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वीरभद्र सिंह के रणक्षेत्र में भाजपा पस्त, 4-2 से गंवाया अध्यक्ष पद
Updated Fri, 05 Oct 2018 06:12 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
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अर्की (सोलन)। पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के विधानसभा क्षेत्र अर्की में कांग्रेस का सियासी दुर्ग सलामत रहा। सभी अटकलों पर विराम लगाते हुए कांग्रेस नगर पंचायत में दोबारा काबिज हो गई है। अध्यक्ष पद को लेकर हुए चुनाव में कांग्रेस ने भाजपा को 4-2 से पराजित कर दिया। भाजपा के पास तीन पार्षद थे और नेता कांग्रेसी खेमे के पार्षदों को मिलाकर अर्की नगर पंचायत की सत्ता हासिल करने का दम भर रहे थे। लेकिन उनके मंसूबों पर पानी फिर गया।
एक पार्षद का वोट का रद्द हो गया जबकि पूरे दिन दोनों राजनीतिक दलों के नेता क्रॉस वोटिंग का हवाला देकर पार्षदों को कोसते नजर आए। फिलहाल, नगर पंचायत अर्की के अध्यक्ष पद को लेकर जारी सियासत का अंत हो गया है। एसडीएम और सचिव नगर पंचायत अर्की छवि नांटा ने बताया कि अध्यक्ष पद के लिए चुनाव में कुल सात पार्षदों में से अध्यक्ष पद के लिए वीना ठाकुर को चार मत पड़े। वहीं दूसरी उम्मीदवार आशा परिहार को दो मत पड़े। सात में से एक मत रद्द हुआ।
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गौरतलब है कि ढाई वर्ष पूर्व नगर पंचायत का चुनाव हुआ था। इसमें सावित्री गुप्ता तथा वीना ठाकुर के बीच ढाई-ढाई साल का करार हुआ था। करार के अनुसार, पहले ढाई वर्ष में सावित्री गुप्ता अध्यक्ष तथा अगले ढाई वर्ष वीना ठाकुर पदभार संभालेंगी। कुछ दिन पूर्व अध्यक्ष सावित्री गुप्ता के खिलाफ चार पार्षदों ने अविश्वास प्रस्ताव प्रस्तुत किया जिस पर उन्हें अपना पद छोड़ना पड़ा था। इसके बाद नए अध्यक्ष के चुनाव के लिए एसडीएम अर्की ने तीन अक्तूबर की तारीख तय की लेकिन कोरम पूरा न होने से चुनाव नहीं हो पाए थे। एसडीएम छवि नांटा ने दूसरे चुनाव के लिए पांच अक्तूबर की तिथि तय की थी। इसमें कांग्रेस समर्थित वीना ठाकुर को चार-दो से विजयी घोषित किया गया।
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किस पार्षद ने खराब किया वोट, दिन भर रही चर्चा
अर्की में कुल सात वार्ड हैं जिनमें से चार कांग्रेस के जबकि तीन सदस्य भाजपा के हैं। अध्यक्ष पद पर कांग्रेस की ताजपोशी के बाद क्रॉस वोटिंग को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। साथ ही एक वोट रद्द होना भी दोनों ही राजनीतिक दलों के गले से नीचे नहीं उतर रहा। दोनों दलों के लोग सात में से उस सदस्य की खोजबीन में लग गए हैं जिसका वोट रद्द हुआ है। दरअसल, भाजपा तीन सदस्य पक्के मानकर चल रही थी और जोड़तोड़ से अध्यक्ष पद पर काबिज होने का मंसूबा देख रही था। यही वजह थी सुबह से ही भाजपा के कई दिग्गज नेता नगर पंचायत कार्यालय पहुंचे थे लेकिन यहां पासा उलटा पड़ गया। भाजपा को सिर्फ दो ही वोट मिले और एक वोट रद्द हो गया। ऐसे में वोट जानबूझ कर खराब करने को लेकर भी चर्चा हो रही है। दोनों ही राजनीतिक दलों को सात में से उस पार्षद को ढूंढना आसान नहीं है जिसने अपना वोट जानबूझकर खराब कर दिया।