फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Solan News ›   accident. eight dead

समय पर उपचार मिलता तो बच सकती थी कुछ की जान

Sat, 11 Jun 2016 10:46 PM IST
अमर उजाला साोलन
अमर उजाला साोलन Updated Sat, 11 Jun 2016 10:46 PM IST
विज्ञापन
चमाकड़ी में हुए सड़क हादसे के घायलों को अगर समय पर बेहतर उपचार मिलता तो कुछ लोगों की जान बच सकती थी। अर्की विस क्षेत्र में आपात स्थिति में स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल हैं। चिकित्सकों की कमी के कारण घायलों को ईएसआई अस्पताल दाड़लाघाट में भी पर्याप्त इलाज नहीं मिला। हादसे के वक्त महज आयुर्वेदिक चिकित्सक वहां मौजूद था। वहीं, अर्की अस्पताल में भी एक ही चिकित्सक होने के चलते बेहतर इलाज की उम्मीद कम थी। हालांकि बाद में आसपास से चिकित्सक बुला लिए गए, लेकिन तब तक काफी देर हो गई थी। ऐसे में आनन फानन में घायलों को सीधा 60 किलोमीटर दूर आईजीएमसी शिमला भेजना पड़ा और रास्ते में तीन घायलों ने जख्मों के ताव न सहते हुए दम तोड़ दिया, जबकि कई घायलों की हालत बिगड़ गई।
विज्ञापन

यहां स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार की दरकार
दाड़लाघाट से गुजरता एनएच पूरे लोअर हिमाचल को आपस में जोड़ता है। साथ ही सीमेंट उद्योगों के कारण छोटे और बड़े वाहनों का भारी रश है। ऐसे में दाड़लाघाट हादसों के लिए अत्यंत संवेदनशील हैं, लेकिन अफसोस यहां स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार की दरकार है। दाड़लाघाट का सबसे करीब उपमंडल मुख्यालय अर्की है। अर्की अस्पताल में भी चिकित्सकों की दरकार है। ऐसे में आपात काल में विकल्प बचता है, तो शिमला आईजीएमसी या सोलन। शिमला साठ तो सोलन 80 किमी दूर है।
विज्ञापन


एफआरयू अर्की किस काम काम
2 लाख की आबादी को स्वास्थ्य सुविधाएं देने वाले अर्की एफआरयू में स्वास्थ्य सेवाएं बस नाम की है। प्रदेश सरकार चाहे कांग्रेस की हो या बीजेपी की, अर्की में स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर करने में सभी नाकाम रहे हैं। लोगों में रोशन लाल, उर्मिला देवी, सुभाष चंद, चंदू राम, सुदर्शन सिंह, राम शरण, यशपाल, मोहेंद्र कुमार का कहना है अर्की में स्वास्थ्य सेवाएं बेहतरी के प्रयास होने चाहिए। आपातकालीन हादसों में बदतर स्वास्थ्य सेवाएं लोगों की जिंदगी पर भारी पड़ती हैं, जबकि डिलीवरी के समय प्रसूता को भारी दिक्कत होती हैं। केस सीधे आईजीएमसी रेफर किए जाते हैं। कई बार तो यह भी हुआ कि 108 के कर्मी रास्ते में डिलीवरी करवाने को मजबूर होते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


कहां गई मेरी बेटी, एक घंटे तक रेस्क्यू
हादसे के दौरान डेढ़ साल की बच्ची अचानक गायब हो गई। मां रोती चिल्लाती रही। रेस्क्यू टीम ने बच्ची को खोजना शुरू किया। पूरे नाले का चप्पा चप्पा छान मारा, लेकिन बच्ची नहीं मिली। जहां से बस गिरी थी वहीं, बच्ची बाहर आ गिरी और झाडियों में फंस गई। बच्ची की रोने की आवाज सुनकर ग्रामीणों से उसे बाहर निकाला। बच्ची की हालत गंभीर बनी हुई है। एसडीएम एलआर वर्मा ने कहा कि एक घंटे की मशक्कत के बाद बच्ची मिली है। वह झाड़ियों में फंसी थी।

कुछ बोले, ओवरटेक करते हादसा
कुछ प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बस का ड्राइवर एक ट्राले से ओवरटेक करते हुए संतुलन खो बैठा और यह दर्दनाक हादसा हो गया। इस बस में करीब 30-35 लोग सवार थे। उधर, प्रशासन की ओर से नायब तहसीलदार दाडला हेमचंद्र कश्यप ने  मौके पर फौरी राहत बांटी और डीएसपी दाड्लाघाट नरवीर राठौर ने अपने दल बल सहित घायलों को अस्पताल तक पहुंचाने में काफी मदद की। स्थानीय लोगों ने भी घायलों की मदद की ।


इस मोड़ पर हर साल हो रहा बड़ा हादसा
डुगनियार मौत का मोड बन चुका है। यहां काफी हादसे हो चुके हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक कुछ माह पहले एक ट्रक के गिरने से चालक की मौत हो गई थी, जबकि एक टैंपो ट्रैक्स के इसी मोड पर गिरने से आधा दर्जन से अधिक लोग घायल हुए थे। लोगों ने इस मोड को दुरुस्त करने की मांग की है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed