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बद्दी के दवा उद्योगों को देश में मुहैया करवाएं कच्चा माल
Updated Fri, 08 Dec 2017 09:45 PM IST
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बद्दी (सोलन)। फार्मा उद्योगों के बद्दी में आयोजित सम्मेलन में दवाओं की गुणवत्ता को और बढ़िया करने की वकालत की गई। साथ ही कच्चा माल देश में मुहैया करवाने का सरकार से आग्रह किया। अभी तक दवाओं के लिए कच्चा माल चीन से मंगवाया जाता है। इससे दवाओं की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। दवा उद्यमियों ने इस सम्मेलन में शिरकत की। दवा विभाग के उपसचिव एमके भारद्वाज ने कार्यक्रम में बतौर मुख्यातिथि शिरकत की। सम्मेलन में उत्पादों की गुणवत्ता कैसे अपग्रेड की जाए पर मंथन किया गया। सम्मेलन का आयोजन हिमाचल दवा निर्माता संघ ने भारतीय दवा निर्माता संघ के सहयोग से किया था। इसकी अध्यक्षता संघ के प्रदेश प्रधान एमबी गोयल ने की।
कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. राजेश गुप्ता और मुनीश ठाकुर ने कहा कि वैश्विक परिदृश्य तथा भारतीय संदर्भ में फार्मा उद्योगों को काम करना मुश्किल होता जा रहा है। वल्क ड्रग पार्क न होने से प्रदेश के दवा उद्योगों को कच्चे माल के लिए हमेशा से चीन पर निर्भर रहना पड़ता है। इसी चक्कर में कच्चे माल की कीमत कई गुण बढ़ गई है। इस वजह से दवाएं भी महंगी हो रही हैं।
उन्होंने कहा कि भारत में आज भी प्रति व्यक्ति 67 पैसे और यूएसए में चार डालर खर्चा आता है। उप सचिव एमके भारद्वाज ने कहा कि केंद्र सरकार दवा उत्पादकों को हर प्रकार की सुविधा दे रही है। प्रदेशाध्यक्ष एमबी गोयल ने कहा कि हिमाचल में सर्वाधिक गुणवत्ता पूर्वक दवाईयों का निर्माण होता है और यहां से पूरे भारत में 50 फीसदी से ज्यादा दवाईयों की आपूर्ति होती है। कई बार ऐसा प्रचारित किया जाता है कि हिमाचल में बनने वाली दवाईयां घटिया और सब स्टैंडर्ड हैं, जबकि यह हकीकत से कोसों दूर है। हिमाचल में मौसम तेजी से बदलता रहता है और सिर्फ एमएसएमई उद्योग ही नहीं बड़ी बड़ी कंपनियों के सैंपल कई बार सब स्डैंडर्ड हो जाते हैं। इसका अर्थ यह नहीं होता कि यह दवाई जहर है या इसकी क्वालिटी घटिया है। इस अवसर पर हिमाचल ड्रग मैनुफेक्चर एसोसिएशन के प्रांत अध्यक्ष एमबी गोयल, इदमा के राष्ट्रीय कार्यकारिणी डॉ. राजेश गुप्ता, महामंत्री मुनीश ठाकुर, लघु उद्योग भारती के फार्मा विंग के चीफ सतीश सिंगला, राजेश बंसल, अपराजिता, राहुल बंसल, राकेश अरोडा, सूबेदार सिंह सिंह सहित दवा उद्यमी मौजूद रहे।
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हिमाचल में बनीं दवाएं उच्च किस्म की : विनोद
भारतीय दवा निर्माता संघ के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य विनोद ने कहा कि इस साल भारत में दवा कंपनियों के रुटीन में 45000 सैंपल दवा विभाग ने लिए जिसमें से मात्र तीन फीसदी ही सही नहीं पाए गए। हिमाचल पूरे विश्व में उच्च किस्म की दवाईयां बनाने के लिए विख्यात है।
