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Solan News: क्षय रोग की सूक्ष्मदर्शी जांच के लिए बनाए तीन डायग्नोस्टिक मेडिकल सेंटर
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गांव स्तर पर ही पॉजिटिव रोगियों को दी जाएंगी विशेष सुविधाएं
कबाकलां, चंबाघाट और नालागढ़ में अस्पताल में तैयार की लैब
संदेह मामलों को लेकर नहीं होगी दिक्कत, गांव में किए जाएंगे टेस्ट
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। जिले की पंचायताें को क्षय रोग मुक्त बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने तैयारी शुरू कर दी है। इस मुहिम के तहत तीन नये डायग्नोस्टिक मेडिकल सेंटर बना गए हैं। इन सेंटरों में क्षय रोग पॉजिटिव आने वाले रोगियों को विशेष सुविधा दी जाएगी। इसी के साथ सूक्ष्मदर्शी जांच के लिए भी अलग से लैब तैयार की गई है। वहीं उपचार के लिए भी चिकित्सकों को तैनात कर दिया गया है।
गांव स्तर पर डायग्नोस्टिक मेडिकल सेंटर खोले जाने से अब जहां क्षय रोग का संदेह होने पर लोगों को बड़े अस्पतालों का रुख नहीं करना पड़ेगा। वहीं पॉजिटिव आने के बाद उपचार भी तुरंत शुरू हो सकेगा। इसी के साथ दवाएं भी मौके पर ही दे दी जाएंगी। प्राथमिक चरण में विभाग ने जोहड़जी, चंबाघाट और नालागढ़ में केंद्र खोले हैं। इन केंद्रों में जांच के साथ-साथ पॉजिटिव आने के बाद मरीज की देखभाल भी आसानी से हो सकेगी।
इससे पहले इन क्षेत्रों में सूक्ष्मदर्शी जांच केंद्र नहीं थे। ऐसे में जोहड़जी समेत आसपास के क्षेत्रों में क्षयरोग से संबंधित संदेह मामलों की जांच धर्मपुर या क्षेत्रीय अस्पताल सोलन में होती थी। लोगों को दूरदराज के क्षेत्रों से दूर-दूर जाना पड़ता था। इससे जेब का खर्च भी अधिक हो जाता था। वहीं रिपोर्ट के लिए भी काफी इंतजार करना पड़ता था। इसी तरह नालागढ़ के गांव क्षेत्र में रहने वाले श्रमिकों और अन्य लोगों को भी इस केंद्र का फायदा मिलेगा। वहीं चंबाघाट में भी केंद्र के खुलने से उद्योगों में कार्य करने वाले श्रमिकों को भी संदेह होने पर क्षय रोग की जांच के लिए इधर-उधर नहीं भटकना पड़ेगा। वहीं गांव में ही जांच की सुविधा लोगों को मिल जाएगी।
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गौर रहे कि क्षय रोग मुक्त बनाने के लिए विभागीय टीम लगातार कार्य कर रही है। प्रदेश सरकार की ओर से 2025 तक हिमाचल को टीबी मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इसे लेकर गांव स्तर पर स्वास्थ्य महकमा कार्य कर रहा है। लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सबसे पहले पंचायतों को टीबी मुक्त बनाया जा रहा है। इसमें जहां पंचायत प्रतिनिधियों को जोड़ा गया है। वहीं वार्ड सदस्यों को भी मुहिम के तहत जागरूक किया जा रहा है ताकि वह भी टीबी मरीज का पता लगा सके। वहीं अब विभाग की ओर से गांव में ही सूक्ष्मदर्शी जांच केंद्र खोलने शुरू कर दिए हैं ताकि क्षय रोग का संदेह होने पर परेशान नहीं होना पड़ेगा।
इनसेट
एलोपैथी और आयुष केंद्रों में मरीजों का उपचार शुरू
एलोपैथी और आयुष स्वास्थ्य केंद्रों में अब क्षय रोग के मरीजों को उपचार और दवाएं मिलनी शुरू हो गई हैं। इससे उन्हें भटकना नहीं पड़ेगा। दवा के लिए भी दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ेगा। महकमे ने गांव-गांव में डिस्पेंसरी बनाने का निर्णय लिया है। बलगम जांच में पॉजिटिव आने पर मरीज को वहीं दवा दे दी जाएगी। अब तक आयुष स्वास्थ्य केंद्र से स्प्यूटम सैंपल लिए जाते थे और जांच के लिए भेजे जाते थे।
इनसेट
क्षय रोग मुक्त हिमाचल के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। पंचायतों को भी क्षय रोग मुक्त बनाने के लिए कार्य शुरू कर दिया है। अब क्षय रोग की सूक्ष्मदर्शी जांच के लिए जिले में तीन नये डायग्नोस्टिक मेडिकल सेंटर भी खोलें हैं।
