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ध्रुव ने कठिन तप से प्राप्त किए भगवान : आनंद
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प्राचीन ठाकुरद्वारा मंदिर हाटकोट कुनिहार में कृष्ण जन्माष्टमी के उपलक्ष्य में आयोजित श्रीमद्भाग
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कोट मंदिर कुनिहार में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
कुनिहार (सोलन)। प्राचीन ठाकुरद्वारा मंदिर हाटकोट कुनिहार में श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन अरुणानंद आनंद ने भगवान के अवतारों के साथ ध्रुव चरित्र का प्रसंग सुनाया। उन्होंने श्रद्धालुओं को विपरीत परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखने और दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया।
कथा व्यास ने राजा उत्तानपाद और उनके पुत्र ध्रुव की कथा का वर्णन करते हुए बताया कि सौतेली माता के कटु वचनों से आहत होकर बालक ध्रुव ने भगवान को प्राप्त करने का संकल्प लिया और तपस्या शुरू की। ध्रुव की तपस्या से प्रसन्न होकर विष्णु ने उन्हें दर्शन दिए और आशीर्वाद दिया। इसी अटल संकल्प के कारण ध्रुव को ध्रुव पद प्राप्त हुआ।
कथा के दौरान जय जय राधा रमण हरि बोल भजन प्रस्तुत किया गया। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन में भाग लिया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा का श्रवण किया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
कुनिहार (सोलन)। प्राचीन ठाकुरद्वारा मंदिर हाटकोट कुनिहार में श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन अरुणानंद आनंद ने भगवान के अवतारों के साथ ध्रुव चरित्र का प्रसंग सुनाया। उन्होंने श्रद्धालुओं को विपरीत परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखने और दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया।
कथा व्यास ने राजा उत्तानपाद और उनके पुत्र ध्रुव की कथा का वर्णन करते हुए बताया कि सौतेली माता के कटु वचनों से आहत होकर बालक ध्रुव ने भगवान को प्राप्त करने का संकल्प लिया और तपस्या शुरू की। ध्रुव की तपस्या से प्रसन्न होकर विष्णु ने उन्हें दर्शन दिए और आशीर्वाद दिया। इसी अटल संकल्प के कारण ध्रुव को ध्रुव पद प्राप्त हुआ।
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कथा के दौरान जय जय राधा रमण हरि बोल भजन प्रस्तुत किया गया। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन में भाग लिया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा का श्रवण किया।
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