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Sirmour News: 18 साल से पुनर्वास की राह देख रहे रेणुका बांध विस्थापित, प्रबंधन के सामने उठाईं 17 मांगें
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ददाहू में रेणुकाजी बांध के महाप्रबंधक को ज्ञापन सौपतें रेणुका बांध जन संघर्ष समिति के सदस्य। सं
-मकान निर्माण के लिए 27 लाख रुपये की राशि बढ़ाने और रोजगार में प्राथमिकता देने की मांग
-मुआवजे से लेकर पुनर्वास भूमि के अधिग्रहण और मोहतू-चमियाणा पुल निर्माण का मुद्दा भी उठाया
संवाद न्यूज एजेंसी
संगड़ाह/ददाहू (सिरमौर)। रेणुका बांध परियोजना से प्रभावित परिवारों का पुनर्वास 18 साल बाद भी अधूरा है। आवास, जमीन, मुआवजे और रोजगार जैसी बुनियादी जरूरतों से जुड़ी समस्याओं के समाधान में हो रही देरी के बीच विस्थापितों ने एक बार फिर अपनी आवाज बुलंद की है। श्री रेणुका बांध जन संघर्ष समिति ने सरकार और बांध प्रबंधन के समक्ष 17 मांगें रखते हुए प्रभावित परिवारों के पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन की प्रक्रिया जल्द पूरी करने का आग्रह किया। समिति ने राजपत्र में निर्धारित पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन योजना का लाभ सभी पात्र परिवारों तक पहुंचाने की मांग भी उठाई।
पंचायत भवन ददाहू में समिति के मुख्य सलाहकार धर्मचंद शर्मा और संयोजक प्रताप सिंह तोमर की अध्यक्षता में बैठक हुई। इसके बाद समिति के पदाधिकारियों ने बांध प्रबंधन कार्यालय में महाप्रबंधक अनूप शर्मा से मुलाकात कर विस्थापितों की समस्याएं रखीं। समिति अध्यक्ष योगेंद्र कपिला ने 17 मांगों का उल्लेख करते हुए इनके समाधान के लिए आवश्यक कार्रवाई करने का आग्रह किया।
समिति ने मकान निर्माण के लिए निर्धारित 27 लाख रुपये की राशि को वर्तमान में लोक निर्माण विभाग के निर्माण लागत मानकों के अनुसार बढ़ाने की मांग की। इसके साथ ही गृहविहीन परिवारों को उचित श्रेणी में शामिल कर रोजगार में प्राथमिकता देने और बांध के डूब क्षेत्र में रह रहे परिवारों को पूर्ण विस्थापित का दर्जा देने का मुद्दा उठाया।
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बैठक में एमजीएम विवेक वर्मा, जेओ कपिल ठाकुर, अमिता चंदन, महासचिव संजय चौहान, राजकुमार शर्मा, मेलाराम शर्मा, टीकाराम, सुभाष चंद्र और बलबीर सिंह सहित बड़ी संख्या में विस्थापित मौजूद रहे।
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भूमिहीन काश्तकारों से लेकर दुकानदारों तक के लिए मांगा न्याय
समिति ने कहा कि परियोजना से प्रभावित भूमिहीन काश्तकारों, घराट संचालकों, दुकानदारों, लघु उद्योग संचालकों और मछुआरों की आजीविका से जुड़े नुकसान का उचित मुआवजा दिया जाना चाहिए। इन वर्गों के लिए रोजगार की व्यवस्था करने पर भी जोर दिया गया। इसके अलावा सभी विस्थापित परिवारों का एक साथ पुनर्स्थापन करने, वन भूमि पर रह रहे परिवारों को उचित अधिकार देने और मुआवजा वितरण का विस्तृत ब्योरा उपलब्ध करवाने की मांग की गई। समिति ने पुनर्वास प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और पात्र परिवारों को उनके अधिकारों का लाभ देने का आग्रह किया।
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45 बीघा भूमि के अधिग्रहण और पुनर्वास स्थलों की जांच की मांग
समिति ने तनोशी, मलाहन और खुरकन में करीब 45 बीघा भूमि का शीघ्र अधिग्रहण करने की मांग उठाई। वहीं, टोकियो, सैनवाला, अंबोया और चाकली में खरीदी गई पुनर्वास भूमि की उपयुक्तता की जांच करवाने और उसकी निशानदेही करने का मुद्दा भी प्रमुखता से रखा गया। इसके अतिरिक्त मोहतू से चमियाणा के बीच पुल निर्माण की मांग की गई। समिति का कहना है कि पुनर्वास में लगातार हो रही देरी के कारण प्रभावित परिवारों के सामने आवास, खेती और रोजगार से जुड़ी समस्याएं बनी हुई हैं। ऐसे में पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन की प्रक्रिया को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाना चाहिए।-- -- -- -- --
