में किडनी फेल, दूसरी लैब ने सब ठीक बताया; यहां सामने आया मामला

Wed, 14 Jan 2026 07:35 PM IST
अंकेश डोगरा संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन।
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन। Published by: अंकेश डोगरा Updated Wed, 14 Jan 2026 07:35 PM IST
सार

सोलन क्षेत्रीय अस्पताल की क्रस्ना लैब जिसने एक मरीज को गलत रिपोर्ट दे दी। रिपोर्ट ऐसी कि मरीज के पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई जब उसने देखा कि क्रिएटिनिन इतना अधिक था कि वह किडनी फेलियर को दिखा रहा था। पढ़ें पूरी खबर...

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Himachal Solan Krsnaa lab reported kidney failure other labs showed all fine
क्रस्ना लैब (सांकेतिक तस्वीर)। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

क्षेत्रीय अस्पताल की क्रस्ना लैब में होने वाले टेस्ट की रिपोर्टों पर सवाल खड़े हो रहे हैं। इससे मरीज परेशान हो रहे हैं। कई मरीजों को फिर से टेस्ट करवाने पड़ रहे हैं।अस्पताल प्रबंधन ने क्रस्ना लैब प्रबंधक को सतर्कता से कार्य करने की हिदायत दी है। अधिकतर दिक्कत किडनी संबंधी टेस्ट में आ रही है। क्षेत्रीय अस्पताल सोलन में एक मरीज ने किडनी का क्रिएटिनिन जानने के लिए क्रस्ना लैब में खून के सैंपल दिए। सैंपल के बाद जांच की गई और रिपोर्ट मरीज को दी गई।

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रिपोर्ट में मरीज ने जब क्रिएटिनिन देखा तो पैर तले जमीन खिसक गई। मरीज की रिपोर्ट में क्रिएटिनिन इतना अधिक था कि वह किडनी फेलियर को दिखा रहा था। जब वह चिकित्सक के पास पहुंचा तो रिपोर्ट देख परेशान हो गए। चिकित्सक ने तुरंत दूसरी लैब में टेस्ट करवाने की सलाह दी। इसके बाद निजी लैब की रिपोर्ट बिल्कुल ही विपरीत आ गई। लैब प्रबंधक दावा करते हैं कि जांच मशीनों में किसी भी प्रकार की दिक्कत नहीं हैं। वहीं, मरीजों को बाहरी लैब में टेस्ट करवाने पर हजारों रुपये लग रहे हैं।

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अस्पताल में मरीज की सही बीमारी का पता लगाने के लिए विशेषज्ञों की ओर से टेस्ट करवाए जाते हैं। सुबह 9:30 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक सरकारी लैब में टेस्ट होते हैं। इसके बाद क्रस्ना लैब में टेस्ट की सुविधा दी जाती है, लेकिन सुविधा मरीजों के काम नहीं आ रही है। क्रस्ना लैब में टेस्ट के बाद मरीजों को कई बार रिपोर्ट संदेह होने पर बाहर टेस्ट के लिए जाना पड़ता है।

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लैब प्रबंधक बोला, टाइपिंग मिस्टेक
लैब प्रबंधकों ने हाल ही में मरीजों को दी गई किडनी की रिपोर्ट में टाइपिंग मिस्टेक होने की बात कही है, लेकिन टाइपिंग मिस्टेक से भी मरीज को अगर गलत दवाइयां खानी पड़ जाए तो जिम्मेवार कौन होगा। बहरहाल अस्पताल प्रबंधन ने भी संज्ञान लिया है। किसी भी टेस्ट में अगर संदेह होता है तो संबंधित चिकित्सक से बात करने के लिए कहा है ताकि रिपोर्ट में कोई गड़बड़ी न हो सके और मरीज को सही उपचार मिल सके।

क्रस्ना लैब प्रबंधकों से बात की गई है। उन्हें सही रिपोर्ट देने के लिए कहा है ताकि मरीज परेशान न हो। हिदायत भी दी है कि इस प्रकार की गलती को पुन: न दोहराया जाए। -डॉ. राकेश पंवार, चिकित्सा अधीक्षक, क्षेत्रीय अस्पताल सोलन
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