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नप के पास नहीं सेटबैक छोड़ने का रिकार्ड

Mon, 18 Apr 2016 10:34 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सोलन
ब्यूरो/अमर उजाला, सोलन Updated Mon, 18 Apr 2016 10:34 PM IST
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कंक्रीट के ढेर में तबदील हो रहे सोलन शहर के ढांचागत विकास में विभागों का ढीला रवैया बाधा बन रहा है। शहर में भवन मालिकों और बिल्डरों की मनमानी को रोकने के लिए सरकार ने सेटबैक नियमों को सख्ती से लागू करने के लिए निर्माण कार्यों से पहले सेटबैक की गिफ्ट डीड नप के नाम करने के आदेश जारी किए हैं। लेकिन इन तमाम प्रयासों पर विभागों की सुस्ती भारी पड़ रही है। आलम यह है कि सोलन शहर में सेटबैक छोड़ने का रिकार्ड न तो राजस्व विभाग के पास है न ही नगर परिषद के पास। ऐसे में सोलन शहर की सुंदरता निखारने के दावे खुद ही खोखले साबित हो जाते हैं।

  विकास की दौड़ में बेतरतीब भवनों के निर्माण से कंकरीट का जंगल बन चुके सोलन में सेटबैक के सभी नियम दरकिनार किए जा रहे हैं। इसे दुरुस्त करना नप, टीसीपी और जिला प्रशासन के लिए अब नामुमकिन सा लग रहा है। शहर  अधिकांश ऐसे निर्माणों से भरा पड़ा है। कंकरीट में बदल रहे शहर और टीसीपी के अधीन आने वाले आसपास के क्षेत्र में नप की लचर कार्यप्रणाली के चलते सेटबैक पर लगातार अतिक्रमण हो रहे हैं। इसके चलते सड़कों के किनारे पैदल चलने की जगह तक नहीं बची है। इसी तरह नगर परिषद को सीवरेज लाइन बिछाने में भी दिक्कतें पेश आ रही हैं। इसी तरह पार्किंग, पार्क, सराय भवन के आसपास की जमीन पर लगातार अतिक्रमण हो रहा है। लेकिन राजस्व रिकार्ड उपलब्ध न होने से इसे रोकना भी मुश्किल हो गया है।
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लचर प्रणाली के चलते अतिक्रमण
नगर निकाय अधिनियम के तहत भवन निर्माण के समय सड़क किनारे छोड़ी गई जमीन स्थानीय निकाय के नाम पर स्थानांतरित किए जाने का प्रावधान है। बावजूद इसके नगर परिषद अभी तक सेटबैक पर अपना कब्जा नहीं कर पाई है। भवन मालिकों ने इसका नाजायज फायदा उठाते हुए रास्तों में अतिक्रमण कर दिया। इससे सड़कों रास्तों की चौड़ाई कम होती जा रही है। नप की लाचारी के चलते शहर की मुख्य सड़कों पर जमकर अतिक्रमण किया जा रहा है। जाम और ट्रैफिक समस्या से लोगों को जूझना पड़र हा है।
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3 से 5 मीटर सेटबैक छोड़ना जरूरी
नियम के तहत नेशनल हाईवे पर पांच मीटर और स्टेट हाईवे पर तीन मीटर जमीन सेटबैक के रूप में छोड़ी जाती है। जमीन पर स्थानीय निकाय का अधिकार रहता है। सेटबैक जमीन पर नगर परिषद को सीवरेज लाइन, पेयजल पाइप लाइन फुटपाथ के निर्माण का अधिकार है।

गिफ्ट डीडी में यह होंगे फायदे
-छोटे रास्तों और सड़कों को चौड़ा करने में मदद मिलेगी
- एंबुलेंस फायर ब्रिगेड के वाहन की आवाजाही में आसानी होगी
- सीवरेज लाइन बिछाने में आ रही दिक्कतें भी दूर होंगी।
- अवैध रूप से हो रहे अतिक्रमण पर अंकुश लगेगा।
- नप लोनिवि को अतिक्रमणकारियों पर कार्रवाई करना आसान

यह लागू है नियम
ईओ बीआर नेगी ने कहा कि सरकार द्वारा जारी आदेशों के तहत भवन मालिकों को नक्शा पास करने से पहले सेटबैक की गिफ्ट डीड निकाय के नाम करनी होगी। इस प्रक्रिया के तहत भवन मालिकों ने सेटबैक की गिफ्ट डीड देना शुरू कर दिया है। इस व्यवस्था से अतिक्रमण पर अंकुश लगाना आसान होगा। नायब सदर कानूनगोह प्रदीप कुमार ने कहा कि राजस्व विभाग के पास जमीन के मालिकाना हक का रिकार्ड रहता है। इसमें सेटबैक का अलग से रिकार्ड नहीं होता। मालिकाना हक में ही सेटबैक शामिल रहता है।
 
बिना आक्युपेशन प्रमाणपत्र के बिक रहे फ्लैट
सोलन शहर में अधिकतर आपर्टमेंट मालिक बिना आक्यूपेशन प्रमाणपत्र के ही फ्लैटों को बेच रहे हैं। इसका दावा आरटीआई कार्यकर्ता प्रेम सिंह टंगनियां ने किया है। कहा कि आरटीआई द्वारा मिली जानकारी के अनुसार शहर में भवन मालिक नियमों को ताक पर रखकर अवैध निर्माण कर रहे हैं। इससे सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा कर सरकार को करोड़ों की चपत लगा रहे हैं।


यह है आक्यूपेशन प्रमाण पत्र
आक्यूपेशन प्रमाणपत्र टाऊन एंड कंट्री टीसीपी विभाग द्वारा जारी किया जाता है। इसके बाद भवन मालिक को जमीन का कब्जा मिलता है। इसी प्रमाणपत्र के जरिये नगर परिषद द्वारा बिजली औक पानी जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए एनओसी जारी की जाती है।

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