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Sirmour News: हिमाचल निर्माता डॉ. परमार को दिया जाए भारत रत्न
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हिमाचल निर्माता डॉ. परमार को दिया जाए भारत रत्न
विधायक अजय सोलंकी ने विधानसभा सत्र में उठाई मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। स्थानीय विधायक अजय सोलंकी ने हिमाचल निर्माता डॉ. वाईएस परमार को भारत रत्न देने का आग्रह किया है। सोलंकी ने विधानसभा सत्र में यह गैर-सरकारी संकल्प पेश किया।
उन्होंने कहा कि डॉ. परमार कोई साधारण व्यक्ति नहीं थे, बल्कि एक ऐसी सोच थे, जिनकी बदौलत आज हम खुली हवा में सांस ले रहे हैं। उनकी दूरदर्शी सोच और अथक संघर्ष के कारण ही हिमाचल प्रदेश को एक अलग पहचान मिली। आज प्रदेश पहाड़ी राज्यों में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। यह केवल एक राजनीतिक प्रस्ताव नहीं, बल्कि हर हिमाचली के गौरव की बात है।
सोलंकी ने कहा कि डॉ. परमार ने बिना स्वार्थ और बिना दिखावे के केवल जनता की सेवा को ही अपना उद्देश्य बनाया। उनकी सादगी, संघर्ष और साधारण जीवन हम सभी के लिए प्रेरणादायी है। यदि केंद्र सरकार डॉ. परमार को भारत रत्न से अलंकृत करती है, तो यह केवल एक सम्मान नहीं होगा, बल्कि हर हिमाचली के हृदय की आवाज और गौरव का क्षण होगा।
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उन्होंने कहा कि डॉ. परमार का सपना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करना और समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाना था। उसी सोच को मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू आज अपनी नीतियों और कार्यशैली से साकार कर रहे हैं।
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विधायक अजय सोलंकी ने विधानसभा सत्र में उठाई मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। स्थानीय विधायक अजय सोलंकी ने हिमाचल निर्माता डॉ. वाईएस परमार को भारत रत्न देने का आग्रह किया है। सोलंकी ने विधानसभा सत्र में यह गैर-सरकारी संकल्प पेश किया।
उन्होंने कहा कि डॉ. परमार कोई साधारण व्यक्ति नहीं थे, बल्कि एक ऐसी सोच थे, जिनकी बदौलत आज हम खुली हवा में सांस ले रहे हैं। उनकी दूरदर्शी सोच और अथक संघर्ष के कारण ही हिमाचल प्रदेश को एक अलग पहचान मिली। आज प्रदेश पहाड़ी राज्यों में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। यह केवल एक राजनीतिक प्रस्ताव नहीं, बल्कि हर हिमाचली के गौरव की बात है।
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सोलंकी ने कहा कि डॉ. परमार ने बिना स्वार्थ और बिना दिखावे के केवल जनता की सेवा को ही अपना उद्देश्य बनाया। उनकी सादगी, संघर्ष और साधारण जीवन हम सभी के लिए प्रेरणादायी है। यदि केंद्र सरकार डॉ. परमार को भारत रत्न से अलंकृत करती है, तो यह केवल एक सम्मान नहीं होगा, बल्कि हर हिमाचली के हृदय की आवाज और गौरव का क्षण होगा।
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उन्होंने कहा कि डॉ. परमार का सपना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करना और समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाना था। उसी सोच को मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू आज अपनी नीतियों और कार्यशैली से साकार कर रहे हैं।