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सोलन में स्टेशनरी के नाम पर बड़ा गोलमाल
ब्यूरो/अमर उजाला, सोलन
Updated Fri, 19 Feb 2016 06:27 PM IST
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नया शिक्षा सत्र शुरू हो चुका है। स्कूलों में एडमिशन का दौर चल रहा है। इसी का फायदा उठाकर कुछ कारोबारी स्टेशनरी के नाम पर सरकार और अभिभावकों को सरेआम लूट रहे हैं।
जिला सोलन में स्टेशनरी के नाम पर लाखों के गोलमाल का अंदेशा है। कुछ शिक्षण संस्थानों और कारोबारियों की मिलीभगत से अभिभावकों तथा सरकार को चपत लगाई जा रही है। एक तो बिल नहीं दिया जा रहा है और अगर बिल थमाया भी जा रहा है तो टैक्स चोरी के चक्कर में स्टेशनरी का सामान बिल से गायब है। इस पर पांच फीसदी तक वैट का प्रावधान है।
अभिभावकों से किताबों और स्टेशनरी के सामान की ओवरचार्जिंग की भी सूचना है। इस तरह एक बड़े टैक्स चोरी के मामले का अंदेशा आबकारी एवं कराधान विभाग को भी है।
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सूचना के आधार पर आबकारी एवं कराधान विभाग के अधिकारियों ने कार्रवाई करने के निर्देश जारी कर दिए हैं। विभाग सर्वे को अंजाम दे रहा है। कारोबारियों के रिकार्ड खंगाले जाने की बात की जा ही है। कुछ बड़े बुक सप्लायर संदेह के घेरे में है।
226 स्कूलों में 56 हजार स्टूडेंट
जिला सोलन में निजी स्कूलों की संख्या करीब 226 है। एक अनुमान के मुताबिक औसतन प्रति स्कूल 250 विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। लिहाजा सोलन के निजी स्कूलों में करीब 56000 विद्यार्थी पढ़ रहा है। ऐसे में प्रति स्टूडेंट ओवरचार्जिंग या टैक्स की चोरी का अनुमान लगाना हो तो रकम लाखों में पहुंचेगी। लिहाजा विभाग इसी फंडे पर काम कर रहा है।
इस तरह लगा रहा चूना
विभाग को संदेह है कि इसमें इंगलिश, हिंदी व्याकरण, संस्कृत, ग्रामर, मैथ, साइंस, सोशल साइंस, जीके, आईटी और पेपर बुक टैक्स फ्री आइटम का बिल अभिभावकों को थमाया जा रहा है। इसके अलावा स्टेशनरी (जिस पर टैक्स लगना है) इसकी रसीद अलग से थमाई जा रही है। इसमें रजिस्टर, स्केच, फाइल, प्रोजेक्ट फाइल, पैकेट, प्रोजेक्ट शीट, पैकेट टेस्ट शीट, कनवेस बोर्ड, बाटल टरपंटाइन, फ्लेट ब्रश, आयल शीट, कलर प्लेट और कवर शामिल हैं। लेकिन पक्का बिल टैक्स फ्री के नाम पर काटा जा रहा है।
ऐसे सामने आया मामला
चर्चा है कि कुछ अधिकारी ही इस गोलमाल का शिकार हुए हैं। कारोबारियों ने उनको भी चूना लगा दिया है। इसके अलावा विभाग के पास कुछ सूचनाएं भी पहुंची हैं। इसके बाद विभाग ने इस पर काम करना शुरू कर दिया है। बताया जा रहा है कि विभाग सोलन समेत धर्मपुर, परवाणू, कुनिहार, अर्की और अन्य क्षेत्रों में निजी तथा सरकारी एजेंसियों के माध्यम से सर्वे को अंजाम दे रहा है। इस संबंध में कई शिकायतें आने के बाद यह कवायद शुरू की गई है।
टीमें गठित, सर्वे शुरू : सहआयुक्त
जिला आबकारी एवं कराधान सह आयुक्त रवि सूद ने बताया कि इस संबंध में शिकायतें मिली हैं। इस पर कार्रवाई होगी। विभाग ने सर्वे के लिए टीमें गठित कर दी हैं। मामले सामने आए तो नियमानुसार कड़ी कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि बिल मांगना खरीदार का अधिकार है। उन्होंने अपील की है कि किसी भी सामान की खरीदारी का पक्का बिल लें। कारोबारी बिल देने में आनाकानी करता है तो उसकी सूचना विभाग को दें।
