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Sirmour News: पेंशन में गिना जाए अनुबंध सेवाकाल
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नई पेंशन योजना कर्मचारी संघ ने प्रदेश सरकार से की उठाई मांग
बोले, ऐसा नहीं होने से तृतीय व चतुर्थ श्रेणी कर्मी पेंशन से रह जाएंगे वंचित
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। हिमाचल प्रदेश नई पेंशन योजना कर्मचारी संघ जिला सिरमौर ने सरकार से कर्मचारी के अनुबंध सेवाकाल को पेंशन में गिनने की मांग की है। संघ के अध्यक्ष सुरेंद्र पुंडीर ने कहा कि अनुबंध सेवाकाल को पेंशन के लिए न गिना जाना ओपीएस (पुरानी पेंशन योजना) की मुख्य धारणा के विरुद्ध है। इससे अधिकतर तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी पुरानी पेंशन के लाभ से वंचित हो जाएंगे।
संघ के अध्यक्ष सुरेंद्र पुंडीर, राज्य उपाध्यक्ष सुनील तोमर, वरिष्ठ उपाध्यक्ष जगदीश परमार और कोषाध्यक्ष हरदेव ठाकुर ने संयुक्त वक्तव्य में कहा कि पुरानी पेंशन बहाली के आंदोलन में जिन तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों का सबसे अधिक योगदान रहा उनका अधिकतर सेवाकाल अस्थायी होता है। सर्वोच्च न्यायालय ने दैनिक भोगी सेवाकाल के आनुपातिक समय और अनुबंध के पूरे सेवाकाल को पेंशन के लिए गिने जाने के पक्ष में निर्णय दिया है। ऐसे में अब नए अधिनियम को पुरानी तिथि से लागू कर कर्मचारियों को पेंशन विहीन कर देना न्यायसंगत नहीं होगा। पुरानी पेंशन लागू होने पर अधिकतर अनुबंध कर्मचारियों ने पुरानी पेंशन का विकल्प दिया। इसके चलते सरकार ने नई पेंशन योजना के तहत उन्हें दिया जाने वाला नियोक्ता का शेयर भी बंद कर दिया है। ऐसे में अब अनुबंध सेवाकाल को पुरानी पेंशन में न गिने जाने से उन कर्मचारियों को दोहरा नुकसान होगा। इसके अतिरिक्त अधिकतर कर्मचारियों को पुन: न्यायालय की शरण में जाना पड़ेगा और अनावश्यक वित्तीय बोझ सहन करना होगा। संघ के अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री से निवेदन किया कि अनुबंध सेवा शर्तों से संबंधित अधिनियम में संशोधन कर अनुबंध सेवाकाल को पुरानी पेंशन के लिए अवश्य गिना जाए।
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बोले, ऐसा नहीं होने से तृतीय व चतुर्थ श्रेणी कर्मी पेंशन से रह जाएंगे वंचित
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। हिमाचल प्रदेश नई पेंशन योजना कर्मचारी संघ जिला सिरमौर ने सरकार से कर्मचारी के अनुबंध सेवाकाल को पेंशन में गिनने की मांग की है। संघ के अध्यक्ष सुरेंद्र पुंडीर ने कहा कि अनुबंध सेवाकाल को पेंशन के लिए न गिना जाना ओपीएस (पुरानी पेंशन योजना) की मुख्य धारणा के विरुद्ध है। इससे अधिकतर तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी पुरानी पेंशन के लाभ से वंचित हो जाएंगे।
संघ के अध्यक्ष सुरेंद्र पुंडीर, राज्य उपाध्यक्ष सुनील तोमर, वरिष्ठ उपाध्यक्ष जगदीश परमार और कोषाध्यक्ष हरदेव ठाकुर ने संयुक्त वक्तव्य में कहा कि पुरानी पेंशन बहाली के आंदोलन में जिन तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों का सबसे अधिक योगदान रहा उनका अधिकतर सेवाकाल अस्थायी होता है। सर्वोच्च न्यायालय ने दैनिक भोगी सेवाकाल के आनुपातिक समय और अनुबंध के पूरे सेवाकाल को पेंशन के लिए गिने जाने के पक्ष में निर्णय दिया है। ऐसे में अब नए अधिनियम को पुरानी तिथि से लागू कर कर्मचारियों को पेंशन विहीन कर देना न्यायसंगत नहीं होगा। पुरानी पेंशन लागू होने पर अधिकतर अनुबंध कर्मचारियों ने पुरानी पेंशन का विकल्प दिया। इसके चलते सरकार ने नई पेंशन योजना के तहत उन्हें दिया जाने वाला नियोक्ता का शेयर भी बंद कर दिया है। ऐसे में अब अनुबंध सेवाकाल को पुरानी पेंशन में न गिने जाने से उन कर्मचारियों को दोहरा नुकसान होगा। इसके अतिरिक्त अधिकतर कर्मचारियों को पुन: न्यायालय की शरण में जाना पड़ेगा और अनावश्यक वित्तीय बोझ सहन करना होगा। संघ के अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री से निवेदन किया कि अनुबंध सेवा शर्तों से संबंधित अधिनियम में संशोधन कर अनुबंध सेवाकाल को पुरानी पेंशन के लिए अवश्य गिना जाए।
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