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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Solan News ›   Approval of Himcare cards stuck due to server problem

Solan News: सर्वर समस्या से अटकी हिमकेयर कार्डों की मंजूरी

Tue, 09 Jun 2026 11:34 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Tue, 09 Jun 2026 11:34 PM IST
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एक सप्ताह में भी करीब 2000 आवेदन लंबित, मरीजों को निशुल्क उपचार का लाभ मिलने में देरी
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कार्ड बनाने से लेकर रिन्यू करवाने कर करना पड़ रहा इंतजार
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। प्रदेश में 1 जून से हिमकेयर कार्ड के नवीनीकरण और नए कार्ड बनाने की प्रक्रिया शुरू की गई है। हालांकि, कार्ड बनवाने और नवीनीकरण कराने के लिए आवेदकों को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। सर्वर में तकनीकी खराबी के चलते अभी तक कई लोगों के हिमकेयर कार्ड मंजूर नहीं हो पाए हैं। ऐसे में खासकर मरीजों को कार्ड की मंजूरी न मिलने के कारण निशुल्क उपचार की सुविधा का लाभ नहीं मिल पा रहा है। वहीं, ऑपरेशन करवाने के लिए नए कार्ड बनवाने वाले मरीजों को भी प्रतीक्षा करनी पड़ रही है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से कार्डों की मंजूरी का कार्य थर्ड पार्टी एजेंसी (टीपीए) को सौंपा है। टीपीए के सर्वर में आई तकनीकी समस्या के कारण कार्डों के अनुमोदन में देरी हो रही है। हिमकेयर कार्डों की मंजूरी में पहली बार लोगों को इतनी देरी का सामना करना पड़ रहा है। एक सप्ताह बीतने के बाद भी करीब 2000 लोगों के कार्ड मंजूर नहीं हो पाए हैं। वहीं, कई लोग अभी भी कार्ड के लिए आवेदन कर रहे हैं। ऐसे में प्रतीक्षा सूची में शामिल लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है। नए हिमकेयर कार्ड बनाने और पुराने कार्डों के नवीनीकरण के लिए विभाग ने पोर्टल को 30 जून तक खुला रखा है।
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प्रत्येक कार्ड का क्रमवार सत्यापन किया जा रहा है। सर्वर में कुछ तकनीकी समस्याएं थीं, जिन्हें अब दूर कर लिया गया है। यदि किसी मरीज को आपातकालीन स्थिति में कार्ड की मंजूरी की आवश्यकता है, तो अस्पतालों के माध्यम से उसका अनुमोदन किया जा रहा है।
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-जैरूल खान, स्टेट हेड, हिमकेयर ऑपरेशनल
हिमकेयर योजना में होंगे दो बड़े बदलाव
हिमाचल प्रदेश में हिमकेयर योजना में दो महत्वपूर्ण बदलाव किए जाने प्रस्तावित हैं। योजना को अब बीमा मॉडल पर संचालित किया जाएगा। इसके तहत बीमा कंपनियों को इसके संचालन की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। इसके अलावा, बीमा कवर की राशि को वर्तमान 5 लाख रुपये से बढ़ाकर 7 से 10 लाख रुपये तक किए जाने की योजना है। इससे मरीजों को उपचार के लिए अधिक वित्तीय सहायता मिल सकेगी।
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