-डॉ. एके सिंह, जिला कार्यक्रम अधिकारी (स्वास्थ्य)।
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कबाकलां, चंबाघाट और नालागढ़ में अस्पताल में तैयार की लैब
संदेह मामलों को लेकर नहीं होगी दिक्कत, गांव में किए जाएंगे टेस्ट
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। जिले की पंचायताें को क्षय रोग मुक्त बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने तैयारी शुरू कर दी है। इस मुहिम के तहत तीन नये डायग्नोस्टिक मेडिकल सेंटर बना गए हैं। इन सेंटरों में क्षय रोग पॉजिटिव आने वाले रोगियों को विशेष सुविधा दी जाएगी। इसी के साथ सूक्ष्मदर्शी जांच के लिए भी अलग से लैब तैयार की गई है। वहीं उपचार के लिए भी चिकित्सकों को तैनात कर दिया गया है।
गांव स्तर पर डायग्नोस्टिक मेडिकल सेंटर खोले जाने से अब जहां क्षय रोग का संदेह होने पर लोगों को बड़े अस्पतालों का रुख नहीं करना पड़ेगा। वहीं पॉजिटिव आने के बाद उपचार भी तुरंत शुरू हो सकेगा। इसी के साथ दवाएं भी मौके पर ही दे दी जाएंगी। प्राथमिक चरण में विभाग ने जोहड़जी, चंबाघाट और नालागढ़ में केंद्र खोले हैं। इन केंद्रों में जांच के साथ-साथ पॉजिटिव आने के बाद मरीज की देखभाल भी आसानी से हो सकेगी।
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इससे पहले इन क्षेत्रों में सूक्ष्मदर्शी जांच केंद्र नहीं थे। ऐसे में जोहड़जी समेत आसपास के क्षेत्रों में क्षयरोग से संबंधित संदेह मामलों की जांच धर्मपुर या क्षेत्रीय अस्पताल सोलन में होती थी। लोगों को दूरदराज के क्षेत्रों से दूर-दूर जाना पड़ता था। इससे जेब का खर्च भी अधिक हो जाता था। वहीं रिपोर्ट के लिए भी काफी इंतजार करना पड़ता था। इसी तरह नालागढ़ के गांव क्षेत्र में रहने वाले श्रमिकों और अन्य लोगों को भी इस केंद्र का फायदा मिलेगा। वहीं चंबाघाट में भी केंद्र के खुलने से उद्योगों में कार्य करने वाले श्रमिकों को भी संदेह होने पर क्षय रोग की जांच के लिए इधर-उधर नहीं भटकना पड़ेगा। वहीं गांव में ही जांच की सुविधा लोगों को मिल जाएगी।
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गौर रहे कि क्षय रोग मुक्त बनाने के लिए विभागीय टीम लगातार कार्य कर रही है। प्रदेश सरकार की ओर से 2025 तक हिमाचल को टीबी मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इसे लेकर गांव स्तर पर स्वास्थ्य महकमा कार्य कर रहा है। लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सबसे पहले पंचायतों को टीबी मुक्त बनाया जा रहा है। इसमें जहां पंचायत प्रतिनिधियों को जोड़ा गया है। वहीं वार्ड सदस्यों को भी मुहिम के तहत जागरूक किया जा रहा है ताकि वह भी टीबी मरीज का पता लगा सके। वहीं अब विभाग की ओर से गांव में ही सूक्ष्मदर्शी जांच केंद्र खोलने शुरू कर दिए हैं ताकि क्षय रोग का संदेह होने पर परेशान नहीं होना पड़ेगा।
इनसेट
एलोपैथी और आयुष केंद्रों में मरीजों का उपचार शुरू
एलोपैथी और आयुष स्वास्थ्य केंद्रों में अब क्षय रोग के मरीजों को उपचार और दवाएं मिलनी शुरू हो गई हैं। इससे उन्हें भटकना नहीं पड़ेगा। दवा के लिए भी दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ेगा। महकमे ने गांव-गांव में डिस्पेंसरी बनाने का निर्णय लिया है। बलगम जांच में पॉजिटिव आने पर मरीज को वहीं दवा दे दी जाएगी। अब तक आयुष स्वास्थ्य केंद्र से स्प्यूटम सैंपल लिए जाते थे और जांच के लिए भेजे जाते थे।
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क्षय रोग मुक्त हिमाचल के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। पंचायतों को भी क्षय रोग मुक्त बनाने के लिए कार्य शुरू कर दिया है। अब क्षय रोग की सूक्ष्मदर्शी जांच के लिए जिले में तीन नये डायग्नोस्टिक मेडिकल सेंटर भी खोलें हैं।
-डॉ. एके सिंह, जिला कार्यक्रम अधिकारी (स्वास्थ्य)।