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Sirmour News: दादी मां अब कोई कहानी नहीं सुनाती.., कविता से बांधा समां
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नाहन में कवि सम्मेलन के बाद युवा कवि को प्रमाण पत्र भेंट करते मुख्यातिथि। संवाद
चित्र--
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। हिंदी दिवस पर शंखनाद सामाजिक संस्था की ओर से नाहन में जिलास्तरीय कवि सम्मेलन आयोजित किया गया। इसमें शिक्षाविद और समाजसेवी अशरफ अली मुख्यातिथि रहे। कुल्लू से पहुंचे आलोचक एवं साहित्यकार गणेश गनी विशिष्ट अतिथि रहे। साहित्यकार दिलीप वशिष्ठ ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की, जबकि प्रसिद्ध मंच संचालक एवं कवि भुवन जोशी ने मंच संचालन किया।
इसमें एक दर्जन नवोदित रचनाकारों को भी मंच प्रदान किया गया। इनमें तुषार चौहान, अनुज कुमार, ब्रह्मांश, गौरव पुंडीर, ऋषिका भगत, शिवांगी शर्मा, शिवानी चौहान, चेतना, गुलशन, रजनीश और शाश्वत पुंडीर सहित अन्य रचनाकार शामिल रहे। दीपचंद कौशल ने कई बोलियों भाषा से हुई हिंदी समृद्ध, यह धारा.., सरला गौतम ने हिंदी राग नहीं, अनुराग नहीं.., और ऋषिका भगत ने बारिश का मौसम.., कविता प्रस्तुत की।
गौरव पुंडीर ने परिवार की जिम्मेदारी है पिता.., अश्विन पुंडीर ने शिमला की सर्दी में वो रात भर जागती रही.., और अनुज कुमार ने अपने बदन के संताप को लाख छुपाए बैठा है.., रचना सुनाई। मुकेश सहोत्रा ने दूर शोर से शांत वाटिका में बैठी.., मौ. कय्यूम सैय्यद ने दादी मां अब कोई कहानी नहीं सुनाती.., सुनीता भारद्वाज ने हिंदी भारत देश का गान और सम्मान.., और अर्चना शर्मा ने सोच रही हूं क्या लिखूं.., कविता प्रस्तुत की। इसके अलावा गिरीश योगी ने क्या खोया, क्या पाया जग में.., दीपराज विश्वास ने जो अपने कदमों में रखता था सारी दुनिया.., और डॉ. श्रीकांत अकेला ने भोर की ठंडी हवा में से सी बेचैनियां हैं.., कविता सुनाकर समां बांधा।
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सम्मेलन में दीपचंद कौशल, भुवन जोशी, सरला गौतम, अर्चना शर्मा, मीनाक्षी वर्मा, प्रताप पाराशर, गणेश गनी, अशरफ अली, सुनीता भारद्वाज, दीपराज विश्वास, डॉ. श्रीकांत अकेला, मुकेश सहोत्रा, मौ. कय्यूम सैय्यद, गिरीश योगी, चेतना सिंह और नीरपावन समेत कई साहित्यकारों ने रचनाएं प्रस्तुत कीं।-- -- --
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संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। हिंदी दिवस पर शंखनाद सामाजिक संस्था की ओर से नाहन में जिलास्तरीय कवि सम्मेलन आयोजित किया गया। इसमें शिक्षाविद और समाजसेवी अशरफ अली मुख्यातिथि रहे। कुल्लू से पहुंचे आलोचक एवं साहित्यकार गणेश गनी विशिष्ट अतिथि रहे। साहित्यकार दिलीप वशिष्ठ ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की, जबकि प्रसिद्ध मंच संचालक एवं कवि भुवन जोशी ने मंच संचालन किया।
इसमें एक दर्जन नवोदित रचनाकारों को भी मंच प्रदान किया गया। इनमें तुषार चौहान, अनुज कुमार, ब्रह्मांश, गौरव पुंडीर, ऋषिका भगत, शिवांगी शर्मा, शिवानी चौहान, चेतना, गुलशन, रजनीश और शाश्वत पुंडीर सहित अन्य रचनाकार शामिल रहे। दीपचंद कौशल ने कई बोलियों भाषा से हुई हिंदी समृद्ध, यह धारा.., सरला गौतम ने हिंदी राग नहीं, अनुराग नहीं.., और ऋषिका भगत ने बारिश का मौसम.., कविता प्रस्तुत की।
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गौरव पुंडीर ने परिवार की जिम्मेदारी है पिता.., अश्विन पुंडीर ने शिमला की सर्दी में वो रात भर जागती रही.., और अनुज कुमार ने अपने बदन के संताप को लाख छुपाए बैठा है.., रचना सुनाई। मुकेश सहोत्रा ने दूर शोर से शांत वाटिका में बैठी.., मौ. कय्यूम सैय्यद ने दादी मां अब कोई कहानी नहीं सुनाती.., सुनीता भारद्वाज ने हिंदी भारत देश का गान और सम्मान.., और अर्चना शर्मा ने सोच रही हूं क्या लिखूं.., कविता प्रस्तुत की। इसके अलावा गिरीश योगी ने क्या खोया, क्या पाया जग में.., दीपराज विश्वास ने जो अपने कदमों में रखता था सारी दुनिया.., और डॉ. श्रीकांत अकेला ने भोर की ठंडी हवा में से सी बेचैनियां हैं.., कविता सुनाकर समां बांधा।
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सम्मेलन में दीपचंद कौशल, भुवन जोशी, सरला गौतम, अर्चना शर्मा, मीनाक्षी वर्मा, प्रताप पाराशर, गणेश गनी, अशरफ अली, सुनीता भारद्वाज, दीपराज विश्वास, डॉ. श्रीकांत अकेला, मुकेश सहोत्रा, मौ. कय्यूम सैय्यद, गिरीश योगी, चेतना सिंह और नीरपावन समेत कई साहित्यकारों ने रचनाएं प्रस्तुत कीं।