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Sirmour News: कभी शहरों की लगती थी दौड़, अब राजपुर बाजार में ही मिलता है हर सामान
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हॉट बाजार : राजपुर बाजार। संवाद
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हाट बाजार--
सचित्र--
कभी शहरों की लगती थी दौड़, अब राजपुर बाजार में ही मिलता है हर सामान
सिरमौर के राजा के राज के कारण ही 11 पंचायतों के केंद्र बिंदु गांव का नाम पड़ा था राजपुर
80 के दशक में थी एक-दो दुकान, आज खुल चुकी है राेजमर्रा समेत हर जरूरी चीज की दुकान
संवाद न्यूज एजेंसी
नघेता (सिरमौर)। सिरमौर जिले के गिरिपार क्षेत्र की 11 पंचायतों के केंद्र बिंदु राजपुर गांव का बाजार अब शहरों की तरह फल फूल गया है। अस्सी के दशक में इस बाजार में एक या दो दुकान ही हुआ करती थी। लोगों की रोजमर्रा की चीजों के लिए भी दूसरे शहरों का रुख करना पड़ता था।
अब ऐसा नहीं है। यहां पर लोगों की जरूरत की हर चीज की दुकान खुल चुकी है। इसमें जूते-चप्पल, रेडीमेड कपड़े, ज्वेलरी, हलवाई, रेस्टोरेंट, इलेक्ट्रोनिक्स, हार्डवेयर, कास्मेटिक, भवन सामग्री समेत दूसरी जरूरी सभी चीजों की दुकानें शामिल हैं। अस्सी के दशक में यहां चौहान टी स्टॉल बड़ा मशहूर था। स्थानीय और आसपास के गांवों से आए लोग यहीं चाय पीते थे। अब तो यहां दर्जनों चाय की दुकानें खुल चुकी हैं।
आधुनिक रूप में ढलते जा रहे राजपुर बाजार का एक दुखद पहलू यह भी है कि वर्तमान में यहां अदरक, अरबी व सौंठ का कारोबार सिमट कर रह गया है। दशकों पहले यहां पर हरिपुरधार, नौहराधार, शिलाई, लादी महल, मस्त भोज, नेडा पार, राजगढ़, तक के क्षेत्र का अदरक आधी रात तक खच्चरों के माध्यम से राजपुर बाजार व दिघाली में आढ़त में आया करता था। जहां से ऊंटों के ऊपर अदरक लादकर यमुना नदी पार कर चूहड़पुर पहुंचाया जाता था। इसे अब विकासनगर के रूप में जाना जाता है।
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-- -- बाक्स
राजपुर अपने आप में समेटे हुए है ऐतिहासिकता
सिरमौर के राजा के राज के कारण ही इसका क्षेत्र का नाम राजपुर पड़ा था। उस समय राजा और उसके मंत्री राजपुर में आकर ही पूरे आंजभोज क्षेत्र से लगान वसूला करते थे। यहां से 500 मीटर दूर कांगड़ा गांव की चोटी पर राजा का दुर्ग भी बना हुआ है। यहां से युद्ध के समय सैनिक दूर उत्तराखंड तक की सीमा तक दुश्मन पर नजर रखते थे। इस दुर्ग के चारों ओर 300 फीट गहरी खाई भी खोद रखी थी ताकि दुश्मन यहां प्रवेश न कर सके। उस समय राजा के हाथियों के स्नान के लिए बना तालाब अब फसलों की सिंचाई के लिए प्रयोग में लाया जा रहा है।
-- -- बाक्स
1. पहले खुले आकाश के नीचे गुजारी जाती थी रातें
राजपुर पंचायत के 100 वर्षीय बारु राम ने बताया कि दशकों पहले राजपुर में पूरे मस्त भोज, शिलाई के हाटी लोग आते जाते और अपने हाट के साथ आराम किया करते थे। उस समय यहां कोई दुकान नहीं होती थी। बस खुले आकाश के नीचे ही वह रात गुजार दिया करते थे। अस्सी के दशक में यहां दो दुकान खुली थी।
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2. राजपुर बाजार में मिल रहा हर सामान
