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बिना सुरक्षा उपकरणों के जान जोखिम में डाल डयूटी बजा रहे है तकनीकी कर्मचारी
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बिना सुरक्षा उपकरण जान जोखिम में डाल ड्यूटी करने को मजबूर विद्युत कर्मी
फॉल्ट ढूंढने के लिए नहीं मैगर, प्रबंधन नहीं दे रहा तकनीकी कर्मियों को बेल्ट, हेलमेट, रेनकोट और बूट
फ्यूज वायर तक नहीं दे रहा प्रबंधन, चार सालों में नालागढ़ डिवीजन में हो चुके हैं कई हादसे
संतोष कुमार
नालागढ़ (सोलन)। प्रदेश विद्युत बोर्ड में तैनात तकनीकी कर्मचारी बिना सुरक्षा उपकरणों के जान जोखिम में डालकर सेवाएं देने को मजबूर हैं। बोर्ड प्रबंधन से उन्हें जरूरी सुरक्षा उपकरण नहीं मिल रहे हैं। आलम यह है कि विद्युत तकनीकी कर्मचारी बिना सुरक्षा के दर्दनाक हादसों का शिकार हो रहे हैं। प्रदेश भर में 54 डिवीजनों में में एक नालागढ़ के तहत पांच सब डिवीजन, 15 सेक्शन और 33केवी के तीन सब स्टेशनों में 75 तकनीकी कर्मचारी काम कर रहे हैं। लेकिन बोर्ड प्रबंधन उन्हें जरूरी सुरक्षा किटों के बिना ही काम करवा रहा है। नालागढ़ में पिछले चार सालों में 40 से 42 तकनीकी कर्मचारियों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। इसमें जूनियर टीमेट से लेकर फोरमैन और स्पेशल फोरमैन शामिल है।
यह उपकरण दे रहा बोर्ड प्रबंधन
कागजों में तकनीकी कर्मचारियों को विद्युत बोर्ड प्रबंधन बेल्ट, हेलमेट, बूट, स्नोकिट, रेनकोट देता है। हकीकत यह है कि उन्हें फ्यूज लगाने के लिए वायर तक नहीं मिल रही। उधर, बोर्ड प्रबंधन दावा कर रहा है कि दो तीन साल बाद उपकरण दिए जाते हैं। जैसे जिसका नंबर आता है, उसे सामान मुहैया करवाया जाता है। ऐसे में तकनीकी कर्मचारियों को सुरक्षा कवच न मिलने के कारण उन्हें बिना उपकरणों के कार्य करना पड़ रहा है। हालांकि विद्युत बोर्ड प्रबंधन नियमित कर्मचारी की मौत पर तुरंत ही परिवार के एक सदस्य को अनुबंध पर नौकरी देते हुए आर्थिक सहायता मुहैया करवाता है। लेकिन अनुबंध पर लगे तकनीकी कर्मचारियों के परिवार से किसी को नौकरी नहीं मिलती है। सिर्फ उसके परिवार को मुआवजा राशि दी जाती है।
आठ हजार से अधिक पद चल रहे हैं रिक्त
हिमाचल प्रदेश विद्युत तकनीकी बोर्ड तकनीकी कर्मचारी संघ के प्रदेश अतिरिक्त महामंत्री देवेंद्र संधू ने बताया कि प्रदेश के 54 डिवीजनों में 17200 पद तकनीकी कर्मचारियों के स्वीकृत हैं। इनमें से 9000 के करीब पद भरे हुए हैं जबकि 8000 से अधिक पद रिक्त हैं। उन्होंने कहा कि तकनीकी कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति अधिक हो रही है जबकि नई भर्तियां नहीं हो रही हैं। उन्होंने कहा कि 15 तकनीकी कर्मचारियों की जगह 3 से 5 कर्मियों से काम चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस बारे में सरकार व विद्युत प्रबंधन बोर्ड को बताया है। 26 को शिमला में होने वाले धरने में इस मामले को प्रमुखता से उठाया जाएगा।
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प्रबंधन मुहैया करवाता है उपकरण : कालटा
विद्युत बोर्ड के प्रबंध निदेशक जेपी कालटा ने कहा कि सुरक्षा उपकरण प्रबंधन मुहैया करवाता है। दो तीन साल के बाद ये उपकरण ड्यू होते हैं। जैसे जिसका नंबर आता है, उन्हें उपकरण मुहैया करवा दिए जाते हैं।
