{"_id":"5790c0f44f1c1b2d33c4ba74","slug":"chek-dam-constructed","type":"story","status":"publish","title_hn":"नालागढ़ की जमीन को अब सालभर नम रखेगा चैक डैम का पानी ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नालागढ़ की जमीन को अब सालभर नम रखेगा चैक डैम का पानी
ब्यूरो, नालागढ़, सोलन
Updated Thu, 21 Jul 2016 09:45 PM IST
विज्ञापन
उपमंडल नालागढ़ में प्राकृतिक स्रोतों का जल स्तर बढ़ने के साथ सिंचाई के लिए भी अब पर्याप्त पानी मिलेगा।
- फोटो : demo pic
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उपमंडल नालागढ़ में प्राकृतिक स्रोतों का जल स्तर बढ़ने के साथ सिंचाई के लिए भी अब पर्याप्त पानी मिलेगा। इसके लिए उपमंडल में 10 चैक डैम बनाए जाएंगे। इसके लिए 5.4 करोड़ रुपये मंजूर हो चुके हैं। चैक डैम बनने से नालागढ़ उपमंडल की करीब एक दर्जन पंचायतों की सैैकड़ों आबादी को लाभ मिलेगा। यह चैक डैम नाबार्ड के तहत स्वीकृत हुए हैं।
विज्ञापन
विधायक प्राथमिकता के तहत इनका निर्माण होगा। गौरतलब है कि क्षेत्र के लोगों का मुखय व्यवसाय खेती है। खेतीबाड़ी से क्षेत्र के हजारों लोग जुड़े हैं। इसके अलावा नकदी फसलों का भी हर साल करोड़ों रुपये का कारोबार होता है। लिहाजा सिंचाई के लिए पर्र्याप्त पानी मिलने पर किसानों को इसका खूब फायदा होगा। साथ ही प्राकृतिक स्रोतों का जल स्तर बढ़ने से लोगों को पीने का पानी भी पर्याप्त मात्रा में मिलेगा।
विज्ञापन
क्षेत्र के लोग लंबे अरसे से चैक डैम की मांग कर रहे थे। लेकिन उनकी मांगें प्रस्तावों तक ही सीमित थी लेकिन अब दस चैक डैम की मंजूरी से क्षेत्र में काफी हद तक समस्याओं का निदान होगा। नालागढ़ के विधायक के एल ठाकुर ने दी है। शीघ्र ही इनके टेंडर आमंत्रित कर काम शुरू कर दिया जाएगा। सिंचाई के साथ पेयजल किल्लत भी दूर होगी और किसानों की आर्थिक में भी सुधार होगा। कहा कि इन डैमों से क्षेत्र के हजारों लोग लाभान्वित होंगे।
विज्ञापन
यहां बनेंगे डैम
क्षेत्र में दस बडे़ डैम बघेरी, कुंडलु, पल्ली, मियांपुर, कंगनवाल-मंगुवाल, चिकनी नदी पर सिलणु पुल के पास, गेहलु-सौरी, नगर, जोघों ओर आदुवाल में बनाए जाएंगे। इन डैमों के बनने से जहां क्षेत्र की सिंचाई व्यवस्था सुदृढ़ होगी वहीं क्षेत्र का जलस्तर भी बढे़गा। वर्तमान में लोगों को सिंचाई के लिए बारिश पर निर्भर रहना पड़ता है।