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Solan News: अस्पतालों में डेंगू और स्क्रब टायफस लक्षण वाले आ रहे मरीज
Wed, 04 Sep 2024 11:57 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
Updated Wed, 04 Sep 2024 11:57 PM IST
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क्षेत्रीय अस्पताल में मेडिसन ओपीडी के बाहर लगी कतारें। संवाद
टेस्ट करवाने पर नेगेटिव आ रही मरीजों की रिपोर्ट
हालत को देखते हुए रोजाना पांच मरीज हो रहे भर्ती
शरीर दर्द, तेज बुखार और वायरल के बढ़े मामले
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। जिले के अस्पतालों में इन दिनों डेंगू और स्क्रब टायफस के लक्षणों से पीड़ित होकर मरीज आ रहे हैं। ऐसे में अस्पतालों में ओपीडी समेत इंडोर मरीजों की संख्या बढ़ गई है। हैरत की बात तो यह है कि टेस्ट करवाने पर मरीजों की रिपोर्ट नेगेटिव आ रही है।
चिकित्सक भी काफी चिंतित हैं कि मरीजों की रिपोर्ट नेगेटिव आने पर भी ऐसे लक्षण क्यों आ रहे हैं। वहीं मरीजों की हालात को देखते हुए रोजाना पांच मरीजों को वार्ड में भर्ती करना पड़ रहा है। चिकित्सकों के अनुसार अस्पताल में आने में अधिकतर मरीजों में बुखार करीब 103 डिग्री तक जा रहा है। इसी के साथ सिर में अचानक दर्द और शरीर में भी तीव्र दर्द हो रहा है। इन मरीजों को डेंगू और स्क्रब टायफस की जांच करवाने के लिए कहा जाता है। टेस्ट करवाने पर मरीजों की रिपोर्ट नेगेटिव आ रही है। यही नहीं बुखार भी एक हफ्ते से अधिक तक रहता है और मरीज को ठीक होने में भी काफी देरी लग रही है।
जिले के सबसे बड़े क्षेत्रीय अस्पताल में भी मेडिसिन ओपीडी काफी अधिक हो गई है। रोजाना 400 की ओपीडी जा रही है। इसमें 200 मरीज ऐसे हैं जो वायरल से पीड़ित है। इनमें से कई मरीजों की हालत काफी अधिक खराब है। जिन्हें चेकअप के बाद वार्ड में भर्ती किया जा रहा है। क्षेत्रीय अस्पताल के वार्ड में भी इस कारण मरीजों की संख्या बढ़ गई है। इसे देखते हुए जिला स्वास्थ्य विभाग ने भी दिशा निर्देश जारी किए हैं। इसी के साथ पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनने का आग्रह किया है।
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इनसेट
स्क्रब टायफस के लक्षण
स्क्रब टायफस आरेशिया सुशुमुशी वायरस के काटने से होता है। यह घास में पाया जाता है। स्क्रब टायफस की चपेट में 25 से 45 वर्ष की आयु वर्ग के लोग अधिक आते हैं। 104 से 105 डिग्री तक बुखार हो सकता है। जोड़ों में दर्द व कंपकपी के साथ बुखार का आना, शरीर में अकडऩ, या शरीर का टूटा हुआ लगना इसके लक्षण हैं। अधिक संक्रमण होने पर गर्दन, बाजू के नीचे, कूल्हों के ऊपर गिल्टियां हो सकती हैं। काले रंग के चकत्ते बनते हैंं।
इनसेट
डेंगू के लक्षण
-तेज बुखार/थकान
-जी मिचलाना/ उल्टी आना
-मांसपेशियों/जोड़ों में दर्द
-सिरदर्द/आंखों के पीछे वाले भाग में दर्द
-मसूड़ों/नाक से खून बहना
इनसेट
बचाव के उपाय
- आसपास जल जमाव न होने दें।
- हमेशा साफ और फुल कपड़े पहनें।
- घर के आसपास घास या झाड़ियां न उगने दें।
- खेतों में काम करते समय हाथ व पैरों को अच्छे से ढक कर रखें।
इनसेट
अस्पतालों में इन दिनों वायरल के मामले काफी बढ़ गए हैं। लक्षण देखने पर डेंगू और स्क्रब टायफस जैसे लग रहे हैं। लेकिन टेस्ट में रिपोर्ट नेगेटिव आ रही है। केवल बीबीएन क्षेत्र में ही डेंगू के चार पॉजिटिव मामले हैं। लोगों से आग्रह है कि लक्षण आने पर तुरंत चिकित्सक की सलाह लें।
