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Sirmour News: हरिपुरधार पीएचसी को दोबारा सिविल अस्पताल का दर्जा दें
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छह पंचायतों के जनप्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री के नाम भेजा ज्ञापन
एक चिकित्सक के भरोसे चल रही 30 पंचायतों के लोगों की स्वास्थ्य सेवाएं
संवाद न्यूज एजेंसी
हरिपुरधार/नौहराधार (सिरमौर)। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हरिपुरधार को दोबारा सिविल अस्पताल के रूप में बहाल करने की मांग तेज हो गई है। क्षेत्र की छह पंचायतों के जनप्रतिनिधियों ने नायब तहसीलदार भावना शर्मा के माध्यम से मुख्यमंत्री सुक्खू को ज्ञापन भेजकर अस्पताल को पुन: सिविल अस्पताल के रूप में अधिसूचित करने और स्वास्थ्य सुविधाएं सुदृढ़ करने की मांग की है।
ज्ञापन सौंपने वालों में ग्राम पंचायत दियुड़ी खड़ांह के प्रधान विनय छिंटा, बीयोंग-टटवा की प्रधान अंजना शर्मा, टिकरी डसकना की प्रधान अनुराधा राणा, नोरा-बौरा के प्रधान देवराज, गहल-डिमाइन के उपप्रधान नीरज मांटा तथा बड़ोल के उपप्रधान वीरेंद्र सहित अन्य जनप्रतिनिधि शामिल रहे।
प्रधान विनय छिंटा ने बताया कि हरिपुरधार अस्पताल करीब 25 से 30 पंचायतों के लोगों का प्रमुख स्वास्थ्य केंद्र है। इसके अलावा रेणुका, शिलाई और चौपाल विधानसभा क्षेत्रों के साथ-साथ पड़ोसी शिमला जिले के कई गांवों के लोग भी उपचार के लिए इसी अस्पताल पर निर्भर हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के कार्यकाल में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को सिविल अस्पताल का दर्जा दिया गया था, लेकिन सरकार बदलने के बाद इसे डी-नोटिफाई कर दिया गया, जिससे क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हुई हैं।
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उन्होंने बताया कि पहले अस्पताल में 12 से अधिक पद स्वीकृत थे, जबकि वर्तमान में केवल एक चिकित्सक ही कार्यरत है। शाम पांच बजे के बाद स्वास्थ्य सेवाएं लगभग ठप हो जाती हैं, जिससे आपातकालीन स्थिति में मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। हरिपुरधार से नाहन की दूरी करीब 100 किलोमीटर और सोलन की दूरी लगभग 102 किलोमीटर होने के कारण गंभीर मरीजों को समय पर उपचार मिलना भी कठिन हो जाता है। नायब तहसीलदार भावना शर्मा ने बताया कि ज्ञापन सरकार को भेज दिया जाएगा।
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एक चिकित्सक के भरोसे चल रही 30 पंचायतों के लोगों की स्वास्थ्य सेवाएं
संवाद न्यूज एजेंसी
हरिपुरधार/नौहराधार (सिरमौर)। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हरिपुरधार को दोबारा सिविल अस्पताल के रूप में बहाल करने की मांग तेज हो गई है। क्षेत्र की छह पंचायतों के जनप्रतिनिधियों ने नायब तहसीलदार भावना शर्मा के माध्यम से मुख्यमंत्री सुक्खू को ज्ञापन भेजकर अस्पताल को पुन: सिविल अस्पताल के रूप में अधिसूचित करने और स्वास्थ्य सुविधाएं सुदृढ़ करने की मांग की है।
ज्ञापन सौंपने वालों में ग्राम पंचायत दियुड़ी खड़ांह के प्रधान विनय छिंटा, बीयोंग-टटवा की प्रधान अंजना शर्मा, टिकरी डसकना की प्रधान अनुराधा राणा, नोरा-बौरा के प्रधान देवराज, गहल-डिमाइन के उपप्रधान नीरज मांटा तथा बड़ोल के उपप्रधान वीरेंद्र सहित अन्य जनप्रतिनिधि शामिल रहे।
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प्रधान विनय छिंटा ने बताया कि हरिपुरधार अस्पताल करीब 25 से 30 पंचायतों के लोगों का प्रमुख स्वास्थ्य केंद्र है। इसके अलावा रेणुका, शिलाई और चौपाल विधानसभा क्षेत्रों के साथ-साथ पड़ोसी शिमला जिले के कई गांवों के लोग भी उपचार के लिए इसी अस्पताल पर निर्भर हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के कार्यकाल में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को सिविल अस्पताल का दर्जा दिया गया था, लेकिन सरकार बदलने के बाद इसे डी-नोटिफाई कर दिया गया, जिससे क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हुई हैं।
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उन्होंने बताया कि पहले अस्पताल में 12 से अधिक पद स्वीकृत थे, जबकि वर्तमान में केवल एक चिकित्सक ही कार्यरत है। शाम पांच बजे के बाद स्वास्थ्य सेवाएं लगभग ठप हो जाती हैं, जिससे आपातकालीन स्थिति में मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। हरिपुरधार से नाहन की दूरी करीब 100 किलोमीटर और सोलन की दूरी लगभग 102 किलोमीटर होने के कारण गंभीर मरीजों को समय पर उपचार मिलना भी कठिन हो जाता है। नायब तहसीलदार भावना शर्मा ने बताया कि ज्ञापन सरकार को भेज दिया जाएगा।