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Solan News: कृषि विज्ञान केंद्र में किसानों को बताए कीट नियंत्रण के आधुनिक तरीके
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कृषि विज्ञान केंद्र सोलन ने लगाया दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर
संवाद न्यूज एजेंसी
कंडाघाट (सोलन)। फसलों को कीट एवं रोगों से बचाने तथा सुरक्षित व टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कृषि विज्ञान केंद्र सोलन और केंद्रीय एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया। शिविर में सोलन जिले के लगभग 50 किसानों ने भाग लिया।
शिविर के दौरान विशेषज्ञों ने फसलों में लगने वाले प्रमुख कीटों और रोगों की पहचान, उनके जीवन चक्र तथा वैज्ञानिक रोकथाम के उपायों की जानकारी दी। केंद्रीय एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन केंद्र के डॉ. विवेक, पादप संरक्षण अधिकारी डॉ. आदर्श शर्मा व डॉ. आयुष लाल दास ने एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन की विभिन्न तकनीकों, जैविक नियंत्रण, यांत्रिक विधियों तथा कीटनाशकों के संतुलित व सुरक्षित उपयोग के बारे में बताया।
कृषि विज्ञान केंद्र कंडाघाट, डॉ. सीमा ठाकुर ने किसानों से वैज्ञानिक तकनीक अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि कीट एवं रोगों का सही समय पर प्रबंधन करने से लागत घटती है, गुणवत्ता सुधरती है और किसानों की आय में बढ़ोतरी होती है। उन्होंने पर्यावरण हितैषी उपायों और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर भी बल दिया। वहीं, डॉ. राजेश ठाकुर ने फसल सुरक्षा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए किसानों को आधुनिक तकनीकों को व्यावहारिक रूप से खेतों में उतारने के लिए प्रेरित किया।
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कार्यक्रम के दौरान सोलन जिले में टमाटर की उन्नत खेती पर आधारित एक विशेष सूचना पत्रक जारी किया गया। इसमें टमाटर की वैज्ञानिक खेती, बेहतर पैदावार और फसल प्रबंधन से जुड़े उपयोगी सुझाव शामिल किए गए हैं, ताकि किसान समस्याओं का समाधान कर उत्तम गुणवत्ता वाली फसल ले सकें। इस दौरान वैज्ञानिकों ने किसानों के सवालों और समस्याओं का समाधान भी किया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
कंडाघाट (सोलन)। फसलों को कीट एवं रोगों से बचाने तथा सुरक्षित व टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कृषि विज्ञान केंद्र सोलन और केंद्रीय एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया। शिविर में सोलन जिले के लगभग 50 किसानों ने भाग लिया।
शिविर के दौरान विशेषज्ञों ने फसलों में लगने वाले प्रमुख कीटों और रोगों की पहचान, उनके जीवन चक्र तथा वैज्ञानिक रोकथाम के उपायों की जानकारी दी। केंद्रीय एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन केंद्र के डॉ. विवेक, पादप संरक्षण अधिकारी डॉ. आदर्श शर्मा व डॉ. आयुष लाल दास ने एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन की विभिन्न तकनीकों, जैविक नियंत्रण, यांत्रिक विधियों तथा कीटनाशकों के संतुलित व सुरक्षित उपयोग के बारे में बताया।
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कृषि विज्ञान केंद्र कंडाघाट, डॉ. सीमा ठाकुर ने किसानों से वैज्ञानिक तकनीक अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि कीट एवं रोगों का सही समय पर प्रबंधन करने से लागत घटती है, गुणवत्ता सुधरती है और किसानों की आय में बढ़ोतरी होती है। उन्होंने पर्यावरण हितैषी उपायों और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर भी बल दिया। वहीं, डॉ. राजेश ठाकुर ने फसल सुरक्षा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए किसानों को आधुनिक तकनीकों को व्यावहारिक रूप से खेतों में उतारने के लिए प्रेरित किया।
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कार्यक्रम के दौरान सोलन जिले में टमाटर की उन्नत खेती पर आधारित एक विशेष सूचना पत्रक जारी किया गया। इसमें टमाटर की वैज्ञानिक खेती, बेहतर पैदावार और फसल प्रबंधन से जुड़े उपयोगी सुझाव शामिल किए गए हैं, ताकि किसान समस्याओं का समाधान कर उत्तम गुणवत्ता वाली फसल ले सकें। इस दौरान वैज्ञानिकों ने किसानों के सवालों और समस्याओं का समाधान भी किया।