राजपुर बाजार के स्टेशनरी विक्रेता बुद्धि प्रकाश गोयल ने बताया कि आज राजपुर बाजार में तकरीबन सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं। दिन भर यहां ग्राहकों की चहल कदमी रहती है। लोगों के रोजमर्रा की जरूरत का हर सामान बाजार में मौजूद रहे।
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3. अब नहीं कहीं भी जाने की जरूरत, हर चीज यहीं रही मिल
दिघाली गांव के रघुबीर सिंह कपूर ने बताया कि पहले वो खच्चरों से हरिपुरधार व नोहरा से अदरक चूहड़पुर मंडी ले जाया करते थे। उनको रास्ते में हाटी भी मिला करते थे। अब हर प्रकार का सामान राजपुर बाजार में ही मिल रहा है, कहीं भी जाने की जरूरत नहीं रह गई है।
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4. कास्मेटिक का सामान अब बाजार से ही खरीद रहे लोग
कॉस्मेटिक सामान की विक्रेता सुषमा ने बताया कि महिलाओं में कॉस्मेटिक सामान को लेकर जागृति आई है। पहले महिलाएं कॉस्मेटिक सामान की खरीदारी के लिए पांवटा व विकासनगर का रूख करती थी। अब राजपुर बाजार से ही खरीदारी की जा रही है।
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5. हर तरह के फैशन का भी सामान मौजूद
टेलर रंजीत कपूर ने बताया कि राजपुर बाजार में जहां महिलाओं के फैशन वाले कपड़े मौजूद हैं वहीं हर प्रकार के फैशन के वस्त्र भी तैयार किए जा रहे हैं। महिलाओं को अब फैशन के लिए शहरों का रुख नहीं करना पड़ रहा है।
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6. सब्जी की खरीदारी को नहीं पड़ रहा भटकना
सब्जी विक्रेता सुरेंद्र सिंह ने बताया कि पहले लोगों को सब्जी खरीदने के लिए भी दूसरे शहरों में जाना पड़ रहा था। अब राजपुर में ही कई दुकानें सब्जी की खुल चुकी हैं। बेमौसमी सब्जी भी यहां बिक रही हैं। किसी भी सीजन में लोग अपनी पसंद की सब्जी का आनंद ले सकते हैं।
-- -- संवाद
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सचित्र
कभी शहरों की लगती थी दौड़, अब राजपुर बाजार में ही मिलता है हर सामान
सिरमौर के राजा के राज के कारण ही 11 पंचायतों के केंद्र बिंदु गांव का नाम पड़ा था राजपुर
80 के दशक में थी एक-दो दुकान, आज खुल चुकी है राेजमर्रा समेत हर जरूरी चीज की दुकान
संवाद न्यूज एजेंसी
नघेता (सिरमौर)। सिरमौर जिले के गिरिपार क्षेत्र की 11 पंचायतों के केंद्र बिंदु राजपुर गांव का बाजार अब शहरों की तरह फल फूल गया है। अस्सी के दशक में इस बाजार में एक या दो दुकान ही हुआ करती थी। लोगों की रोजमर्रा की चीजों के लिए भी दूसरे शहरों का रुख करना पड़ता था।
अब ऐसा नहीं है। यहां पर लोगों की जरूरत की हर चीज की दुकान खुल चुकी है। इसमें जूते-चप्पल, रेडीमेड कपड़े, ज्वेलरी, हलवाई, रेस्टोरेंट, इलेक्ट्रोनिक्स, हार्डवेयर, कास्मेटिक, भवन सामग्री समेत दूसरी जरूरी सभी चीजों की दुकानें शामिल हैं। अस्सी के दशक में यहां चौहान टी स्टॉल बड़ा मशहूर था। स्थानीय और आसपास के गांवों से आए लोग यहीं चाय पीते थे। अब तो यहां दर्जनों चाय की दुकानें खुल चुकी हैं।
