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12 से 15 सौ करोड़ हो गया बीबीएन के उद्योगों को नुकसान

Wed, 25 Jul 2018 05:48 PM IST
Updated Wed, 25 Jul 2018 05:48 PM IST
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बीबीएन के उद्योगों को अब तक 1500 करोड़ का नुकसान
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ट्रकों की हड़ताल से प्रदेश के 40 हजार लघु उद्योगों को हो चुका 500 करोड़ का नुकसान
बीबीएन के 20 फीसदी उद्योगों में उत्पादन ठप
अमर उजाला ब्यूरो
नालागढ़ (सोलन)। देशव्यापी चक्काजाम और ट्रकों की अनिश्चतकालीन हड़ताल से विश्व के फार्मा हब बीबीएन में छह दिनों में 1200 से 1500 करोड़ रुपये का नुकसान हो गया है। मौजूदा समय में कच्चे माल की कमी से 20 फीसदी तक उत्पादन ठप होने का अनुमान है। वहीं प्रदेश के 40 हजार लघु उद्योगों को 500 करोड़ की चपत लग चुकी है। बड़े उद्योगों पर निर्भर होने के चलते 50 फीसदी लघु उद्योगों पर इसकी अधिक मार पड़ी है। फिलहाल ट्रकों की हड़ताल को लेकर सरकार की ओर से कोई वार्ता न बुलाए जाने से ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के आह्वान पर देश भर के ट्रक हड़ताल पर हैं। प्रदेश में ऑल हिमाचल ट्रक फेडरेशन के ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के आह्वान पर करीब 80 हजार ट्रक ट्राले खड़े हैं। इसमें उत्तर भारत की बड़ी यूनियनों में शुमार दी ट्रक ऑपरेटर यूनियन नालागढ़ के 10 हजार वाहन शामिल हैं।
बीबीएन में दो प्रकार कार्य करते हैं उद्योग
एशिया में 35 फीसदी दवा निर्माण का रिकॉर्ड अपने नाम करने वाले प्रदेश के इस हब में उद्योग प्रकार के उद्योग हैं। एक मार्केट वाले और दूसरे उद्योग इंडस्ट्री से इंडस्ट्री को सप्लाई करते हैं। दोनों तरफ से उद्योगों को हड़ताल की मार पड़ी है। उद्योगों में कच्चे माल की कमी और इनवेंटरी न होने से 20 फीसदी उद्योगों का उत्पादन ठप होकर रह गया है जबकि हड़ताल आगे चलती रही तो अन्य उद्योगों का प्रोडक्शन बंद हो जाएगा। उद्योगों के पास तैयार माल की सप्लाई न होने से तैयार माल रखने में भी परेशानी हो रही है। कच्चे माल की कमी से प्रदेश के लघु उद्योग पर भी मार पड़ रही है। 50 फीसदी उद्योग बड़े उद्योगों पर निर्भर हैं, इससे लघु उद्योगों को भी नुकसान हो रहा है।
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आर्थिक संकट से जूझने को मजबूर उद्योग
उद्योगों को माल की आपूर्ति न होने से बाजार में असर पड़ना शुरू हो गया है। बाजार में सामान न पहुंचने से वस्तुओं की कमी हो जाएगी। उद्योगों का माल सप्लाई न होने से उद्योगों को आर्थिक संकट से जूझना पड़ रहा है और बिजली बिलों सहित जीएसटी की अदायगी के लिए धन की कमी खलने लगी है। तैयार माल की आपूर्ति न होने से पैसों की तंगी अब बिलों के भुगतान में परेशानी कर रही है।
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सरकार से किया है पत्राचार, निकाले कोई हल
उद्योग जगत को हो रही परेशानियां को लेकर बीबीएनआईए ने ट्रक यूनियन के पदाधिकारियों से वार्ता कर हड़ताल का हल निकालने की बात कही। वहीं केंद्रीय भूतल एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी, मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, उद्योग मंत्री बिक्रम सिंह को पत्राचार कर समस्या का हल करने की मांग की है। बीबीएनआईए के अध्यक्ष शैलेष अग्रवाल ने कहा कि 20 से 30 फीसदी उद्योग बंद होने की कगार पर हैं। अगर हड़ताल चलती रही तो अन्य उद्योग भी बंद हो जाएंगे। लघु उद्योग भारती के प्रदेशाध्यक्ष बिक्रम बिंदल ने कहा कि प्रदेश के 50 फीसदी लघु उद्योगों पर हड़ताल का असर हो चुका है।
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