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Sirmour News: नौ तबीन की एकजुटता के लिए आमरण अनशन में बैठे रविंद्र कंवर
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राजगढ़ के शाया में आमरण अनशन पर बैठे रविंद्र कंवर। संवाद
सचित्र--
-नौ तबीन में बढ़ रही गुटबाजी, द्वेष भावना को खत्म करना उद्देश्य
संवाद न्यूज एजेंसी
राजगढ़ (सिरमौर)। जिला सिरमौर और शिमला के प्रमुख आराध्य देव शिरगुल महाराज की जन्मस्थली शाया में ‘नौ तबीन’(नौ क्षेत्रों) में एकजुटता के लिए थानाधार निवासी देवा रविंद्र कंवर सोमवार से आमरण अनशन पर बैठ गए हैं। उन्होंने नौ तबीन में बढ़ रही आपसी गुटबाजी, द्वेष भावना और मतभेद को समाप्त करने के उद्देश्य से अनशन प्रारंभ किया है।
रविंद्र कंवर ने बताया कि शिरगुल महाराज की नौ तबीनें हैं, लेकिन कुछ समय से इन तबीनों के बीच आपसी कूटनीति, लड़ाई-झगड़े और द्वेष की भावना काफी बढ़ चुकी है। उन्होंने कहा कि जब सभी तबीनों के ईष्ट और आराध्य शिरगुल महाराज हैं, तो प्रजा आपस में एकजुट क्यों नहीं है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका किसी व्यक्ति विशेष या किसी तबीन से कोई व्यक्तिगत विरोध नहीं है। उनका एकमात्र उद्देश्य यह है कि शिरगुल महाराज अपने गुर के माध्यम से दरबार से ऐसा रास्ता दिखाएं, जिससे नौ तबीनों के बीच बढ़ रही गुटबाजी और मनमुटाव समाप्त हो सके और समाज में पुन: एकता स्थापित हो सके।
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उन्होंने कहा कि महाराज के लिए मंदिर निर्माण का कार्य चल रहा है, लेकिन यदि प्रजा आपस में ही विभाजित रहेगी तो यह आध्यात्मिक और सामाजिक प्रयास अधूरा रहेगा। इसी उद्देश्य को लेकर वे शाया में आमरण अनशन पर बैठे हैं और उन्हें कई लोगों का समर्थन भी मिलने लगा हैं।
-- -संवाद
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-नौ तबीन में बढ़ रही गुटबाजी, द्वेष भावना को खत्म करना उद्देश्य
संवाद न्यूज एजेंसी
राजगढ़ (सिरमौर)। जिला सिरमौर और शिमला के प्रमुख आराध्य देव शिरगुल महाराज की जन्मस्थली शाया में ‘नौ तबीन’(नौ क्षेत्रों) में एकजुटता के लिए थानाधार निवासी देवा रविंद्र कंवर सोमवार से आमरण अनशन पर बैठ गए हैं। उन्होंने नौ तबीन में बढ़ रही आपसी गुटबाजी, द्वेष भावना और मतभेद को समाप्त करने के उद्देश्य से अनशन प्रारंभ किया है।
रविंद्र कंवर ने बताया कि शिरगुल महाराज की नौ तबीनें हैं, लेकिन कुछ समय से इन तबीनों के बीच आपसी कूटनीति, लड़ाई-झगड़े और द्वेष की भावना काफी बढ़ चुकी है। उन्होंने कहा कि जब सभी तबीनों के ईष्ट और आराध्य शिरगुल महाराज हैं, तो प्रजा आपस में एकजुट क्यों नहीं है।
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उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका किसी व्यक्ति विशेष या किसी तबीन से कोई व्यक्तिगत विरोध नहीं है। उनका एकमात्र उद्देश्य यह है कि शिरगुल महाराज अपने गुर के माध्यम से दरबार से ऐसा रास्ता दिखाएं, जिससे नौ तबीनों के बीच बढ़ रही गुटबाजी और मनमुटाव समाप्त हो सके और समाज में पुन: एकता स्थापित हो सके।
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उन्होंने कहा कि महाराज के लिए मंदिर निर्माण का कार्य चल रहा है, लेकिन यदि प्रजा आपस में ही विभाजित रहेगी तो यह आध्यात्मिक और सामाजिक प्रयास अधूरा रहेगा। इसी उद्देश्य को लेकर वे शाया में आमरण अनशन पर बैठे हैं और उन्हें कई लोगों का समर्थन भी मिलने लगा हैं।