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जनजातीय दर्जे से एससी के अधिकार होंगे समाप्त
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उपायुक्त सिरमौर को ज्ञापन देने जाते अनुसूचित जाति संगठनों के प्रतिनिधि। संवाद
- फोटो : NAHAN
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नाहन (सिरमौर)। गिरीपार में जातीय आधार पर भेदभाव को लेकर अनुसूचित जाति के संगठनों का प्रतिनिधिमंडल दलित शोषण मुक्ति मंच के बैनर तले नाहन में उपायुक्त से मिला।
प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा। प्रतिनिधिमंडल में शामिल दलित शोषण मुक्ति मंच के जिला संयोजक आशीष कुमार, कोली समाज के जिला प्रधान संजय पुंडीर, नवजीवन वाल्मीकि सभा के प्रधान अचपाल सिंह, दलित शोषण मुक्ति मंच नाहन खंड के संयोजक विजय चोरिया, युवा विकास क्लब के हरीश कल्याण, क्रिश्चियन समुदाय के प्रवीण सोढा ने कहा कि वह गिरिपार को जनजातीय दर्जा दिए जाने के विरोध में नहीं हैं, लेकिन यह मांग पूरी होती है तो यहां रहने वाले अनुसूचित जाति वर्ग को संरक्षण देने वाला एट्रोसिटी एक्ट (अत्याचार अधिनियम) और पंचायतीराज में मिलने वाले अवसर समाप्त हो जाएंगे।
उन्होंने कहा कि यहां जातीय भेदभाव चरम पर है। ऐसे में गिरीपार को जनजातीय का दर्जा देने का कदम अनुसूचित जाति के लोगों को दास प्रथा की ओर धकेले जाने वाला होगा। तीन साल में जातीय आधार पर 155 घटनाएं सामने आई हैं। इनमें से 110 घटनाएं सिरमौर के गिरिपार क्षेत्र से हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति से इन सभी तथ्यों पर ध्यान देकर पंचायतीराज और एट्रोसिटी एक्ट को लागू रखने की मांग की गई है।
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प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा। प्रतिनिधिमंडल में शामिल दलित शोषण मुक्ति मंच के जिला संयोजक आशीष कुमार, कोली समाज के जिला प्रधान संजय पुंडीर, नवजीवन वाल्मीकि सभा के प्रधान अचपाल सिंह, दलित शोषण मुक्ति मंच नाहन खंड के संयोजक विजय चोरिया, युवा विकास क्लब के हरीश कल्याण, क्रिश्चियन समुदाय के प्रवीण सोढा ने कहा कि वह गिरिपार को जनजातीय दर्जा दिए जाने के विरोध में नहीं हैं, लेकिन यह मांग पूरी होती है तो यहां रहने वाले अनुसूचित जाति वर्ग को संरक्षण देने वाला एट्रोसिटी एक्ट (अत्याचार अधिनियम) और पंचायतीराज में मिलने वाले अवसर समाप्त हो जाएंगे।
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उन्होंने कहा कि यहां जातीय भेदभाव चरम पर है। ऐसे में गिरीपार को जनजातीय का दर्जा देने का कदम अनुसूचित जाति के लोगों को दास प्रथा की ओर धकेले जाने वाला होगा। तीन साल में जातीय आधार पर 155 घटनाएं सामने आई हैं। इनमें से 110 घटनाएं सिरमौर के गिरिपार क्षेत्र से हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति से इन सभी तथ्यों पर ध्यान देकर पंचायतीराज और एट्रोसिटी एक्ट को लागू रखने की मांग की गई है।
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