फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Solan News ›   दो वर्षो के बाद भी सोलन में नहीं शुरू हुआ मातृत्व एवं शिशु केंद्र भवन का निर्माण

दो वर्षो के बाद भी सोलन में नहीं शुरू हुआ मातृत्व एवं शिशु केंद्र भवन का निर्माण

Mon, 18 Feb 2019 07:14 PM IST
Shimla	 Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Mon, 18 Feb 2019 07:14 PM IST
विज्ञापन
दो वर्ष बाद भी मातृत्व एवं शिशु केंद्र भवन का निर्माण लटका
विज्ञापन

सोलन में दो वर्षों से प्रस्तावित है दस करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले भवन का काम
एनएचएम टीम की ओर से चयनित जमीन का निरीक्षण करने के बाद शुरू होगा कार्य
अमर उजाला ब्यूरो
सोलन। क्षेत्रीय अस्पताल सोलन में 10 करोड़ से प्रस्तावित मातृत्व एवं शिशु केंद्र भवन का निर्माण की योजना अधर में है। केंद्र सरकार इसके लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत करीब दो करोड़ रुपये जारी किए हैं। इसके लिए क्षेत्रीय अस्पताल सोलन के साथ खाली पड़ी जमीन चिह्नित की गई है। योजना को केंद्र से मंजूर हुए करीब दो वर्ष का समय बीत चुका है लेकिन चयनित जमीन का अभी तक एनएचएम की टीम ने निरीक्षण नहीं किया। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की साइट सिलेक्शन कमेटी की मंजूरी के बाद ही मातृत्व एवं शिशु केंद्र भवन का निर्माण शुरू हो पाएगा। केंद्र सरकार की तरफ से भवन निर्माण के लिए दो करोड़ की किश्त भी जारी हो चुकी है। इंतजार एनएचएम की टेक्निकल कमेटी की मंजूरी का है। योजना के तहत गर्भवती महिलाओं व नवजात बच्चों को एक ही छत के नीचे आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाने के उदे्श्य से अस्पताल परिसर के समीप कर्मचारी आवासीय बिल्डिंग को तोड़कर मातृत्व एवं शिशु केंद्र का निर्माण किया जाना है।
रोजाना 200 महिलओं की लगती है ओपीडी
अस्पताल में रोज औसतन 200 गर्भवती महिलाएं स्वास्थ्य जांच करवाने पहुंचती हैं। अस्पताल में हर महीने औसतन 400 डिलीवरी होती हैं। इस दृष्टि से अस्पताल की गायनी ओपीडी व वार्ड में काफी भीड़ रहती है। नवजात बच्चों के उचार के लिए भी शिमला व सिरमौर के दूरदराज के क्षेत्रों के अभिभावक सोलन अस्पताल आना ही बेहतर समझते हैं। अस्पताल में रोज औसतन 300 बच्चे उपचार के लिए आते हैं। इसमें करीब सौ बच्चे एक साल से कम आयु के होते हैं। मातृत्व एवं शिशु वार्ड में एक से कम आयु के बच्चों के लिए अलग वार्ड बनेगा। भवन बनते ही अस्पताल का गायनी व चिल्ड्रन वार्ड एक ही छत के नीचे शिफ्ट होगा। मातृत्व एवं शिशु केंद्र में अस्पताल का लेबर रूम और नवजात बच्चों की स्पेशल केयर यूनिट भी शिफ्ट होगी।
विज्ञापन

योजना के संचालन के लिए मिलेगा अलग स्टाफ
मातृत्व एवं शिशु खंड के संचालन के लिए सरकार से अलग स्टाफ देगी। इसमें गायनी स्पेशलिस्ट के अलावा चाइल्ड स्पेशलिट, स्टाफ नर्स की सेवाएं शामिल हैं। मातृत्व एवं शिशु केंद्र में 50 बेड की सुविधा रहेगी। इसमें लेबर रूम, स्पेशल केयर यूनिट भी शिफ्ट की जाएगी। अस्पताल में इस समय गायनी व चिल्ड्रन वार्ड अलग-अलग ब्लॉक में हैं। बच्चों की स्पेशल केयर यूनिट भी गायनी वार्ड से काफी दूर है। यदि डिलीवरी के बाद गायनी वार्ड में एडमिड महिला के बच्चे को स्पेशल केयर की जरूरत पड़े तो बच्चे की फीडिंग के लिए काफी दूरी तय करनी पड़ती है। मातृत्व एवं शिशु खंड बनने से इस प्रकार की समस्या से निजात मिलेगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

टेक्निकल कमेटी की मंजूरी के बाद होगा कार्य शुरू
सीनियर मेडिकल सुपरिंटेंडेंट सोलन डॉ. महेश गुप्ता ने बताया कि अस्पताल में प्रस्तावित मातृत्व एवं शिशु केंद्र के निर्माण को केंद्र सरकार से दो करोड़ की राशि मिल चुकी है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की टेक्निकल कमेटी की मंजूरी के बाद चयनित जमीन पर भवन का निर्माण हो सकेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed