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Sirmour News: सचिवालय के घेराव में राजगढ़ ब्लॉक से शामिल होंगे सैकड़ों किसान
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हिमाचल किसान सभा के राजगढ़ ब्लॉक की चंदोल में हुई बैठक
किसानों की समस्याओं और 29 जुलाई के घेराव कार्यक्रम पर चर्चा
संवाद न्यूज एजेंसी
राजगढ़ (सिरमौर)। हिमाचल किसान सभा राजगढ़ ब्लॉक की बैठक वीरवार को पझौता के चंदोल में हुई। बैठक को संबोधित करते हुए किसान सभा के राज्य उपाध्यक्ष राजेंद्र ठाकुर ने कहा कि प्रदेश में जमीन से बेदखली के खिलाफ व किसानों के पांच बीघा तक के कब्जे बहाल करने की मांग को लेकर 29 जुलाई को शिमला सचिवालय का घेराव किया जाएगा। इसमें राजगढ़ ब्लॉक से भी सैकड़ों कार्यकर्ता शामिल होंगे।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में लगभग चार लाख परिवार ऐसे हैं जिन्हें अभी तक जमीन का अधिकार नहीं मिला है। प्रदेश में नौतोड़ नियमों के तहत भूमिहीन, सिलिंग और मुजारा में जो जमीन 70 के दशक में गरीब किसानों को मिली थी, उस पर किसानों ने खेती बागवानी शुरू की और अपना घर व गोशालाएं बनाईं। सरकार ने इस जमीन के पट्टे किसानों को नहीं दिए और 1980 में वन संरक्षण कानून लाकर किसानों की जमीन का मालिक भी वन विभाग को बना दिया। इससे पहले सरकार ने न कोई स्थायी बंदोबस्त करवाया और न ही जमीन का सही बंटवारा किया। यह कार्य किसानों के साथ बहुत बड़ा धोखा है। इसके खिलाफ प्रदेश में निर्णायक लड़ाई लड़ी जाएगी। किसान सभा जमीन का संघर्ष तब तक लड़ेगी जब तक पुश्तैनी जमीन का हक न मिल जाए। इसको लेकर 29 जुलाई को सिरमौर जिला समेत राजगढ़ ब्लॉक से हजारों किसान सचिवालय घेराव में जाएंगे।
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किसानों की समस्याओं और 29 जुलाई के घेराव कार्यक्रम पर चर्चा
संवाद न्यूज एजेंसी
राजगढ़ (सिरमौर)। हिमाचल किसान सभा राजगढ़ ब्लॉक की बैठक वीरवार को पझौता के चंदोल में हुई। बैठक को संबोधित करते हुए किसान सभा के राज्य उपाध्यक्ष राजेंद्र ठाकुर ने कहा कि प्रदेश में जमीन से बेदखली के खिलाफ व किसानों के पांच बीघा तक के कब्जे बहाल करने की मांग को लेकर 29 जुलाई को शिमला सचिवालय का घेराव किया जाएगा। इसमें राजगढ़ ब्लॉक से भी सैकड़ों कार्यकर्ता शामिल होंगे।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में लगभग चार लाख परिवार ऐसे हैं जिन्हें अभी तक जमीन का अधिकार नहीं मिला है। प्रदेश में नौतोड़ नियमों के तहत भूमिहीन, सिलिंग और मुजारा में जो जमीन 70 के दशक में गरीब किसानों को मिली थी, उस पर किसानों ने खेती बागवानी शुरू की और अपना घर व गोशालाएं बनाईं। सरकार ने इस जमीन के पट्टे किसानों को नहीं दिए और 1980 में वन संरक्षण कानून लाकर किसानों की जमीन का मालिक भी वन विभाग को बना दिया। इससे पहले सरकार ने न कोई स्थायी बंदोबस्त करवाया और न ही जमीन का सही बंटवारा किया। यह कार्य किसानों के साथ बहुत बड़ा धोखा है। इसके खिलाफ प्रदेश में निर्णायक लड़ाई लड़ी जाएगी। किसान सभा जमीन का संघर्ष तब तक लड़ेगी जब तक पुश्तैनी जमीन का हक न मिल जाए। इसको लेकर 29 जुलाई को सिरमौर जिला समेत राजगढ़ ब्लॉक से हजारों किसान सचिवालय घेराव में जाएंगे।
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