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Sirmour News: किसानों से 12 लाख का गन्ना खरीदने के बाद चरखी संचालक फरार
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एक्सक्लूसिव--
-किसान कर रहे खुद को ठगा सा महसूस, चर्खियों में बेहतर दाम मिलने पर किसानों ने बेचा था गन्ना
-शुरूआत में किया नकद भुगतान, बाद में एकमुश्त भुगतान का दिया था आश्वासन
भजन चौधरी
धौलाकुआं (सिरमौर)। उपमंडल पांवटा साहिब के क्षेत्रों से गुड़ उत्पादक किसानों का 12 लाख रुपये का भुगतान किए बिना फरार हो गए हैं। इसके बाद किसानों की चिंता बढ़ गई है। इसके बाद किसान खुद को ठगा हुआ भी महसूस कर रहे हैं।
बता दें कि पांवटा साहिब के क्षेत्रों में गन्ने की अच्छी पैदावार होने के चलते यहां एक दर्जन गन्ना क्रशर गुड़ उत्पादन करते हैं। हर साल दिवाली आते ही पांवटा साहिब व आसपास के क्षेत्रों में बाहरी राज्यों से आकर व्यवसायी गुड़ उत्पादन के कारोबार में लग जाते हैं। मार्च महीने के आखिरी तक भारी मात्रा में गन्ना खरीद कर गुड़ और शक्कर तैयार करने का काम यहां जोरों पर चलता है। यहां तैयार की गई गुड़ व शक्कर का स्वाद दूसरे राज्यों के गुड़ से अच्छा होने के चलते विदेशों में भी इसकी मांग रहती है। ऐसे में यहां तैयार किया गया गुड़ व शक्कर हाथों-हाथ बिकता है।
मोटी कमाई के लालच में पांवटा के कुछ किसान गन्ना पिराई और गुड़ बनाने के कड़ाहे समेत बाहरी राज्यों से आए लोगों को चुकता ठेका दे देते हैं। बस यहीं से सारा खेल शुरू हो जाता है। हालांकि पांवटा क्षेत्र से लगभग चार लाख क्विंटल गन्ना बेचने के लिए हिमाचल सरकार ने उत्तराखंड सरकार के साथ 1990 में समझौता किया था। पांवटा से सरकारी दाम पर सारा गन्ना खरीद किया जाता रहा है, लेकिन साल दर साल निजी चरखी संचालित होती गई और ऊंचे दाम देकर किसानों से गन्ना खरीद शुरू किया जाने लगा। इस साल भी पांवटा क्षेत्र में एक दर्जन निजी चरखी द्वारा बड़े पैमाने पर गन्ना खरीद किया गया।
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उत्तराखंड सरकार की ओर से गन्ने की खरीद 405 रुपये प्रति क्विंटल की जा रही थी, जबकि गुड़ उत्पादकों ने 500 से 560 रुपये प्रति क्विंटल गन्ना खरीद शुरू कर दी। यहां के किसानों ने गन्ना बेचने के लिए उत्तराखंड की शुगर मिल में पंजीकरण कराया था। गुड़ उत्पादकों ने ज्यादा पैसे मिलने पर अधिकतर गन्ना निजी चरखी संचालकों को ही बेच दिया।
गन्ना उत्पादकों ने बताया कि चरखी संचालित ठेकेदार शुरू में तो नकद भुगतान करते रहे बाद में इकट्ठा भुगतान करने का आश्वासन दिया। इसी विश्वास पर किसानों ने सारा गन्ना चर्खियों में ही बेच दिया। जब किसान गन्ना के एक मुश्त पैसे लेने ठेकेदार के पास गए तो पता चला कि ठेकेदार रात को ही बोरी बिस्तर समेट कर भाग गया। शिवपुर पंचायत में संचालित दो ठेकेदार यहां से लाखों रुपये लेकर फरार बताए जा रहे हैं।
किसान बलबीर सिंह ने बताया कि उसका 2 लाख 20 हजार, बलदेव सिंह का दो लाख, सरबण सिंह का भी दो लाख व अन्य किसानों का लगभग 12 लाख रुपये लेकर फरार हो गए। किसानों ने बताया कि ऐसे में उनकी मेहनत पर पानी फिर गया है।
उधर, हिमाचल प्रदेश किसान यूनियन के जिला उपाध्यक्ष गुरविंदर सिंह ने बताया कि किसानों के साथ लाखों की लूट हुई है। ठगे गए किसानों की सूची तैयार कर सरकार से आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के लिए किसान यूनियन पूरा सहयोग करेगी।
