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मशरूम के उत्पादन में पैसा ही पैसा
Updated Sat, 30 Dec 2017 10:10 PM IST
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सोलन। खुंब अनुसंधान निदेशालय सोलन अब किसानों को मशरूम की नई तकनीकों से घरद्वार पर अवगत करवाएगा। यह जानकारी राष्ट्रीय खुंब दिवस और जय किसान जय विज्ञान सप्ताह के तहत आयोजित कार्यक्रमों में खुंब अनुसंधान निदेशालय सोलन के निदेशक डॉ. वीपी शर्मा ने दी। उन्होंने बताया कि मशरूम की अब सब्जी ही नहीं बल्कि आचार भी बनाया जा रहा है। इससे खुंब की डिमांड बढ़ी है। बेरोजगार मशरूम उत्पादन को अपने स्वरोजगार का जरिया बना सकते हैं। मशरूम का दो सौ ग्राम का पैक्ट 20 से 25 रुपये में बिक रहा है। खुंब का सब्जी और आचार के अलावा कई अन्य उत्पादों में भी इस्तेमाल होने लगा है। इससे बाजार में मशरूम की मांग पहले की अपेक्षा काफी बढ़ चुकी है।
इससे पहले उन्होंने कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने खुंब फसल उत्पादन भवन का भ्रमण भी किया। प्रतिभागियों को ढींगरी लगाने, खुंब का आचार बनाने और निदेशालय द्वारा तैयार खुंब के विभिन्न उत्पादों की जानकारी दी गई। राष्ट्रीय खुंब दिवस का विषय खुंब उत्पादन कचरे (अपशिष्ट) से समृद्धि था। उन्होंने धरोट गांव का भ्रमण किया तथा किसानों से बातचीत की। वहीं नौणी यूनिवर्सिटी में चल रहे प्रशिक्षण में भाग लेने वाले प्रतिभागियों ने भी निदेशालय का भ्रमण किया तथा खुंब उगाने की तकनीक बारे जानकारी हासिल की। मशरूम विहार कॉलोनी की गृहणियों को इस दौरान मशरूम को दैनिक आहार में शामिल करने और इससे बनने वाले उत्पादों की जानकारी दी। भोजनगर स्कूल के नौवीं कक्षा के छात्र भी कार्यक्रम में पहुंचे थे। इनका मार्गदर्शन डॉ. बीएल अत्री ने किया। समारोह में एकरिप केंद्र पासीघाट अरुणाचल प्रदेश के 20 बीएससी के छात्रों ने संस्थान का भ्रमण किया। इस मौके पर निदेशालय के अन्य वैज्ञानिक डॉ. बीएल अत्री, डॉ. श्वेत कमल, सुधीर कुमार अन्नेपु, डॉ. अनुपम बड और अन्य अधिकारी तथा कर्मचारी मौजूद रहे।
डॉ. वीपी शर्मा ने कहा कि यह सप्ताह दो पूर्व प्रधानमंत्रियों के जन्मदिन होने के कारण मनाया जाता है। इन्होंने किसानों और विज्ञान के उत्थान के लिए बहुत काम किया। यह निदेशालय खुंब से संबंधित नवीनतम तकनीकों को किसानों तक पहुंचाने का भरसक प्रयास कर रहा है। भविष्य में इस मौके पर कुछ प्रगतिशील खुंब उत्पादकों को सम्मानित भी करेगा।
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इससे पहले उन्होंने कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने खुंब फसल उत्पादन भवन का भ्रमण भी किया। प्रतिभागियों को ढींगरी लगाने, खुंब का आचार बनाने और निदेशालय द्वारा तैयार खुंब के विभिन्न उत्पादों की जानकारी दी गई। राष्ट्रीय खुंब दिवस का विषय खुंब उत्पादन कचरे (अपशिष्ट) से समृद्धि था। उन्होंने धरोट गांव का भ्रमण किया तथा किसानों से बातचीत की। वहीं नौणी यूनिवर्सिटी में चल रहे प्रशिक्षण में भाग लेने वाले प्रतिभागियों ने भी निदेशालय का भ्रमण किया तथा खुंब उगाने की तकनीक बारे जानकारी हासिल की। मशरूम विहार कॉलोनी की गृहणियों को इस दौरान मशरूम को दैनिक आहार में शामिल करने और इससे बनने वाले उत्पादों की जानकारी दी। भोजनगर स्कूल के नौवीं कक्षा के छात्र भी कार्यक्रम में पहुंचे थे। इनका मार्गदर्शन डॉ. बीएल अत्री ने किया। समारोह में एकरिप केंद्र पासीघाट अरुणाचल प्रदेश के 20 बीएससी के छात्रों ने संस्थान का भ्रमण किया। इस मौके पर निदेशालय के अन्य वैज्ञानिक डॉ. बीएल अत्री, डॉ. श्वेत कमल, सुधीर कुमार अन्नेपु, डॉ. अनुपम बड और अन्य अधिकारी तथा कर्मचारी मौजूद रहे।
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डॉ. वीपी शर्मा ने कहा कि यह सप्ताह दो पूर्व प्रधानमंत्रियों के जन्मदिन होने के कारण मनाया जाता है। इन्होंने किसानों और विज्ञान के उत्थान के लिए बहुत काम किया। यह निदेशालय खुंब से संबंधित नवीनतम तकनीकों को किसानों तक पहुंचाने का भरसक प्रयास कर रहा है। भविष्य में इस मौके पर कुछ प्रगतिशील खुंब उत्पादकों को सम्मानित भी करेगा।
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