-डॉ. अमित रंजन तलवाड़
कार्यकारी मुख्य चिकित्सा अधिकारी, सोलन
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हालत को देखते हुए रोजाना पांच मरीज हो रहे भर्ती
शरीर दर्द, तेज बुखार और वायरल के बढ़े मामले
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। जिले के अस्पतालों में इन दिनों डेंगू और स्क्रब टायफस के लक्षणों से पीड़ित होकर मरीज आ रहे हैं। ऐसे में अस्पतालों में ओपीडी समेत इंडोर मरीजों की संख्या बढ़ गई है। हैरत की बात तो यह है कि टेस्ट करवाने पर मरीजों की रिपोर्ट नेगेटिव आ रही है।
चिकित्सक भी काफी चिंतित हैं कि मरीजों की रिपोर्ट नेगेटिव आने पर भी ऐसे लक्षण क्यों आ रहे हैं। वहीं मरीजों की हालात को देखते हुए रोजाना पांच मरीजों को वार्ड में भर्ती करना पड़ रहा है। चिकित्सकों के अनुसार अस्पताल में आने में अधिकतर मरीजों में बुखार करीब 103 डिग्री तक जा रहा है। इसी के साथ सिर में अचानक दर्द और शरीर में भी तीव्र दर्द हो रहा है। इन मरीजों को डेंगू और स्क्रब टायफस की जांच करवाने के लिए कहा जाता है। टेस्ट करवाने पर मरीजों की रिपोर्ट नेगेटिव आ रही है। यही नहीं बुखार भी एक हफ्ते से अधिक तक रहता है और मरीज को ठीक होने में भी काफी देरी लग रही है।
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जिले के सबसे बड़े क्षेत्रीय अस्पताल में भी मेडिसिन ओपीडी काफी अधिक हो गई है। रोजाना 400 की ओपीडी जा रही है। इसमें 200 मरीज ऐसे हैं जो वायरल से पीड़ित है। इनमें से कई मरीजों की हालत काफी अधिक खराब है। जिन्हें चेकअप के बाद वार्ड में भर्ती किया जा रहा है। क्षेत्रीय अस्पताल के वार्ड में भी इस कारण मरीजों की संख्या बढ़ गई है। इसे देखते हुए जिला स्वास्थ्य विभाग ने भी दिशा निर्देश जारी किए हैं। इसी के साथ पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनने का आग्रह किया है।
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इनसेट
स्क्रब टायफस के लक्षण
स्क्रब टायफस आरेशिया सुशुमुशी वायरस के काटने से होता है। यह घास में पाया जाता है। स्क्रब टायफस की चपेट में 25 से 45 वर्ष की आयु वर्ग के लोग अधिक आते हैं। 104 से 105 डिग्री तक बुखार हो सकता है। जोड़ों में दर्द व कंपकपी के साथ बुखार का आना, शरीर में अकडऩ, या शरीर का टूटा हुआ लगना इसके लक्षण हैं। अधिक संक्रमण होने पर गर्दन, बाजू के नीचे, कूल्हों के ऊपर गिल्टियां हो सकती हैं। काले रंग के चकत्ते बनते हैंं।
इनसेट
डेंगू के लक्षण
-तेज बुखार/थकान
-जी मिचलाना/ उल्टी आना
-मांसपेशियों/जोड़ों में दर्द
-सिरदर्द/आंखों के पीछे वाले भाग में दर्द
-मसूड़ों/नाक से खून बहना
इनसेट
बचाव के उपाय
- आसपास जल जमाव न होने दें।
- हमेशा साफ और फुल कपड़े पहनें।
- घर के आसपास घास या झाड़ियां न उगने दें।
- खेतों में काम करते समय हाथ व पैरों को अच्छे से ढक कर रखें।
इनसेट
अस्पतालों में इन दिनों वायरल के मामले काफी बढ़ गए हैं। लक्षण देखने पर डेंगू और स्क्रब टायफस जैसे लग रहे हैं। लेकिन टेस्ट में रिपोर्ट नेगेटिव आ रही है। केवल बीबीएन क्षेत्र में ही डेंगू के चार पॉजिटिव मामले हैं। लोगों से आग्रह है कि लक्षण आने पर तुरंत चिकित्सक की सलाह लें।
-डॉ. अमित रंजन तलवाड़
कार्यकारी मुख्य चिकित्सा अधिकारी, सोलन