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Sirmour News: केवल बेहतर वार्षिक परीक्षा परिणाम अच्छे शिक्षक का मापदंड नहीं
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केवल बेहतर वार्षिक परीक्षा परिणाम अच्छे शिक्षक का मापदंड नहीं
सरकार के फरमान पर प्रदेश विद्यालय प्रवक्ता संघ ने उठाए सवाल
संवाद न्यूज एजेंसी
राजगढ़ (सिरमौर)। प्रदेश विद्यालय प्रवक्ता संघ सिरमौर ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह ठाकुर की ओर से बेहतर परीक्षा परिणाम देने वाले शिक्षकों को विदेशों की सेर करवाने वाला बयान सामने आने पर अपनी प्रतिक्रिया दी है।
संघ का कहना है कि केवल और केवल शतप्रतिशत वार्षिक परीक्षा परिणाम को बेहतर शिक्षक का मापदंड बनाया जाना उचित नहीं। शिक्षा का उद्देश्य बहुत व्यापक है जो देश और समाज के भविष्य की नींव रखता है।
ऐसे में मात्र एक-दो वार्षिक परीक्षा परिणाम के आधार पर बेहतर शिक्षा व्यवस्था अथवा अच्छे शिक्षक को जांचना तर्कसंगत नहीं।
प्रेस को जारी बयान में संघ जिलाध्यक्ष सुरेंद्र पुंडीर, महासचिव आईडी राही, निवर्तमान राज्य वरिष्ठ उपाध्यक्ष नरेंद्र नेगी, पूर्व महासचिव संजय शर्मा, राज्य कार्यकारिणी सदस्य रमेश नेगी आदि ने कहा कि शत-प्रतिशत परीक्षा परिणाम कुछ ऐसे विषयों का भी आ जाता हैं जिन विषयों के शिक्षकों के पद लंबे समय से रिक्त हैं।
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दूसरी ओर जहां कुछ विषयों में विद्यार्थियों की संख्या केवल एक अंक अर्थात 9 या इससे भी कम होती है। वहीं अंग्रेजी जैसे अनिवार्य विषय में यह संख्या 100 से अधिक भी है। साथ ही सभी विषयों की जटिलता की एक समान तुलना करना भी उचित नहीं है।
सुरेंद्र पुंडीर ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में जहां शिक्षकों के पद लंबे समय से रिक्त हैं और शिक्षक अपने विषय से अतिरिक्त अन्य विषयों को भी पढ़ा रहे हैं।
कई गैर शिक्षकों के रिक्त पदों का कार्य भी कर रहे हैं, उन शिक्षकों के लिए क्या केवल परीक्षा परिणाम का यह मापदंड न्याय कर पाएगा।
संघ ने सुझाव दिया कि शिक्षा विभाग को उप मंडलीय स्तर पर निगरानी समिति गठित करनी चाहिए ताकि हर क्षेत्र से इन सभी मापदंडों की जांच कर ऐसे शिक्षकों की सूची बनाई जा सके, जो विदेशी शिक्षण भ्रमण को केवल सैर सपाटा न समझकर दूसरे देशों की शिक्षा व्यवस्था को जांच परखकर वहां की अच्छी व्यवस्थाओं को अपने प्रदेश में व्यावहारिक रूप देने की क्षमता रखते हों।
-- संवाद
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सरकार के फरमान पर प्रदेश विद्यालय प्रवक्ता संघ ने उठाए सवाल
संवाद न्यूज एजेंसी
राजगढ़ (सिरमौर)। प्रदेश विद्यालय प्रवक्ता संघ सिरमौर ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह ठाकुर की ओर से बेहतर परीक्षा परिणाम देने वाले शिक्षकों को विदेशों की सेर करवाने वाला बयान सामने आने पर अपनी प्रतिक्रिया दी है।
संघ का कहना है कि केवल और केवल शतप्रतिशत वार्षिक परीक्षा परिणाम को बेहतर शिक्षक का मापदंड बनाया जाना उचित नहीं। शिक्षा का उद्देश्य बहुत व्यापक है जो देश और समाज के भविष्य की नींव रखता है।
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ऐसे में मात्र एक-दो वार्षिक परीक्षा परिणाम के आधार पर बेहतर शिक्षा व्यवस्था अथवा अच्छे शिक्षक को जांचना तर्कसंगत नहीं।
प्रेस को जारी बयान में संघ जिलाध्यक्ष सुरेंद्र पुंडीर, महासचिव आईडी राही, निवर्तमान राज्य वरिष्ठ उपाध्यक्ष नरेंद्र नेगी, पूर्व महासचिव संजय शर्मा, राज्य कार्यकारिणी सदस्य रमेश नेगी आदि ने कहा कि शत-प्रतिशत परीक्षा परिणाम कुछ ऐसे विषयों का भी आ जाता हैं जिन विषयों के शिक्षकों के पद लंबे समय से रिक्त हैं।
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दूसरी ओर जहां कुछ विषयों में विद्यार्थियों की संख्या केवल एक अंक अर्थात 9 या इससे भी कम होती है। वहीं अंग्रेजी जैसे अनिवार्य विषय में यह संख्या 100 से अधिक भी है। साथ ही सभी विषयों की जटिलता की एक समान तुलना करना भी उचित नहीं है।
सुरेंद्र पुंडीर ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में जहां शिक्षकों के पद लंबे समय से रिक्त हैं और शिक्षक अपने विषय से अतिरिक्त अन्य विषयों को भी पढ़ा रहे हैं।
कई गैर शिक्षकों के रिक्त पदों का कार्य भी कर रहे हैं, उन शिक्षकों के लिए क्या केवल परीक्षा परिणाम का यह मापदंड न्याय कर पाएगा।
संघ ने सुझाव दिया कि शिक्षा विभाग को उप मंडलीय स्तर पर निगरानी समिति गठित करनी चाहिए ताकि हर क्षेत्र से इन सभी मापदंडों की जांच कर ऐसे शिक्षकों की सूची बनाई जा सके, जो विदेशी शिक्षण भ्रमण को केवल सैर सपाटा न समझकर दूसरे देशों की शिक्षा व्यवस्था को जांच परखकर वहां की अच्छी व्यवस्थाओं को अपने प्रदेश में व्यावहारिक रूप देने की क्षमता रखते हों।