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राजमार्ग निर्माण कर रही कंपनी को कमियां सुधारने के दिए निर्देश
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मीनस में एनएच-707 का निरीक्षण करती वर्ल्ड बैंक की टीम।
- फोटो : NAHAN
रोनहाट (सिरमौर)। वर्ल्ड बैंक की ओर से 1356 करोड़ रुपये से वित्त पोषित भारत सरकार के सड़क, परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के ग्रीन नेशनल हाइवे कॉरिडोर प्रोजेक्ट के तहत निर्माणाधीन राष्ट्रीय राजमार्ग- 707 का वर्ल्ड बैंक की टीम ने निरीक्षण किया।
सात सदस्यीय टीम में सड़क सुरक्षा, पर्यावरण, पारिस्थितिकी, स्थिरता, फाइनेंस, सामाजिक जिम्मेदारी और गुणवत्ता के विशेषज्ञों ने निरीक्षण के दौरान सभी पहलुओं की जांच की और निर्माण कार्य कर रही निजी कंपनी को समय रहते कमियों में सुधार करने के निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान टीम ने सड़कों में जगह-जगह चेतावनी संबंधी संकेत बोर्ड और सड़क सुरक्षा के मद्देनजर लगने वाले रेडियम युक्त रंग-बिरंगे रिफ्लेक्टर न होने पर हैरानी जताई। उन्होंने बताया कि सड़क से गुजरने वाले वाहनों को सुरक्षा संबंधित हिदायतों के लिए दूर से दिखाई देने वाले चेतावनी संकेत बोर्ड और सड़क के किनारे में रेडियम युक्त रिफ्लेक्टर लगाना बेहद जरूरी है ताकि निर्माण कार्य के दौरान आम जनता को असुविधा और किसी अप्रिय हादसे से बचाया जा सके।
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टीम ने एनएच-707 की कटिंग के दौरान निकलने वाले मलबे को डंप करने के लिए बनाई गई अधिकांश साइटों के नियमानुसार न होने और बेतरतीब तरीके से हर कहीं डंपिंग किए जा रहे मलबे को लेकर चारों निजी कंपनियों को फटकार भी लगाई। उन्होंने बताया कि गलत तरीके से बरसाती नालों में फेंके जा रहे मलबे से पानी की निकासी प्रभावित हो सकती है जिस कारण भूस्खलन और कोई बड़ा हादसा पेश आ सकता है। उन्होंने जिम्मेवारी के साथ मलबे को चिह्नित डंपिंग साइटों पर ही डंप करने के सख्त निर्देश दिए।
वर्ल्ड बैंक के पर्यावरण विशेषज्ञ ने एनएच-707 का निर्माण कार्य कर रही निजी कंपनियों के प्रदूषण से संबंधित सभी दस्तावेजों का निरीक्षण किया और दो बड़ी नदियों के बिल्कुल बीच में हिमाचल सरकार द्वारा स्टोन क्रॅशर लगाने को दी अनुमति को लेकर हैरानी जताई। टीम के सदस्य और विषय विशेषज्ञ संजीव शर्मा ने बताया कि निरीक्षण से संबंधित सभी जानकारियां बेहद गोपनीय रखी जाती हैं, जिन्हें नियमानुसार मीडिया से साझा नहीं किया जा सकता। देश के सात राज्यों में चल रही वर्ल्ड बैंक द्वारा वित्त पोषित विभिन्न विकासात्मक परियोजनाओं के निरीक्षण की रिपोर्ट टीम के सभी सदस्यों द्वारा तय समय सीमा के अंदर वर्ल्ड बैंक को सौंपी जाएगी।
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सात सदस्यीय टीम में सड़क सुरक्षा, पर्यावरण, पारिस्थितिकी, स्थिरता, फाइनेंस, सामाजिक जिम्मेदारी और गुणवत्ता के विशेषज्ञों ने निरीक्षण के दौरान सभी पहलुओं की जांच की और निर्माण कार्य कर रही निजी कंपनी को समय रहते कमियों में सुधार करने के निर्देश दिए।
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निरीक्षण के दौरान टीम ने सड़कों में जगह-जगह चेतावनी संबंधी संकेत बोर्ड और सड़क सुरक्षा के मद्देनजर लगने वाले रेडियम युक्त रंग-बिरंगे रिफ्लेक्टर न होने पर हैरानी जताई। उन्होंने बताया कि सड़क से गुजरने वाले वाहनों को सुरक्षा संबंधित हिदायतों के लिए दूर से दिखाई देने वाले चेतावनी संकेत बोर्ड और सड़क के किनारे में रेडियम युक्त रिफ्लेक्टर लगाना बेहद जरूरी है ताकि निर्माण कार्य के दौरान आम जनता को असुविधा और किसी अप्रिय हादसे से बचाया जा सके।
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टीम ने एनएच-707 की कटिंग के दौरान निकलने वाले मलबे को डंप करने के लिए बनाई गई अधिकांश साइटों के नियमानुसार न होने और बेतरतीब तरीके से हर कहीं डंपिंग किए जा रहे मलबे को लेकर चारों निजी कंपनियों को फटकार भी लगाई। उन्होंने बताया कि गलत तरीके से बरसाती नालों में फेंके जा रहे मलबे से पानी की निकासी प्रभावित हो सकती है जिस कारण भूस्खलन और कोई बड़ा हादसा पेश आ सकता है। उन्होंने जिम्मेवारी के साथ मलबे को चिह्नित डंपिंग साइटों पर ही डंप करने के सख्त निर्देश दिए।
वर्ल्ड बैंक के पर्यावरण विशेषज्ञ ने एनएच-707 का निर्माण कार्य कर रही निजी कंपनियों के प्रदूषण से संबंधित सभी दस्तावेजों का निरीक्षण किया और दो बड़ी नदियों के बिल्कुल बीच में हिमाचल सरकार द्वारा स्टोन क्रॅशर लगाने को दी अनुमति को लेकर हैरानी जताई। टीम के सदस्य और विषय विशेषज्ञ संजीव शर्मा ने बताया कि निरीक्षण से संबंधित सभी जानकारियां बेहद गोपनीय रखी जाती हैं, जिन्हें नियमानुसार मीडिया से साझा नहीं किया जा सकता। देश के सात राज्यों में चल रही वर्ल्ड बैंक द्वारा वित्त पोषित विभिन्न विकासात्मक परियोजनाओं के निरीक्षण की रिपोर्ट टीम के सभी सदस्यों द्वारा तय समय सीमा के अंदर वर्ल्ड बैंक को सौंपी जाएगी।