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जिला सोलन में स्टेशनरी के नाम पर लाखों के गोलमाल का अंदेशा है। कुछ शिक्षण संस्थानों और कारोबारियों की मिलीभगत से अभिभावकों तथा सरकार को चपत लगाई जा रही है। एक तो बिल नहीं दिया जा रहा है और अगर बिल थमाया भी जा रहा है तो टैक्स चोरी के चक्कर में स्टेशनरी का सामान बिल से गायब है। इस पर पांच फीसदी तक वैट का प्रावधान है।
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अभिभावकों से किताबों और स्टेशनरी के सामान की ओवरचार्जिंग की भी सूचना है। इस तरह एक बड़े टैक्स चोरी के मामले का अंदेशा आबकारी एवं कराधान विभाग को भी है।
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सूचना के आधार पर आबकारी एवं कराधान विभाग के अधिकारियों ने कार्रवाई करने के निर्देश जारी कर दिए हैं। विभाग सर्वे को अंजाम दे रहा है। कारोबारियों के रिकार्ड खंगाले जाने की बात की जा ही है। कुछ बड़े बुक सप्लायर संदेह के घेरे में है।
226 स्कूलों में 56 हजार स्टूडेंट
जिला सोलन में निजी स्कूलों की संख्या करीब 226 है। एक अनुमान के मुताबिक औसतन प्रति स्कूल 250 विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। लिहाजा सोलन के निजी स्कूलों में करीब 56000 विद्यार्थी पढ़ रहा है। ऐसे में प्रति स्टूडेंट ओवरचार्जिंग या टैक्स की चोरी का अनुमान लगाना हो तो रकम लाखों में पहुंचेगी। लिहाजा विभाग इसी फंडे पर काम कर रहा है।
इस तरह लगा रहा चूना
विभाग को संदेह है कि इसमें इंगलिश, हिंदी व्याकरण, संस्कृत, ग्रामर, मैथ, साइंस, सोशल साइंस, जीके, आईटी और पेपर बुक टैक्स फ्री आइटम का बिल अभिभावकों को थमाया जा रहा है। इसके अलावा स्टेशनरी (जिस पर टैक्स लगना है) इसकी रसीद अलग से थमाई जा रही है। इसमें रजिस्टर, स्केच, फाइल, प्रोजेक्ट फाइल, पैकेट, प्रोजेक्ट शीट, पैकेट टेस्ट शीट, कनवेस बोर्ड, बाटल टरपंटाइन, फ्लेट ब्रश, आयल शीट, कलर प्लेट और कवर शामिल हैं। लेकिन पक्का बिल टैक्स फ्री के नाम पर काटा जा रहा है।
ऐसे सामने आया मामला
चर्चा है कि कुछ अधिकारी ही इस गोलमाल का शिकार हुए हैं। कारोबारियों ने उनको भी चूना लगा दिया है। इसके अलावा विभाग के पास कुछ सूचनाएं भी पहुंची हैं। इसके बाद विभाग ने इस पर काम करना शुरू कर दिया है। बताया जा रहा है कि विभाग सोलन समेत धर्मपुर, परवाणू, कुनिहार, अर्की और अन्य क्षेत्रों में निजी तथा सरकारी एजेंसियों के माध्यम से सर्वे को अंजाम दे रहा है। इस संबंध में कई शिकायतें आने के बाद यह कवायद शुरू की गई है।
टीमें गठित, सर्वे शुरू : सहआयुक्त
जिला आबकारी एवं कराधान सह आयुक्त रवि सूद ने बताया कि इस संबंध में शिकायतें मिली हैं। इस पर कार्रवाई होगी। विभाग ने सर्वे के लिए टीमें गठित कर दी हैं। मामले सामने आए तो नियमानुसार कड़ी कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि बिल मांगना खरीदार का अधिकार है। उन्होंने अपील की है कि किसी भी सामान की खरीदारी का पक्का बिल लें। कारोबारी बिल देने में आनाकानी करता है तो उसकी सूचना विभाग को दें।