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Solan News: जल जनित रोगों से बचाव के बारे में लोगों को करें जागरूक
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खंड चिकित्सा अधिकारी ने ली जल जनित रोगों के बचाव को लेकर बैठक
संवाद न्यूज एजेंसी
बद्दी (सोलन)। बद्दी स्वास्थ्य खंड में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और राज्य सरकार की योजनाओं पर बैठक आयोजित की गई। खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. संजय रनोट ने आशा कार्यकर्ताओं, सीएचओ, फीमेल हेल्थ वर्कर, डेटा ऑपरेटर और अकाउंटेंट के साथ यह बैठक की। उन्होंने बरसात में फैलने वाले जल जनित रोगों से बचाव के उपायों के बारे में जानकारी दी।
उन्होंने फील्ड स्टाफ को अपने-अपने क्षेत्रों में बचाव के कदम उठाने के निर्देश दिए। उन्होंने विशेष रूप से डेंगू, मलेरिया और लेप्टोस्पायरोसिस जैसे रोगों पर चर्चा की। लेप्टोस्पायरोसिस एक जीवाणु जनित रोग है जो दूषित पानी और मिट्टी के संपर्क से फैलता है। यह चूहों, गायों, भैंसों, सूअरों और कुत्तों के पेशाब से दूषित पानी या मिट्टी के संपर्क में आने से होता है। यह रोग शरीर के कटे हुए हिस्सों, नाक, कान और मुंह से शरीर में प्रवेश कर सकता है। इसके लक्षणों में तेज बुखार, ठंड लगना, सिर दर्द, उल्टी, पिंडलियों में दर्द, कमजोरी और आंखों का लाल होना शामिल है। रोगी को सांस लेने में भी तकलीफ हो सकती है। ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत नजदीकी अस्पताल जाने और चिकित्सक की सलाह लेने की बात कही गई।
आशा कार्यकर्ताओं को जलभराव वाले क्षेत्रों पर विशेष निगरानी रखने को कहा गया। उन्हें संदिग्ध रोगियों को तुरंत अस्पताल भेजने और प्रतिदिन बुखार की जानकारी अस्पताल को देने के निर्देश दिए गए। डेंगू और मलेरिया मच्छरों के काटने से फैलते हैं, इसलिए बचाव जरूरी है। बीएमओ ने आशा कार्यकर्ताओं से लोगों को जल जनित रोगों से बचाव के उपायों के बारे में जागरूक करने का आग्रह किया।
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लोगों को रात में मच्छरदानी का प्रयोग करने की सलाह दी गई। उन्हें पूरी बाजू के कपड़े पहनने और दरवाजों व खिड़कियों पर जाली लगाने को कहा गया। घरों के कूलर और गमलों में पानी नियमित रूप से बदलते रहने के निर्देश दिए गए।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बद्दी (सोलन)। बद्दी स्वास्थ्य खंड में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और राज्य सरकार की योजनाओं पर बैठक आयोजित की गई। खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. संजय रनोट ने आशा कार्यकर्ताओं, सीएचओ, फीमेल हेल्थ वर्कर, डेटा ऑपरेटर और अकाउंटेंट के साथ यह बैठक की। उन्होंने बरसात में फैलने वाले जल जनित रोगों से बचाव के उपायों के बारे में जानकारी दी।
उन्होंने फील्ड स्टाफ को अपने-अपने क्षेत्रों में बचाव के कदम उठाने के निर्देश दिए। उन्होंने विशेष रूप से डेंगू, मलेरिया और लेप्टोस्पायरोसिस जैसे रोगों पर चर्चा की। लेप्टोस्पायरोसिस एक जीवाणु जनित रोग है जो दूषित पानी और मिट्टी के संपर्क से फैलता है। यह चूहों, गायों, भैंसों, सूअरों और कुत्तों के पेशाब से दूषित पानी या मिट्टी के संपर्क में आने से होता है। यह रोग शरीर के कटे हुए हिस्सों, नाक, कान और मुंह से शरीर में प्रवेश कर सकता है। इसके लक्षणों में तेज बुखार, ठंड लगना, सिर दर्द, उल्टी, पिंडलियों में दर्द, कमजोरी और आंखों का लाल होना शामिल है। रोगी को सांस लेने में भी तकलीफ हो सकती है। ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत नजदीकी अस्पताल जाने और चिकित्सक की सलाह लेने की बात कही गई।
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आशा कार्यकर्ताओं को जलभराव वाले क्षेत्रों पर विशेष निगरानी रखने को कहा गया। उन्हें संदिग्ध रोगियों को तुरंत अस्पताल भेजने और प्रतिदिन बुखार की जानकारी अस्पताल को देने के निर्देश दिए गए। डेंगू और मलेरिया मच्छरों के काटने से फैलते हैं, इसलिए बचाव जरूरी है। बीएमओ ने आशा कार्यकर्ताओं से लोगों को जल जनित रोगों से बचाव के उपायों के बारे में जागरूक करने का आग्रह किया।
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लोगों को रात में मच्छरदानी का प्रयोग करने की सलाह दी गई। उन्हें पूरी बाजू के कपड़े पहनने और दरवाजों व खिड़कियों पर जाली लगाने को कहा गया। घरों के कूलर और गमलों में पानी नियमित रूप से बदलते रहने के निर्देश दिए गए।