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Sirmour News: नगर पंचायत राजगढ़ में नहीं हुआ डंपिंग साइट का चयन
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नगर पंचायत राजगढ़ में नहीं हुआ डंपिंग साइट का चयन
कचरा प्रबंधन के लिए प्रतिवर्ष खर्च करने पड़ रहे लाखों रुपये
पंचायत में तीन दशक बाद भी डंपिंग साइट न बनने से पेश आ रही समस्या
वेद प्रकाश ठाकुर
राजगढ़ (सिरमौर)। नगर पंचायत राजगढ़ में तीन दशक बाद भी डंपिंग साइट का चयन न होने से लाखों रुपये प्रतिवर्ष कूड़ा कचरा प्रबंधन पर खर्च हो रहा है। प्रदेश में किसी भी पार्टी की सरकार रही हो लेकिन किसी ने भी इस समस्या के निदान के प्रति गंभीरता नहीं दिखाई।
नगर पंचायत राजगढ़ को शहर का कूड़ा कचरा अस्थायी डंपिंग साइट के लिए 40 हजार रुपये प्रतिमाह खर्च करने पड़ रहे हैं। गिरिपार क्षेत्र की एकमात्र नगर पंचायत 1995 में अस्तित्व में आई। करीब तीन दशकों बाद भी शहर के कूड़े के प्रबंधन के लिए डंपिंग साइट का चयन नहीं हो पाया है और न ही कचरा प्रबंध संयंत्र लग पाया है। पहले दशकों तक नगर पंचायत का कूड़ा सलोगड़ा (सोलन) भेजा जाता रहा, जिसपर हजारों रुपये प्रतिमाह खर्च वाहन पर होता रहा। अब कोट गांव में अस्थायी डंपिंग साइट में कूड़ा डाला जाता है जिसका किराया ही 40 हजार रुपये प्रतिमाह खर्च करना पड़ रहा है। वहां से कूड़ा दिल्ली भेजा जा रहा है।
कूड़ा कचरे को ठिकाने लगाने में अब तक नगर पंचायत करोड़ों रुपये खर्च कर चुकी है। यदि समय रहते यहां कूड़ा कचरा संयंत्र स्थापित हो जाता तो यह करोड़ों रुपये शहर के विकास पर खर्च हो सकते थे।
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उधर, इस बारे में नगर पंचायत के सचिव अजय गर्ग से संपर्क करने पर उन्होंने बताया कि 40 हजार रुपये अस्थायी डंपिंग साइट का किराया दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि स्थान का चयन हो चुका है और चुनावी आचार संहिता के बाद कूड़ा कचरा प्रबंधन संयंत्र स्थापित कर दिया जाएगा, जिससे नगर पंचायत की लाखों रुपये की बचत प्रतिवर्ष होगी।
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कचरा प्रबंधन के लिए प्रतिवर्ष खर्च करने पड़ रहे लाखों रुपये
पंचायत में तीन दशक बाद भी डंपिंग साइट न बनने से पेश आ रही समस्या
वेद प्रकाश ठाकुर
राजगढ़ (सिरमौर)। नगर पंचायत राजगढ़ में तीन दशक बाद भी डंपिंग साइट का चयन न होने से लाखों रुपये प्रतिवर्ष कूड़ा कचरा प्रबंधन पर खर्च हो रहा है। प्रदेश में किसी भी पार्टी की सरकार रही हो लेकिन किसी ने भी इस समस्या के निदान के प्रति गंभीरता नहीं दिखाई।
नगर पंचायत राजगढ़ को शहर का कूड़ा कचरा अस्थायी डंपिंग साइट के लिए 40 हजार रुपये प्रतिमाह खर्च करने पड़ रहे हैं। गिरिपार क्षेत्र की एकमात्र नगर पंचायत 1995 में अस्तित्व में आई। करीब तीन दशकों बाद भी शहर के कूड़े के प्रबंधन के लिए डंपिंग साइट का चयन नहीं हो पाया है और न ही कचरा प्रबंध संयंत्र लग पाया है। पहले दशकों तक नगर पंचायत का कूड़ा सलोगड़ा (सोलन) भेजा जाता रहा, जिसपर हजारों रुपये प्रतिमाह खर्च वाहन पर होता रहा। अब कोट गांव में अस्थायी डंपिंग साइट में कूड़ा डाला जाता है जिसका किराया ही 40 हजार रुपये प्रतिमाह खर्च करना पड़ रहा है। वहां से कूड़ा दिल्ली भेजा जा रहा है।
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कूड़ा कचरे को ठिकाने लगाने में अब तक नगर पंचायत करोड़ों रुपये खर्च कर चुकी है। यदि समय रहते यहां कूड़ा कचरा संयंत्र स्थापित हो जाता तो यह करोड़ों रुपये शहर के विकास पर खर्च हो सकते थे।
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उधर, इस बारे में नगर पंचायत के सचिव अजय गर्ग से संपर्क करने पर उन्होंने बताया कि 40 हजार रुपये अस्थायी डंपिंग साइट का किराया दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि स्थान का चयन हो चुका है और चुनावी आचार संहिता के बाद कूड़ा कचरा प्रबंधन संयंत्र स्थापित कर दिया जाएगा, जिससे नगर पंचायत की लाखों रुपये की बचत प्रतिवर्ष होगी।