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Sirmour News: सड़कों पर 50 टन के ट्राले, चंद महीनों में उखड़ रही ग्रामीण सड़कों की परत

Wed, 23 Sep 2026 12:44 AM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Wed, 23 Sep 2026 12:44 AM IST
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heavy tralas on road abhiyaan
(ओवरलोड ट्राले पैकेज)पांवटा साहिब से देवीनगर कुंजा मंत्रालियों रामपुरघाट का बदहाल मार्ग। संवाद
अभियान : ओवरलोड वाहन : खतरे की घंटी-3
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-क्रशर-माइन से खनिज ढोने वाले भारी वाहनों का बोझ एमडीआर और संपर्क मार्गों पर पड़ रहा भारी, धूल और बदहाली झेल रहे ग्रामीण
सुरेश तोमर
पांवटा साहिब (सिरमौर)। सिरमौर में ओवरलोड वाहनों की बेलगाम आवाजाही अब केवल सड़क हादसों का खतरा नहीं, बल्कि ग्रामीण सड़कों के अस्तित्व पर भी भारी पड़ रही है। जिन एमडीआर और संपर्क सड़कों को करीब नौ टन तक भार क्षमता के हिसाब से तैयार किया गया है, उन पर 40 से 50 टन तक भार वाले ट्राले, डंपर और टिप्पर दौड़ रहे हैं। भारी वाहनों के लगातार दबाव से सड़कें जगह-जगह टूटकर उखड़ रही हैं और ग्रामीणों को धूल, गड्ढों व बदहाल यातायात व्यवस्था का सामना करना पड़ रहा है।
पांवटा साहिब क्षेत्र में देवीनगर-रामपुरघाट-नवादा तथा पांवटा साहिब-भगानी-किल्लोड़ जैसे मार्गों की स्थिति इसका उदाहरण है। क्रशर और खनन क्षेत्रों से भारी मात्रा में खनिज ढोने वाले वाहन इन मार्गों से लगातार गुजरते हैं। जिला सिरमौर में 40 से अधिक स्टोन क्रशर संचालित हैं, जिनमें अधिकांश पांवटा साहिब विधानसभा क्षेत्र में हैं। हरियाणा, उत्तराखंड सहित अन्य राज्यों से प्रतिदिन बड़ी संख्या में भारी वाहन यहां माल ढुलाई के लिए पहुंचते हैं।
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ग्राउंड स्तर पर सबसे बड़ा सवाल सड़कों की भार क्षमता और उन पर दौड़ रहे वाहनों के भार को लेकर है। बांगरन-गिरिपुल सहित कई मार्गों पर पुलिया और सड़कें करीब नौ टन भार क्षमता के अनुरूप बनी हैं। इसके बावजूद इन मार्गों पर 40 से 50 टन या उससे अधिक भार लेकर ट्राले पहुंच रहे हैं। ऐसे में सड़क की ऊपरी परत कुछ ही समय में जवाब देने लगती है। ग्रामीण सड़कों पर भारी वाहनों की आवाजाही के कारण मार्ग ऊबड़-खाबड़ होने के साथ उनकी उम्र भी घट रही है।
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धूल के गुबार से लेकर हादसों तक का खतरा
ओवरलोड वाहनों के कारण सड़कों की हालत बिगड़ने के साथ तेज रफ्तार भारी वाहनों से हादसों का खतरा भी बना हुआ है। ग्रामीण कई बार ओवरलोडिंग और तेज रफ्तार के खिलाफ आवाज उठा चुके हैं। सड़क किनारे रहने वाले लोगों को वाहनों से उड़ने वाली धूल और मिट्टी के गुबार का भी सामना करना पड़ रहा है। खनन गतिविधियों से सरकार को राजस्व मिल रहा है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को बदहाल सड़क और धूल की समस्या झेलनी पड़ रही है।
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विशेषज्ञ बोले- भार के अनुसार बनानी होगी सड़क
लोक निर्माण विभाग के सेवानिवृत्त अधिशासी अभियंता दलीप तोमर के अनुसार एमडीआर और संपर्क सड़कें सिंगल लेयर वाली हैं और करीब नौ टन तक भार क्षमता वाले वाहनों के मापदंड के अनुरूप बनी हैं। उन्होंने कहा कि 20 टन से अधिक भार वाले वाहनों के लिए दो से चार लेयर वाली मजबूत सड़कें जरूरी हैं। ऐसे में या तो सड़कों की भार क्षमता बढ़ानी होगी या ओवरलोड वाहनों पर प्रभावी अंकुश लगाना होगा।

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डेढ़ माह में 43 लाख के चालान
आरटीओ सिरमौर सोना चंदेल ने बताया कि विभागीय टीम ने पिछले डेढ़ माह में करीब 43 लाख रुपये की चालान राशि वसूली है। इनमें अधिकतर चालान ओवरलोडिंग से संबंधित हैं। उन्होंने बताया कि उपायुक्त सिरमौर को पत्र भेजकर खनन लीज मालिकों और क्रशर संचालकों की जिम्मेवारी तय करने का आग्रह किया गया है, ताकि वाहनों में ओवरलोड माल न भरवाया जाए।
संवाद---------
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