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Sirmour News: भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी का दिया प्रशिक्षण
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भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी का दिया प्रशिक्षण
सुदूर संवेदन और भौगोलिक सूचना तंत्र पर चार प्रशिक्षण व कार्यशाला आयोजित
भारतीय सुुदूर संवेदन संस्थान और संगड़ाह कॉलेज के भूगोल विभाग ने किया आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन(सिरमौर)। भारतीय सुदूर संवेदन संस्थान (इसरो) और राजकीय महाविद्यालय संगड़ाह के भूगोल विभाग ने मार्च से मई 2024 तक सुदूर संवेदन और भौगोलिक सूचना तंत्र पर चार प्रशिक्षण और एक कार्यशाला का आयोजन किया। इसमें 202 विद्यार्थी, प्राध्यापक और अभ्यार्थियों ने भाग लिया। हाल ही में, राजकीय महाविद्यालय संगड़ाह ने भारतीय सुदूर संवेदन संस्थान के सहयोग से 27-31 मई के बीच शहरी पर्यावरण के मॉडलिंग के लिए भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी का प्रशिक्षण दिया जिसमें 21 छात्रों ने भाग लिया।
भूस्थलीय प्रौद्योगिकी नगरीय विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इससे नगरीय परिदृश्यों का विश्लेषण, विकास के पैटर्न का पूर्वानुमान और इंफ्रास्ट्रक्चर की आवश्यकताओं का मूल्यांकन संभव होता है। इससे नगरीय विकास के लिए सिमुलेशन को सुविधाजनक बनाया जा सकता है जो नगरीय नियोजन और प्रतिरोधी रणनीतियों में मदद करता है। भूस्थलीय मॉडलिंग जनसंख्या गतिविधियों, परिवहन नेटवर्क्स, और पर्यावरणीय प्रभावों के बारे में अनुभव प्रदान करके निर्णय निर्माण में सहायक होती है।
इस दूरस्थ शिक्षा प्रणाली के समन्वयक डॉ. जगदीश चंद जो कि भूगोल विभाग के सहायक प्रोफेसर हैं ने बताया कि महाविद्यालय, भारतीय सुदूर संवेदन संस्थान (इसरो) के दूरस्थ शिक्षा प्रणाली के माध्यम से आगे भी इस तरह से सुदूर संवेदन और भू-सूचना विज्ञान के क्षेत्र में अधिक प्रशिक्षण और कार्यशालाएं आयोजित करता रहेगा।
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-- -- संवाद
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सुदूर संवेदन और भौगोलिक सूचना तंत्र पर चार प्रशिक्षण व कार्यशाला आयोजित
भारतीय सुुदूर संवेदन संस्थान और संगड़ाह कॉलेज के भूगोल विभाग ने किया आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन(सिरमौर)। भारतीय सुदूर संवेदन संस्थान (इसरो) और राजकीय महाविद्यालय संगड़ाह के भूगोल विभाग ने मार्च से मई 2024 तक सुदूर संवेदन और भौगोलिक सूचना तंत्र पर चार प्रशिक्षण और एक कार्यशाला का आयोजन किया। इसमें 202 विद्यार्थी, प्राध्यापक और अभ्यार्थियों ने भाग लिया। हाल ही में, राजकीय महाविद्यालय संगड़ाह ने भारतीय सुदूर संवेदन संस्थान के सहयोग से 27-31 मई के बीच शहरी पर्यावरण के मॉडलिंग के लिए भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी का प्रशिक्षण दिया जिसमें 21 छात्रों ने भाग लिया।
भूस्थलीय प्रौद्योगिकी नगरीय विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इससे नगरीय परिदृश्यों का विश्लेषण, विकास के पैटर्न का पूर्वानुमान और इंफ्रास्ट्रक्चर की आवश्यकताओं का मूल्यांकन संभव होता है। इससे नगरीय विकास के लिए सिमुलेशन को सुविधाजनक बनाया जा सकता है जो नगरीय नियोजन और प्रतिरोधी रणनीतियों में मदद करता है। भूस्थलीय मॉडलिंग जनसंख्या गतिविधियों, परिवहन नेटवर्क्स, और पर्यावरणीय प्रभावों के बारे में अनुभव प्रदान करके निर्णय निर्माण में सहायक होती है।
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इस दूरस्थ शिक्षा प्रणाली के समन्वयक डॉ. जगदीश चंद जो कि भूगोल विभाग के सहायक प्रोफेसर हैं ने बताया कि महाविद्यालय, भारतीय सुदूर संवेदन संस्थान (इसरो) के दूरस्थ शिक्षा प्रणाली के माध्यम से आगे भी इस तरह से सुदूर संवेदन और भू-सूचना विज्ञान के क्षेत्र में अधिक प्रशिक्षण और कार्यशालाएं आयोजित करता रहेगा।
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