सेना का आदेश, 500 बीघा जमीन को छोड़ें किसान
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डगशाई छावनी में आजादी से पहले अंग्रेजों से किसानों को दान या तोहफे में मिली उपजाऊ जमीन पर सैन्य प्रशासन कब्जा लेगा। पुश्तों से खेती कर रहे किसानों को सेना ने इन जमीनों का कब्जा छोड़ने को कहा है। सैन्य प्रशासन द्वारा जारी इन आदेशों में 11 अप्रैल तक कब्जा छोड़ने की हिदायत दी है। साथ ही कहा है कि अगर अमल नहीं किया तो जमीनों से जबरन कब्जा छुड़वाने की कार्रवाई की जाएगी। इन फरमानों से डगशाई के किसानों में हड़कंप मचा हुआ है। बताया जा रहा है कि करीब 500 बीघा में करीब 22 परिवारों के कब्जे में हैं। लेकिन अब उन्हें यह जमीनें लौटानी होंगी।
छावनी के उपाध्यक्ष चितंरजन स्याल और मनीष का कहना है कि ब्रिटिश सरकार ने लगभग 120 वर्ष पूर्व किसानों को भूमि किसान हित में दी थी। लेकिन डीईओ अंबाला से आए आदेशों के मुताबिक अब यह जमीनें वापस लौटानी होंगी। किसानों का कहना है कि अंग्रेजी हुकूमत ने उनके पूर्वजों को दान पर यह भूमि दी थी ताकि वह अपना और अपने परिवार का पेट पाल सकें तथा क्षेत्र को हरा भरा रख सकें। वह पुश्तों से इस जमीन को अपने पसीने से सींच रहे हैं, अब छावनी प्रशासन उन्हें यह तोहफा दे रहा है। इससे किसानों में भारी रोष है।
सांसद से लगाई राहत दिलाने की गुहार
छावनी परिषद डगशाई किसान सभा के प्रतिनिधिमंडल ने शिमला संसदीय निर्वाचन क्षेत्र के सांसद वीरेंद्र कश्यप से इस मसले पर मुलाकात की। प्रभावितों ने कहा कि किसानों को खेतिहर भूमि के ऊपर से अपना कब्जा 11 अप्रैल तक खाली करना होगा। कब्जा खाली न होने की स्थिति में पब्लिक परिमिसेज एक्ट 1971 के तहत बल के साथ भूमि का कब्जा खाली करवाया जाएगा। मामला केंद्र में उठाने की मांग की गई ताकि किसानों से उनकी जमीन न छीनी जाए। सुकन्या गर्ग, मनीष शर्मा, नंद प्रकाश शर्मा और किसानसभा के प्रधान हंसराज बंसल आदि मौजूद रहे।
हर संभव कोशिश होगी : वीरेंद्र
सांसद वीरेंद्र कश्यप ने कहा कि किसानों और प्रभावितों का प्रतिनिधिमंडल उनसे मिला है। मामला संबंधित केंद्रीय प्रशासन तक पहुंचाया जाएगा। नियमानुसार प्रयास किया जाएगा ताकि प्रभावितों को परेशानी का सामना न करना पड़ा। उन्होंने कहा कि संबंधित ज्ञापन को सैन्य मंत्रालय में सौंप दिया जाएगा।