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Solan News: जन्म प्रमाण पत्र के लिए पिता के लगवाए 40 चक्कर
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केएनएच शिमला पर प्रताड़ना का आरोप
मार्च में कमल की पत्नी ने बेटे को दिया जन्म
नाम बदलने पर ही अस्पताल में मंगवा दिए कई स्टांप पेपर
संवाद न्यूज एजेंसी
चायल (सोलन)। उपमंडल की ग्राम पंचायत नगाली के गांव कनोड़ी निवासी कमल किशोर को अपने चार माह के बेटे के जन्म प्रमाण पत्र के लिए कमला नेहरू अस्पताल शिमला के 40 चक्कर लगाने पड़े। कमल ने आरोप लगाया कि अस्पताल में अफसरशाही और कर्मचारियों के असंवेदनशील व्यवहार से वे मानसिक और आर्थिक रूप से परेशान हुए।
कमल का कहना है कि उसका बेटा मार्च 2025 में कमला नेहरू अस्पताल में पैदा हुआ था। बच्चे का नाम रुद्रांश रखा गया था, जबकि अस्पताल रिकॉर्ड में नाम विरंश दर्ज था। इस मामूली त्रुटि के चलते उसे नोटरी से स्टांप पेपर पर पिता की ओर से घोषणा, फिर मां की ओर से भी स्टांप पर पुष्टि, और अंततः अंग्रेजी व हिंदी अखबारों में नाम परिवर्तन का विज्ञापन देना पड़ा।
कमल ने कहा कि सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बावजूद, जब वह जन्म प्रमाण पत्र लेने पहुंचा तो कर्मचारियों ने दुर्व्यवहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सब अस्पताल कर्मचारियों की मनमर्जी और उदासीन रवैये के कारण हुआ। कमल किशोर ने अब स्वास्थ्य मंत्री डॉ. कर्नल धनीराम शांडिल से मांग की है कि इस मामले में संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में किसी अन्य को ऐसी परेशानी का सामना न करना पड़े।
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मार्च में कमल की पत्नी ने बेटे को दिया जन्म
नाम बदलने पर ही अस्पताल में मंगवा दिए कई स्टांप पेपर
संवाद न्यूज एजेंसी
चायल (सोलन)। उपमंडल की ग्राम पंचायत नगाली के गांव कनोड़ी निवासी कमल किशोर को अपने चार माह के बेटे के जन्म प्रमाण पत्र के लिए कमला नेहरू अस्पताल शिमला के 40 चक्कर लगाने पड़े। कमल ने आरोप लगाया कि अस्पताल में अफसरशाही और कर्मचारियों के असंवेदनशील व्यवहार से वे मानसिक और आर्थिक रूप से परेशान हुए।
कमल का कहना है कि उसका बेटा मार्च 2025 में कमला नेहरू अस्पताल में पैदा हुआ था। बच्चे का नाम रुद्रांश रखा गया था, जबकि अस्पताल रिकॉर्ड में नाम विरंश दर्ज था। इस मामूली त्रुटि के चलते उसे नोटरी से स्टांप पेपर पर पिता की ओर से घोषणा, फिर मां की ओर से भी स्टांप पर पुष्टि, और अंततः अंग्रेजी व हिंदी अखबारों में नाम परिवर्तन का विज्ञापन देना पड़ा।
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कमल ने कहा कि सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बावजूद, जब वह जन्म प्रमाण पत्र लेने पहुंचा तो कर्मचारियों ने दुर्व्यवहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सब अस्पताल कर्मचारियों की मनमर्जी और उदासीन रवैये के कारण हुआ। कमल किशोर ने अब स्वास्थ्य मंत्री डॉ. कर्नल धनीराम शांडिल से मांग की है कि इस मामले में संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में किसी अन्य को ऐसी परेशानी का सामना न करना पड़े।
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