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-मुआवजे से लेकर पुनर्वास भूमि के अधिग्रहण और मोहतू-चमियाणा पुल निर्माण का मुद्दा भी उठाया
संवाद न्यूज एजेंसी
संगड़ाह/ददाहू (सिरमौर)। रेणुका बांध परियोजना से प्रभावित परिवारों का पुनर्वास 18 साल बाद भी अधूरा है। आवास, जमीन, मुआवजे और रोजगार जैसी बुनियादी जरूरतों से जुड़ी समस्याओं के समाधान में हो रही देरी के बीच विस्थापितों ने एक बार फिर अपनी आवाज बुलंद की है। श्री रेणुका बांध जन संघर्ष समिति ने सरकार और बांध प्रबंधन के समक्ष 17 मांगें रखते हुए प्रभावित परिवारों के पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन की प्रक्रिया जल्द पूरी करने का आग्रह किया। समिति ने राजपत्र में निर्धारित पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन योजना का लाभ सभी पात्र परिवारों तक पहुंचाने की मांग भी उठाई।
पंचायत भवन ददाहू में समिति के मुख्य सलाहकार धर्मचंद शर्मा और संयोजक प्रताप सिंह तोमर की अध्यक्षता में बैठक हुई। इसके बाद समिति के पदाधिकारियों ने बांध प्रबंधन कार्यालय में महाप्रबंधक अनूप शर्मा से मुलाकात कर विस्थापितों की समस्याएं रखीं। समिति अध्यक्ष योगेंद्र कपिला ने 17 मांगों का उल्लेख करते हुए इनके समाधान के लिए आवश्यक कार्रवाई करने का आग्रह किया।
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समिति ने मकान निर्माण के लिए निर्धारित 27 लाख रुपये की राशि को वर्तमान में लोक निर्माण विभाग के निर्माण लागत मानकों के अनुसार बढ़ाने की मांग की। इसके साथ ही गृहविहीन परिवारों को उचित श्रेणी में शामिल कर रोजगार में प्राथमिकता देने और बांध के डूब क्षेत्र में रह रहे परिवारों को पूर्ण विस्थापित का दर्जा देने का मुद्दा उठाया।
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बैठक में एमजीएम विवेक वर्मा, जेओ कपिल ठाकुर, अमिता चंदन, महासचिव संजय चौहान, राजकुमार शर्मा, मेलाराम शर्मा, टीकाराम, सुभाष चंद्र और बलबीर सिंह सहित बड़ी संख्या में विस्थापित मौजूद रहे।
भूमिहीन काश्तकारों से लेकर दुकानदारों तक के लिए मांगा न्याय
समिति ने कहा कि परियोजना से प्रभावित भूमिहीन काश्तकारों, घराट संचालकों, दुकानदारों, लघु उद्योग संचालकों और मछुआरों की आजीविका से जुड़े नुकसान का उचित मुआवजा दिया जाना चाहिए। इन वर्गों के लिए रोजगार की व्यवस्था करने पर भी जोर दिया गया। इसके अलावा सभी विस्थापित परिवारों का एक साथ पुनर्स्थापन करने, वन भूमि पर रह रहे परिवारों को उचित अधिकार देने और मुआवजा वितरण का विस्तृत ब्योरा उपलब्ध करवाने की मांग की गई। समिति ने पुनर्वास प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और पात्र परिवारों को उनके अधिकारों का लाभ देने का आग्रह किया।
45 बीघा भूमि के अधिग्रहण और पुनर्वास स्थलों की जांच की मांग
समिति ने तनोशी, मलाहन और खुरकन में करीब 45 बीघा भूमि का शीघ्र अधिग्रहण करने की मांग उठाई। वहीं, टोकियो, सैनवाला, अंबोया और चाकली में खरीदी गई पुनर्वास भूमि की उपयुक्तता की जांच करवाने और उसकी निशानदेही करने का मुद्दा भी प्रमुखता से रखा गया। इसके अतिरिक्त मोहतू से चमियाणा के बीच पुल निर्माण की मांग की गई। समिति का कहना है कि पुनर्वास में लगातार हो रही देरी के कारण प्रभावित परिवारों के सामने आवास, खेती और रोजगार से जुड़ी समस्याएं बनी हुई हैं। ऐसे में पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन की प्रक्रिया को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाना चाहिए।