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आधुनिक रूप में ढलते जा रहे राजपुर बाजार का एक दुखद पहलू यह भी है कि वर्तमान में यहां अदरक, अरबी व सौंठ का कारोबार सिमट कर रह गया है। दशकों पहले यहां पर हरिपुरधार, नौहराधार, शिलाई, लादी महल, मस्त भोज, नेडा पार, राजगढ़, तक के क्षेत्र का अदरक आधी रात तक खच्चरों के माध्यम से राजपुर बाजार व दिघाली में आढ़त में आया करता था। जहां से ऊंटों के ऊपर अदरक लादकर यमुना नदी पार कर चूहड़पुर पहुंचाया जाता था। इसे अब विकासनगर के रूप में जाना जाता है।
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राजपुर अपने आप में समेटे हुए है ऐतिहासिकता
सिरमौर के राजा के राज के कारण ही इसका क्षेत्र का नाम राजपुर पड़ा था। उस समय राजा और उसके मंत्री राजपुर में आकर ही पूरे आंजभोज क्षेत्र से लगान वसूला करते थे। यहां से 500 मीटर दूर कांगड़ा गांव की चोटी पर राजा का दुर्ग भी बना हुआ है। यहां से युद्ध के समय सैनिक दूर उत्तराखंड तक की सीमा तक दुश्मन पर नजर रखते थे। इस दुर्ग के चारों ओर 300 फीट गहरी खाई भी खोद रखी थी ताकि दुश्मन यहां प्रवेश न कर सके। उस समय राजा के हाथियों के स्नान के लिए बना तालाब अब फसलों की सिंचाई के लिए प्रयोग में लाया जा रहा है।
1. पहले खुले आकाश के नीचे गुजारी जाती थी रातें
राजपुर पंचायत के 100 वर्षीय बारु राम ने बताया कि दशकों पहले राजपुर में पूरे मस्त भोज, शिलाई के हाटी लोग आते जाते और अपने हाट के साथ आराम किया करते थे। उस समय यहां कोई दुकान नहीं होती थी। बस खुले आकाश के नीचे ही वह रात गुजार दिया करते थे। अस्सी के दशक में यहां दो दुकान खुली थी।
2. राजपुर बाजार में मिल रहा हर सामान
राजपुर बाजार के स्टेशनरी विक्रेता बुद्धि प्रकाश गोयल ने बताया कि आज राजपुर बाजार में तकरीबन सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं। दिन भर यहां ग्राहकों की चहल कदमी रहती है। लोगों के रोजमर्रा की जरूरत का हर सामान बाजार में मौजूद रहे।
3. अब नहीं कहीं भी जाने की जरूरत, हर चीज यहीं रही मिल
दिघाली गांव के रघुबीर सिंह कपूर ने बताया कि पहले वो खच्चरों से हरिपुरधार व नोहरा से अदरक चूहड़पुर मंडी ले जाया करते थे। उनको रास्ते में हाटी भी मिला करते थे। अब हर प्रकार का सामान राजपुर बाजार में ही मिल रहा है, कहीं भी जाने की जरूरत नहीं रह गई है।
4. कास्मेटिक का सामान अब बाजार से ही खरीद रहे लोग
कॉस्मेटिक सामान की विक्रेता सुषमा ने बताया कि महिलाओं में कॉस्मेटिक सामान को लेकर जागृति आई है। पहले महिलाएं कॉस्मेटिक सामान की खरीदारी के लिए पांवटा व विकासनगर का रूख करती थी। अब राजपुर बाजार से ही खरीदारी की जा रही है।
5. हर तरह के फैशन का भी सामान मौजूद
टेलर रंजीत कपूर ने बताया कि राजपुर बाजार में जहां महिलाओं के फैशन वाले कपड़े मौजूद हैं वहीं हर प्रकार के फैशन के वस्त्र भी तैयार किए जा रहे हैं। महिलाओं को अब फैशन के लिए शहरों का रुख नहीं करना पड़ रहा है।
6. सब्जी की खरीदारी को नहीं पड़ रहा भटकना
सब्जी विक्रेता सुरेंद्र सिंह ने बताया कि पहले लोगों को सब्जी खरीदने के लिए भी दूसरे शहरों में जाना पड़ रहा था। अब राजपुर में ही कई दुकानें सब्जी की खुल चुकी हैं। बेमौसमी सब्जी भी यहां बिक रही हैं। किसी भी सीजन में लोग अपनी पसंद की सब्जी का आनंद ले सकते हैं।

हॉट बाजार : राजपुर बाजार। संवाद

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