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फॉल्ट ढूंढने के लिए नहीं मैगर, प्रबंधन नहीं दे रहा तकनीकी कर्मियों को बेल्ट, हेलमेट, रेनकोट और बूट
फ्यूज वायर तक नहीं दे रहा प्रबंधन, चार सालों में नालागढ़ डिवीजन में हो चुके हैं कई हादसे
संतोष कुमार
नालागढ़ (सोलन)। प्रदेश विद्युत बोर्ड में तैनात तकनीकी कर्मचारी बिना सुरक्षा उपकरणों के जान जोखिम में डालकर सेवाएं देने को मजबूर हैं। बोर्ड प्रबंधन से उन्हें जरूरी सुरक्षा उपकरण नहीं मिल रहे हैं। आलम यह है कि विद्युत तकनीकी कर्मचारी बिना सुरक्षा के दर्दनाक हादसों का शिकार हो रहे हैं। प्रदेश भर में 54 डिवीजनों में में एक नालागढ़ के तहत पांच सब डिवीजन, 15 सेक्शन और 33केवी के तीन सब स्टेशनों में 75 तकनीकी कर्मचारी काम कर रहे हैं। लेकिन बोर्ड प्रबंधन उन्हें जरूरी सुरक्षा किटों के बिना ही काम करवा रहा है। नालागढ़ में पिछले चार सालों में 40 से 42 तकनीकी कर्मचारियों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। इसमें जूनियर टीमेट से लेकर फोरमैन और स्पेशल फोरमैन शामिल है।
यह उपकरण दे रहा बोर्ड प्रबंधन
कागजों में तकनीकी कर्मचारियों को विद्युत बोर्ड प्रबंधन बेल्ट, हेलमेट, बूट, स्नोकिट, रेनकोट देता है। हकीकत यह है कि उन्हें फ्यूज लगाने के लिए वायर तक नहीं मिल रही। उधर, बोर्ड प्रबंधन दावा कर रहा है कि दो तीन साल बाद उपकरण दिए जाते हैं। जैसे जिसका नंबर आता है, उसे सामान मुहैया करवाया जाता है। ऐसे में तकनीकी कर्मचारियों को सुरक्षा कवच न मिलने के कारण उन्हें बिना उपकरणों के कार्य करना पड़ रहा है। हालांकि विद्युत बोर्ड प्रबंधन नियमित कर्मचारी की मौत पर तुरंत ही परिवार के एक सदस्य को अनुबंध पर नौकरी देते हुए आर्थिक सहायता मुहैया करवाता है। लेकिन अनुबंध पर लगे तकनीकी कर्मचारियों के परिवार से किसी को नौकरी नहीं मिलती है। सिर्फ उसके परिवार को मुआवजा राशि दी जाती है।
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आठ हजार से अधिक पद चल रहे हैं रिक्त
हिमाचल प्रदेश विद्युत तकनीकी बोर्ड तकनीकी कर्मचारी संघ के प्रदेश अतिरिक्त महामंत्री देवेंद्र संधू ने बताया कि प्रदेश के 54 डिवीजनों में 17200 पद तकनीकी कर्मचारियों के स्वीकृत हैं। इनमें से 9000 के करीब पद भरे हुए हैं जबकि 8000 से अधिक पद रिक्त हैं। उन्होंने कहा कि तकनीकी कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति अधिक हो रही है जबकि नई भर्तियां नहीं हो रही हैं। उन्होंने कहा कि 15 तकनीकी कर्मचारियों की जगह 3 से 5 कर्मियों से काम चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस बारे में सरकार व विद्युत प्रबंधन बोर्ड को बताया है। 26 को शिमला में होने वाले धरने में इस मामले को प्रमुखता से उठाया जाएगा।
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प्रबंधन मुहैया करवाता है उपकरण : कालटा
विद्युत बोर्ड के प्रबंध निदेशक जेपी कालटा ने कहा कि सुरक्षा उपकरण प्रबंधन मुहैया करवाता है। दो तीन साल के बाद ये उपकरण ड्यू होते हैं। जैसे जिसका नंबर आता है, उन्हें उपकरण मुहैया करवा दिए जाते हैं।