संवाद
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-किसान कर रहे खुद को ठगा सा महसूस, चर्खियों में बेहतर दाम मिलने पर किसानों ने बेचा था गन्ना
-शुरूआत में किया नकद भुगतान, बाद में एकमुश्त भुगतान का दिया था आश्वासन
भजन चौधरी
धौलाकुआं (सिरमौर)। उपमंडल पांवटा साहिब के क्षेत्रों से गुड़ उत्पादक किसानों का 12 लाख रुपये का भुगतान किए बिना फरार हो गए हैं। इसके बाद किसानों की चिंता बढ़ गई है। इसके बाद किसान खुद को ठगा हुआ भी महसूस कर रहे हैं।
बता दें कि पांवटा साहिब के क्षेत्रों में गन्ने की अच्छी पैदावार होने के चलते यहां एक दर्जन गन्ना क्रशर गुड़ उत्पादन करते हैं। हर साल दिवाली आते ही पांवटा साहिब व आसपास के क्षेत्रों में बाहरी राज्यों से आकर व्यवसायी गुड़ उत्पादन के कारोबार में लग जाते हैं। मार्च महीने के आखिरी तक भारी मात्रा में गन्ना खरीद कर गुड़ और शक्कर तैयार करने का काम यहां जोरों पर चलता है। यहां तैयार की गई गुड़ व शक्कर का स्वाद दूसरे राज्यों के गुड़ से अच्छा होने के चलते विदेशों में भी इसकी मांग रहती है। ऐसे में यहां तैयार किया गया गुड़ व शक्कर हाथों-हाथ बिकता है।
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मोटी कमाई के लालच में पांवटा के कुछ किसान गन्ना पिराई और गुड़ बनाने के कड़ाहे समेत बाहरी राज्यों से आए लोगों को चुकता ठेका दे देते हैं। बस यहीं से सारा खेल शुरू हो जाता है। हालांकि पांवटा क्षेत्र से लगभग चार लाख क्विंटल गन्ना बेचने के लिए हिमाचल सरकार ने उत्तराखंड सरकार के साथ 1990 में समझौता किया था। पांवटा से सरकारी दाम पर सारा गन्ना खरीद किया जाता रहा है, लेकिन साल दर साल निजी चरखी संचालित होती गई और ऊंचे दाम देकर किसानों से गन्ना खरीद शुरू किया जाने लगा। इस साल भी पांवटा क्षेत्र में एक दर्जन निजी चरखी द्वारा बड़े पैमाने पर गन्ना खरीद किया गया।
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उत्तराखंड सरकार की ओर से गन्ने की खरीद 405 रुपये प्रति क्विंटल की जा रही थी, जबकि गुड़ उत्पादकों ने 500 से 560 रुपये प्रति क्विंटल गन्ना खरीद शुरू कर दी। यहां के किसानों ने गन्ना बेचने के लिए उत्तराखंड की शुगर मिल में पंजीकरण कराया था। गुड़ उत्पादकों ने ज्यादा पैसे मिलने पर अधिकतर गन्ना निजी चरखी संचालकों को ही बेच दिया।
गन्ना उत्पादकों ने बताया कि चरखी संचालित ठेकेदार शुरू में तो नकद भुगतान करते रहे बाद में इकट्ठा भुगतान करने का आश्वासन दिया। इसी विश्वास पर किसानों ने सारा गन्ना चर्खियों में ही बेच दिया। जब किसान गन्ना के एक मुश्त पैसे लेने ठेकेदार के पास गए तो पता चला कि ठेकेदार रात को ही बोरी बिस्तर समेट कर भाग गया। शिवपुर पंचायत में संचालित दो ठेकेदार यहां से लाखों रुपये लेकर फरार बताए जा रहे हैं।
किसान बलबीर सिंह ने बताया कि उसका 2 लाख 20 हजार, बलदेव सिंह का दो लाख, सरबण सिंह का भी दो लाख व अन्य किसानों का लगभग 12 लाख रुपये लेकर फरार हो गए। किसानों ने बताया कि ऐसे में उनकी मेहनत पर पानी फिर गया है।
उधर, हिमाचल प्रदेश किसान यूनियन के जिला उपाध्यक्ष गुरविंदर सिंह ने बताया कि किसानों के साथ लाखों की लूट हुई है। ठगे गए किसानों की सूची तैयार कर सरकार से आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के लिए किसान यूनियन पूरा सहयोग करेगी।
संवाद