किसानों के खेतों से करोड़ों की फसलों को उखाड़ ले गया पानी
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भारी बारिश और ओलावृष्टि किसानों की मेहनत पर कहर बनकर बरसी। जिला के अधिकांश क्षेत्रों में सैकड़ों किसानों की करोड़ों रुपये की पैदावार तबाह हो गई है। किसानों रोजी रोटी का जरिया टमाटर, फ्रासबीन और शिमला मिर्च की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। इन नकदी फसलों का हर साल सोलन में करोड़ों रुपये का कारोबार होता है। गेहूं की कटी और खड़ी पैदावार भारी बारिश के कारण भीगकर काली पड़ गई है। भारी बारिश से नदी नालों में आए उफान से कई बीघा जमीन फसलों समेत पानी में बह गई है। सलोगड़ा, अश्वनीखड्ड और हरठ का क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित है।
जिला में भारी नुकसान की आशंका को देखते हुए क्षति का जायजा लेने के लिए राजस्व, कृषि विभाग की टीमों ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा शुरू कर दिया है। उधर बारिश थमने के बाद किसानों ने भी खेतों का रुख किया। नुकसान के हालात को देखकर किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच गई हैं। कुछ किसानों का कहना है कि बैंकों से बीज, दवाई, खाद, ट्रैक्टर और अन्य उपकरण के लिए किसानों ने लाखों का ऋण लिया है। फसलों और बगीचों के बर्बाद होने से वह टूट चुके हैं। कई जगहों पर किसानों-बागवानों ने श्रमिक भी लगाए हैं। किसानों का कहना है कि यदि आर्थिक तौर पर सरकार ने मदद नहीं की तो किसान कृषि छोड़ने के लिए मजबूर होंगे।
किसका कितना होता है कारोबार
टमाटर
सोलन में टमाटर का सालाना कारोबार 36 करोड़ का है। 4200 हेक्टेयर जमीन में औसतन सालाना 9,74,948 क्विंटल का उत्पादन होता है।
शिमला मिर्च
सोलन में शिमला मिर्च का सालाना उत्पादन 26290 क्विंटल उत्पादन औसतन किया जाता है। 41.20 करोड़ का कारोबार होता है।
फ्रासबीन
फ्रासबीन का 42101 क्विंटल उत्पादन औसतन किया जाता है। 9.50 करोड़ का सालाना कारोबार होता है। वहीं मशरूम का 900 क्विंटल उत्पादन होता है। 50 लाख का सालाना कारोबार रहता है।
किसान आयोग का गठन हो
जिला के किसानों के पास कृषि को छोड़कर अन्य कोई कमाई का साधन और व्यवस्था नहीं है जिससे वह अपने परिवार का पालन-पोषण कर सके। ग्रामीणों ने मांग की कि किसानों की समस्या की सुनवाई के लिए किसान आयोग का गठन किया जाए। किसान एमएलए और एमपी से नाखुश हैं, क्योंकि वह उनके वेतन बढ़ाने का बिल पांच मिनट में पास हो जाता है। किसानों की समस्याओं को दूर करने के लिए कोई भी उचित कदम नहीं उठाए जाते।
टमाटर और शिमला मिर्च की फसलें तबाह
किसानों का कहना है कि प्रभावित क्षेत्रों में टमाटर, शिमला मिर्च सहित अन्य नगदी सब्जियां और फल ओलावृष्टि से पूरी तरह से नष्ट हो गए हैं। ओले गिरने से जहां टमाटर और शिमला मिर्च के पौधे टूट गए हैं वहीं पलम, खुमानी, नाशपाती, दाडू, आडू़ सहित अन्य फल पेड़ों से झड़कर खत्म हो गए हैं।
मुआवजे की मांग
बसाल और डांगरी पंचायत के प्रभावित क्षेत्र के किसान जयाराम, श्याम दत्त शर्मा, देवीचंद, प्रेम चंद, हरिदत्त, राकेश शर्मा, गीता राम, बाबी, राजेंद्र, मनीष, दलीप, गणेश, कृष्ण ठाकुर, रतीराम, बंता, चिंतराम, उमादत्त, बृजमोहन, रवि, गुलजारी लाल ठाकुर, जोगेंद्र, राम लाल, बच्चा, अमर सिंह, जयपाल, रामेश्वर शर्मा, खेम सिंह और अन्य किसानों ने तबाह हुई फसलों के मुआवजे की मांग की है। वहीं बघाट ग्राम सुधार कमेटी के विकास ठाकुर, प्रवीण, कमल मेहता, कमल ठाकुर, टेक चंद, राकी, कवि राज, प्रकाश चंद, अमित कुमार, रजत, रामकिशन, संदीप, सुनील, सोहनलाल और समीर ने कहा किसानों को नुकसान का मुआवजा मिलना चाहिए।
नए सिरे से होगी मेहनत
फसलों को हुए नुकसान से फसलों को अब नए सिरे से तैयार करना पड़ेगा। इसके लिए दोबारा से टमाटर की पनीरी को तैयार करना पड़ेगा। किसानों का कहना है कि शिमला मिर्च की फसलों को तो दोबारा से भी तैयार कर पाना बहुत मुश्किल सा है क्योंकि शिमला मिर्च की पनीरी करीब दो माह बाद ही तैयार होती है। इस फसल के लिए इस समय बहुत देरी हो गई है।
इन क्षेत्रों में हुआ सबसे अधिक नुकसान
सोलन के बसाल, देवली की सैर, डांगरी, पाट्टी, सलोगड़ा, कंडाघाट, डमरोग, गलानग, खनोग, मत्यूल, शामती, कोठो, ओच्छघाट, नौणी, कायलर, बड़ोग, सनहोल क्षेत्रों में बारिश और ओलावृष्टि से खासा नुकसान पहुंचा है। इसमें टमाटर, शिमला मिर्च, गोभी, पलम, खूमानी, आडू, नाशपती और अन्य नगदी फसलें शामिल है। इनके नष्ट होने से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।
सोलन में कटी गेहूं बारिश से तबाह
बारिश और ओलावृष्टि से गेहूं की कटी फसल खेतों में भीगने से नुकसान का अंदेशा प्रबल हो गया है। बसाल, जौणाजी, कुनिहार, अर्की, सुबाथू, कंडाघाट, दाड़लाघाट व सोलन के साथ लगते ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों अभी तक गेहूं की फसल की कटाई चरम पर है। खेतों में कटी पैदावार बारिश में भीगने से काली पड़ सकती है।
नुकसान के आकलन के दिए निर्देश : डीसी
डीसी राकेश कंवर ने कहा कि नुकसान का जायजा लेने के लिए संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं। बारिश और ओलावृष्टि से कई जगह भारी नुकसान की सूचना है। नुकसान का आकलन करके नियमानुसार हर संभव सहायता किसानों को मुहैया करवाए जाने की कोशिश होगी।
दो दिन में रिपोर्ट होगी तैयार
उपनिदेशक कृषि विभाग एचएस राठौर ने कहा कि फील्ड स्टाफ से रिपोर्ट मांगी गई है। दो दिन में नुकसान की रिपोर्ट आ जाएगी। बीबीएन में गेहूं की कटाई का काम पूरा हो चुका है। लिहाजा वहां नुकसान कम है। लेकिन पहाड़ी क्षेत्रों में नकदी पैदावार के अलावा स्टोन फ्रूट को काफी नुकसान पहुंचा है।