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Sirmour News: स्वायत्तता के मुद्दे पर राज्यपाल से मिले विश्वविद्यालय के शिक्षक
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विधेयक पर जताई आपत्ति, दोपहर दो बजे कुलपति कार्यालय के बाहर किया प्रदर्शन
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश के विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता में प्रस्तावित बदलावों को लेकर शिक्षक समुदाय ने राज्यपाल से हस्तक्षेप की मांग की है। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिक्षक कल्याण संघ का प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को राज्यपाल से मिला। प्रतिनिधिमंडल ने प्रदेश सरकार के वर्तमान विधेयक को लेकर शिक्षकों की आपत्तियां उनके समक्ष रखीं। संघ ने विधेयक वापस लेने की मांग की।
संघ के अनुसार प्रस्तावित विधेयक से विश्वविद्यालयों की प्रशासनिक, वित्तीय और शैक्षणिक स्वायत्तता प्रभावित हो सकती है। प्रतिनिधिमंडल ने विश्वविद्यालयों की वित्तीय शक्तियों और शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया में संभावित बदलावों पर विशेष चिंता जताई। संघ ने कहा कि विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक पदों की चयन प्रक्रिया विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नियमों के अनुसार संचालित होती है। शिक्षकों ने राज्यपाल को बताया कि इन नियमों से हटकर नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव होने से विश्वविद्यालयों की गुणवत्ता और पारदर्शिता प्रभावित हो सकती है। संघ ने यह भी आशंका जताई कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के मानकों से विचलन होने पर अनुदान और अन्य वित्तीय सहायता पर असर पड़ सकता है।
राज्यपाल से मुलाकात के बाद हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय परिसर में कुलपति कार्यालय के बाहर शिक्षकों ने प्रदर्शन किया। मंगलवार दोपहर दो बजे हुए प्रदर्शन में लगभग सभी प्राध्यापकों के शामिल होने का दावा संघ ने किया। शिक्षकों ने विधेयक वापस लेने और विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता कायम रखने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि विश्वविद्यालयों के प्रशासनिक और वित्तीय अधिकारों में अनावश्यक हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने नियुक्तियों में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के मानकों का पालन सुनिश्चित करने की मांग की।
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प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व संघ अध्यक्ष प्रो. नितिन व्यास ने किया। इसमें महासचिव डॉ. अंकुश भारद्वाज, उपाध्यक्ष डॉ. योगराज, प्रो. चंद्रमोहन सहित अन्य शिक्षक शामिल रहे। संघ अध्यक्ष ने कहा कि विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता शिक्षक समुदाय का महत्वपूर्ण मुद्दा है। महासचिव ने सरकार से विधेयक पर पुनर्विचार करने की मांग की। संघ ने चेतावनी दी कि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को व्यापक किया जाएगा।
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संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश के विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता में प्रस्तावित बदलावों को लेकर शिक्षक समुदाय ने राज्यपाल से हस्तक्षेप की मांग की है। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिक्षक कल्याण संघ का प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को राज्यपाल से मिला। प्रतिनिधिमंडल ने प्रदेश सरकार के वर्तमान विधेयक को लेकर शिक्षकों की आपत्तियां उनके समक्ष रखीं। संघ ने विधेयक वापस लेने की मांग की।
संघ के अनुसार प्रस्तावित विधेयक से विश्वविद्यालयों की प्रशासनिक, वित्तीय और शैक्षणिक स्वायत्तता प्रभावित हो सकती है। प्रतिनिधिमंडल ने विश्वविद्यालयों की वित्तीय शक्तियों और शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया में संभावित बदलावों पर विशेष चिंता जताई। संघ ने कहा कि विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक पदों की चयन प्रक्रिया विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नियमों के अनुसार संचालित होती है। शिक्षकों ने राज्यपाल को बताया कि इन नियमों से हटकर नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव होने से विश्वविद्यालयों की गुणवत्ता और पारदर्शिता प्रभावित हो सकती है। संघ ने यह भी आशंका जताई कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के मानकों से विचलन होने पर अनुदान और अन्य वित्तीय सहायता पर असर पड़ सकता है।
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राज्यपाल से मुलाकात के बाद हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय परिसर में कुलपति कार्यालय के बाहर शिक्षकों ने प्रदर्शन किया। मंगलवार दोपहर दो बजे हुए प्रदर्शन में लगभग सभी प्राध्यापकों के शामिल होने का दावा संघ ने किया। शिक्षकों ने विधेयक वापस लेने और विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता कायम रखने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि विश्वविद्यालयों के प्रशासनिक और वित्तीय अधिकारों में अनावश्यक हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने नियुक्तियों में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के मानकों का पालन सुनिश्चित करने की मांग की।
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प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व संघ अध्यक्ष प्रो. नितिन व्यास ने किया। इसमें महासचिव डॉ. अंकुश भारद्वाज, उपाध्यक्ष डॉ. योगराज, प्रो. चंद्रमोहन सहित अन्य शिक्षक शामिल रहे। संघ अध्यक्ष ने कहा कि विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता शिक्षक समुदाय का महत्वपूर्ण मुद्दा है। महासचिव ने सरकार से विधेयक पर पुनर्विचार करने की मांग की। संघ ने चेतावनी दी कि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को व्यापक किया जाएगा।