ड्रग प्राइस कंट्रोल एक्ट सरल करें : सिंगला
लघु उद्योग भारती फार्मा विंग के प्रांतीय चेयरमैन सतीश सिंगला ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि ड्रग प्राइस कंट्रोल एक्ट को सुनिश्चित बनाया जाए। नियमों और कानूनों को ज्यादा सरल किया जाए क्योंकि फार्मा उद्योगों को 45 विभागों से एनओसी लेना पड़ता है। इसमें उद्योगपतियों की काफी समय बर्बाद हो जाती है।
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कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. राजेश गुप्ता और मुनीश ठाकुर ने कहा कि वैश्विक परिदृश्य तथा भारतीय संदर्भ में फार्मा उद्योगों को काम करना मुश्किल होता जा रहा है। वल्क ड्रग पार्क न होने से प्रदेश के दवा उद्योगों को कच्चे माल के लिए हमेशा से चीन पर निर्भर रहना पड़ता है। इसी चक्कर में कच्चे माल की कीमत कई गुण बढ़ गई है। इस वजह से दवाएं भी महंगी हो रही हैं।
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उन्होंने कहा कि भारत में आज भी प्रति व्यक्ति 67 पैसे और यूएसए में चार डालर खर्चा आता है। उप सचिव एमके भारद्वाज ने कहा कि केंद्र सरकार दवा उत्पादकों को हर प्रकार की सुविधा दे रही है। प्रदेशाध्यक्ष एमबी गोयल ने कहा कि हिमाचल में सर्वाधिक गुणवत्ता पूर्वक दवाईयों का निर्माण होता है और यहां से पूरे भारत में 50 फीसदी से ज्यादा दवाईयों की आपूर्ति होती है। कई बार ऐसा प्रचारित किया जाता है कि हिमाचल में बनने वाली दवाईयां घटिया और सब स्टैंडर्ड हैं, जबकि यह हकीकत से कोसों दूर है। हिमाचल में मौसम तेजी से बदलता रहता है और सिर्फ एमएसएमई उद्योग ही नहीं बड़ी बड़ी कंपनियों के सैंपल कई बार सब स्डैंडर्ड हो जाते हैं। इसका अर्थ यह नहीं होता कि यह दवाई जहर है या इसकी क्वालिटी घटिया है। इस अवसर पर हिमाचल ड्रग मैनुफेक्चर एसोसिएशन के प्रांत अध्यक्ष एमबी गोयल, इदमा के राष्ट्रीय कार्यकारिणी डॉ. राजेश गुप्ता, महामंत्री मुनीश ठाकुर, लघु उद्योग भारती के फार्मा विंग के चीफ सतीश सिंगला, राजेश बंसल, अपराजिता, राहुल बंसल, राकेश अरोडा, सूबेदार सिंह सिंह सहित दवा उद्यमी मौजूद रहे।
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हिमाचल में बनीं दवाएं उच्च किस्म की : विनोद
भारतीय दवा निर्माता संघ के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य विनोद ने कहा कि इस साल भारत में दवा कंपनियों के रुटीन में 45000 सैंपल दवा विभाग ने लिए जिसमें से मात्र तीन फीसदी ही सही नहीं पाए गए। हिमाचल पूरे विश्व में उच्च किस्म की दवाईयां बनाने के लिए विख्यात है।
ड्रग प्राइस कंट्रोल एक्ट सरल करें : सिंगला
लघु उद्योग भारती फार्मा विंग के प्रांतीय चेयरमैन सतीश सिंगला ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि ड्रग प्राइस कंट्रोल एक्ट को सुनिश्चित बनाया जाए। नियमों और कानूनों को ज्यादा सरल किया जाए क्योंकि फार्मा उद्योगों को 45 विभागों से एनओसी लेना पड़ता है। इसमें उद्योगपतियों की काफी समय बर्बाद हो जाती है।