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सोलन अस्पताल में कूल्हे का पहला सफल ऑपरेशन
Updated Sat, 28 Oct 2017 10:51 PM IST
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कूल्हे के अापरेशन के बाद मरीज
- फोटो : अमर उजाला
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सोलन। क्षेत्रीय अस्पताल सोलन में कूल्हे बदलने का सफल ऑपरेशन किया गया है। यह ऑपरेशन सोलन अस्पताल में पहली बार किया गया। इससे पूर्व यहां से ऐसे मरीजों को शिमला या चंडीगढ़ रेफर किया जाता था। आर्थो विशेषज्ञ डॉ. शशिपाल ने इस ऑपरेशन को किया। भविष्य में सोलन के मरीजों को क्षेत्रीय अस्पताल में यह सुविधा मिल पाएगी। इस ऑपरेशन के दौरान मरीज बेहोश करने वाले डॉक्टर मनीष शर्मा ने अपनी निगरानी में रखा। डॉ. शशि पाल ने बताया कि सोलन अस्पताल में कूल्हे बदलने का यह पहला सफल ऑपरेशन है। भविष्य में नियमित रूप से इस तरह की सर्जरी को अंजाम दिया जाएगा। इस मौके पर चिकित्सा अधीक्षक डॉ. महेश गुप्ता ने बताया कि इस तरह के ऑपरेशन सोलन में शुरू होने से लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। गरीब और जरूरतमंद लोग कम खर्च में घर के समीप ऑपरेशन करवा पाएंगे।
उन्होंने बताया कि ऑर्थो शल्य कक्ष को आधुनिक बनाने का काम जल्द पूरा होगा। इसमें अत्याधुनिक उपकरण लगाए जाएंगे। अस्पताल प्रबंधन ने एक नई मशीन सी-आर्म खरीदी है। इससे हड्डी के ऑपरेशन के प्रतिक्षण हड्डी का एक्सरे लिया जा सकेगा। इस मशीन से रीढ़ की हड्डी के ऑपरेशन भी यहीं किए जा सकेंगे। किसी भी प्रकार के मरीज को दूसरे अस्पताल में रेफर नहीं किया जाएगा। उधर, ऑपरेशन के बाद मरीज की हालत में भी लगातार सुधार हो रहा है और ऑपरेशन के 48 घंटे बाद मरीज चलने-फिरने की हालत में आ गया है। गिरने की वजह से मरीज की कूल्हे की हड्डी टूट गई थी। सीता राम (70) काफी वक्त से कूल्हे की बीमारी से परेशान था। चलने फिरने में भी दिक्कत होती थी लेकिन अब आपरेशन होने के बाद वह कुछ आराम महसूस कर रहे हैं। चिकित्सकों के मुताबिक निजी अस्पतालों में इस ऑपरेशन का खर्चा एक लाख नार्मल आता है। वहीं सोलन अस्पताल में यह ऑपरेशन 25 हजार रुपये में हो गया।
यहां आते हैं ऑर्थो के अधिक मरीज
नेशनल हाइवे से सटे सोलन में अक्सर दुर्घटनाएं होती रहती हैं। इसमें अधिकतर हड्डियां टूटने के मामले रहते हैं। अब तक इस तरह के ऑपरेशन करवाने के लिए लोगों को बड़े अस्पतालों को रुख करना पड़ता था। इससे जहां पैसे के बर्बादी होती थी वहीं बाहर रहने में भी दिक्कतें झेलनी पड़ती थीं। लेकिन अब सोलन अस्पताल में यह सुविधा शुरू होने से मरीजों को इसका भारी फायदा होगा। यही नहीं इस ऑपरेशन के सफल होने से हड्डी रोगियों को भी यहां बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
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उन्होंने बताया कि ऑर्थो शल्य कक्ष को आधुनिक बनाने का काम जल्द पूरा होगा। इसमें अत्याधुनिक उपकरण लगाए जाएंगे। अस्पताल प्रबंधन ने एक नई मशीन सी-आर्म खरीदी है। इससे हड्डी के ऑपरेशन के प्रतिक्षण हड्डी का एक्सरे लिया जा सकेगा। इस मशीन से रीढ़ की हड्डी के ऑपरेशन भी यहीं किए जा सकेंगे। किसी भी प्रकार के मरीज को दूसरे अस्पताल में रेफर नहीं किया जाएगा। उधर, ऑपरेशन के बाद मरीज की हालत में भी लगातार सुधार हो रहा है और ऑपरेशन के 48 घंटे बाद मरीज चलने-फिरने की हालत में आ गया है। गिरने की वजह से मरीज की कूल्हे की हड्डी टूट गई थी। सीता राम (70) काफी वक्त से कूल्हे की बीमारी से परेशान था। चलने फिरने में भी दिक्कत होती थी लेकिन अब आपरेशन होने के बाद वह कुछ आराम महसूस कर रहे हैं। चिकित्सकों के मुताबिक निजी अस्पतालों में इस ऑपरेशन का खर्चा एक लाख नार्मल आता है। वहीं सोलन अस्पताल में यह ऑपरेशन 25 हजार रुपये में हो गया।
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यहां आते हैं ऑर्थो के अधिक मरीज
नेशनल हाइवे से सटे सोलन में अक्सर दुर्घटनाएं होती रहती हैं। इसमें अधिकतर हड्डियां टूटने के मामले रहते हैं। अब तक इस तरह के ऑपरेशन करवाने के लिए लोगों को बड़े अस्पतालों को रुख करना पड़ता था। इससे जहां पैसे के बर्बादी होती थी वहीं बाहर रहने में भी दिक्कतें झेलनी पड़ती थीं। लेकिन अब सोलन अस्पताल में यह सुविधा शुरू होने से मरीजों को इसका भारी फायदा होगा। यही नहीं इस ऑपरेशन के सफल होने से हड्डी रोगियों को भी यहां बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
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