यहां ड्राइंग शिक्षक ही पढ़ा रहा गणित अौर साइंस
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घर के पास बेहतर शिक्षा दिलाने के दावे शिक्षा की दहलीज पर दम तोड़ रहे हैं। आलम यह है कि ड्राइंग के शिक्षक बच्चों को साइंस और गणित पढ़ा रहे हैं। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि शिक्षा को लेकर हमारी सरकारें कितनी सजग हैं। ग्रामीण क्षेत्र खरोटा के 22 विद्यार्थियों के भविष्य को भी शिक्षा विभाग ने एक कला अध्यापक के भरोसे छोड़ दिया है। बद्दी तहसील के तहत पटटा-नाली पंचायत में आने वाले मिडल स्कूल खरोटा में कक्षा छठी से लेकर आठवीं तक के बच्चों को एक ही अध्यापक पढ़ा रहा है। हैरत इस बात की हैै कि बच्चों को साइंस, मैथ और अंग्रेजी जैसे कठिन विषयों की पढ़ाई भी एक ड्राइंग टीचर को ही करवानी पड़ रही है। शिक्षा की गुणवत्ता को विभाग स्वयं ही ठेंगा दिखा रहा है।
स्कूल के लिए पांच अध्यापक की सेंग्शन स्ट्रेंथ होने के बावजूद 22 विद्यार्थियों के भविष्य को महज कला अध्यापक पर छोड़ दिया है। एक ओर जहां प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के दावे सरकार कर रही है, वहीं स्कूल में विषय विशेष शिक्षकों के रिक्त पदों के कारण अभिभावक भी बच्चों से सरकारी स्कूल बंद करवाने को मजबूर हो रहे हैं। गौरतलब है कि एक अगस्त को ही साइंस टीचर की स्कूल से रिटायरमेंट हुई है। इसके बाद स्कूल में किसी दूसरे अध्यापक को नहीं रखा है। न ही शिक्षा विभाग ने रिटायरमेंट से पहले यहां शिक्षक तैनात करने की जहमत उठाई।
एसएमसी खरोटा के प्रधान बलविंद्र सिंह ने कहा कि एससी बाहुल क्षेत्र होने के बावजूद स्कूल में शिक्षकों के रिक्त पदों को नहीं भरा जा रहा है। ग्रामीण अपने बच्चों को दूसरे सरकारी स्कूलों के पांच किलोमीटर की दूरी पर होने से नहीं भेज सकते। कहा कि विभाग की अनदेखी के कारण विद्यार्थियों का भविष्य दाव पर लग रहा है। रिक्त पदों को जल्द भरने के लिए एसएमसी की ओर से भी प्रस्ताव पारित कर शिक्षा विभाग को सौंपा जा रहा है।
जल्द होंगी शिक्षकों की नियुक्ति : शर्मा
शिक्षा उपनिदेशक चंद्रेश्वर शर्मा ने कहा कि अनुबंध आधार पर हाल ही में साक्षात्कार लिए हैं। निदेशालय से नए अध्यापकों के आने पर ही स्कूल में शिक्षक की व्यवस्था की जा सकेगी। कहा कि डेपुटेशन पर दूसरे अध्यापक को भेजने पर भी सरकार ने प्रतिबंध लगा रखा है।