{"_id":"572b8a564f1c1b44735cd094","slug":"no-doctor-no-farmasist","type":"story","status":"publish","title_hn":"कांटिमश्वा पंचायत में न डॉक्टर न ही फार्मासिस्ट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कांटिमश्वा पंचायत में न डॉक्टर न ही फार्मासिस्ट
ब्यूरो/अमर उजाला, नाहन
Updated Thu, 05 May 2016 11:30 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गिरीपार क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाएं दयनीय होने के कारण लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। स्वास्थ्य विभाग पीएचसी में पदों को भरने मे नाकाम है। कई स्वास्थ्य संस्थानों में डॉक्टर का पद खाली है तो कहीं पर फार्मासिस्ट नहीं है। कई स्थानों पर तो न डॉक्टर है और न ही फार्मासिस्ट। वहां चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों से काम चलाया जा रहा है। ऐसा ही हाल राजपुर केंद्र के अंतर्गत पीएचसी कांटिमश्वा का है।
विज्ञापन
पिछले तीन साल से इस अस्पताल में न तो डॉक्टर हैं न ही फार्मासिस्ट। पीएचसी में मात्र चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ही है जो रोजाना सुबह पीएचसी खोलता है और शाम को बंद कर देता है। ग्रामीणों के लिए पीएचसी मात्र शोपीस है। कांटिमश्वा की प्रधान दुर्गी देवी, उप प्रधान सुरेंद्र सिंह, बीडीसी सदस्य विभूति कंवर ने बताया कि सरकार और विभाग कांटिमश्वा पंचायत की कोई सुध नहीं ले रही है। विभाग तीन साल से पीएचसी में रिक्त पड़े डॉक्टर और फार्मासिस्ट के पद को नहीं भर पा रहा है।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि कंटिमश्वा के आधा दर्जन गांवों के लगभग 150 परिवार इसी स्वास्थ्य केंद्र पर निर्भर हैं। ग्रामीणों ने बताया कि कई बार तो मजबूरी में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी से ही मरहम पट्टी करवानी पड़ती है। हालात यह है कि 20 रुपये की दवाई के लिए 50 से 80 रुपये किराया खर्च करना पड़ता है। उधर, सतौन पीएचसी में भी डॉक्टर नहीं है जहां कमरऊ के डॉक्टर को डेपुटेशन पर भेजा गया है।
विज्ञापन
उधर, राजपुर के बीएमओ केके पराशर ने कहा कि सतौन के लिए कमरऊ से डॉक्टर डेपुटेशन पर भेजा गया है। विभाग के पास कांटिमश्वा के लिए डेपुटेशन पर भेजने के लिए चिकित्सक नहीं है। खाली चल रहे पदों के बारे में समय-समय पर विभागीय अधिकारियों को अवगत करवाया जाता है।