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गरीबों के आशियाने को नहीं मिली फंडिंग, 96 परिवारों का बढ़ा इंतजार
Updated Sun, 11 Nov 2018 05:24 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
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सोलन। गरीब परिवारों को आवास मुहैया करवाने का काम पिछले तीन सालों में पूरा नहीं हो पाया है। शहर के गरीब और बेघर परिवारों को छत मिलने में अभी और समय लग सकता है। यह कार्य शुरू होने से करीब छह माह में ही पूरा होना था लेकिन समय-समय पर फंडिंग न होने से यह कार्य कछुआ चाल से चल रहा है। इससे गरीबों को उनका आशियाना समय पर नहीं मिल रहा है।
केंद्र सरकार की बहुउद्देशीय इंटिग्रेटेड हाउसिंग एंड स्लम डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत जरूरतमंद परिवारों के लिए 96 मकानों का निर्माण किया जा रहा है। यह निर्माण सोलन के चंबाघाट बाईपास मार्ग पर एचआरटीसी वर्कशाप के समीप हो रहा है। समय-समय पर फंडिंग न होने से कार्य को करने में काफी परेशानी हो रही है। फंड की कमी से यह कार्य रुक-रुक कर हो रहा है। योजना का मुख्य उद्देश्य शहर में रह रहे गरीबों को छत दिलवाना है। इसके लिए केंद्र सरकार ने नगर परिषद को करीब 11 करोड़ की राशि मंजूर की है। इसके तहत अभी तक नगर परिषद को केंद्र और प्रदेश से साढ़े छह करोड़ की राशि ही जारी हुई है। अब आगे के कार्य को करने के लिए फिर से फंडिंग की आवश्यकता है वरना इस कार्य को पूरा करने में और देरी हो सकती है।
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गरीब परिवारों से होनी है डेढ़ लाख की वसूली
नगर परिषद शहरी गरीब एवं बेघर लोगों को अलॉटमेंट के लिए प्रार्थना पत्र आमंत्रित किया था। इसके बाद नगर परिषद को लोगों के आवेदन मिले थे और इनसे एक भवन का डेढ़ लाख रुपये लेना है। इसके तहत नगर परिषद ने आवेदन के दौरन उक्त आवेदन कर्ताओं से 2 से 5 हजार तक एडवांस भी लिया था। इसके बाद कुछ लोगों ने इसकी किश्तें देना भी शुरू कर दिया है। योजना का लाभ मात्र ऐसे लोगों को दिया जा रहा है जो शहर में रहते हैं और गरीब व बेघर हैं। इनकी सालाना आय 30 हजार रुपये से कम है। साथ ही जिन निवेदक को सोलन में रहते हुए 25 साल या इससे ज्यादा वर्ष हो चुका हों।
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समय पर फंडिंग ने होने से हो रही कार्य में देरी
नगर परिषद अध्यक्ष देवेंद्र ठाकुर ने बताया कि समय से फंडिंग न होने से शहर के जरूरतमंद लोगों को भवन मिलने में देरी हो रही है। उन्होंने बताया कि बाईपास मार्ग पर वर्कशाप के समीप करीब 11 करोड़ की लागत से 96 भवनों का निर्माण किया जा रहा है। यदि समय पर फंडिंग हो जाती तो यह कार्य करीब छह माह में ही पूरा हो जाना था। आगामी समय में भी जितनी जल्दी इसकी फंडिंग होती है, जल्दी भवन निर्माण भी हो जाएगा।