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Sirmour News: मेडिकल कॉलेज में भवन की कमी का खामियाजा भुगत रहे मरीज

Mon, 28 Sep 2026 12:44 AM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Mon, 28 Sep 2026 12:44 AM IST
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ground report medical college
मेडिकल कॉलेज के गायनी वार्ड के बाहर बरामदे में लगे बैड। संवाद
ग्राउंड रिपोर्ट--
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-50 बेड के गायनी वार्ड में बढ़ा दबाव, बरामदे में लगे अतिरिक्त बिस्तर

-ओपीडी, वार्ड और जांच की व्यवस्थाएं भी अलग-अलग जगह

मरीजों के साथ डॉक्टरों और स्टाफ को भी करनी पड़ रही दौड़

चंद्र ठाकुर
नाहन (सिरमौर)। डॉ. वाईएस परमार मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल नाहन में भवन की कमी का खामियाजा मरीजों के साथ अस्पताल प्रबंधन और स्टाफ को भी भुगतना पड़ रहा है। करीब चार साल से नए मेडिकल कॉलेज भवन का निर्माण बंद पड़ा है। ऐसे में बढ़ती मरीजों की संख्या के बीच अस्पताल प्रबंधन को उपलब्ध भवनों में ही वैकल्पिक व्यवस्थाएं करनी पड़ रही हैं।
मेडिकल कॉलेज में औसतन 1200 मरीजों की ओपीडी रहती है। सबसे महत्वपूर्ण विभागों में शामिल गायनी विभाग में ही रोजाना करीब 200 महिलाएं उपचार के लिए पहुंच रही हैं। करीब 50 बिस्तरों की क्षमता वाले विभाग में 34 सामान्य और दो आईसीयू बिस्तर एक स्थान पर हैं, जबकि 14 आयुष विभाग के साथ लगते दूसरे भवन में हैं। मरीजों की संख्या बढ़ने पर वार्ड के बाहर बरामदे में भी अतिरिक्त बेड लगाने पड़ रहे हैं।
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मरीजों के इस दबाव के बावजूद गायनी वार्ड की व्यवस्था एक ही स्थान पर नहीं है। ओपीडी एक स्थान पर है, जबकि मरीजों को दाखिल करने के लिए वार्ड की व्यवस्था दो अलग-अलग जगहों पर करनी पड़ रही है। इससे मरीजों और तीमारदारों को परेशानी उठानी पड़ रही है। डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ को भी मरीजों की देखभाल के लिए अलग-अलग स्थानों के बीच आवाजाही करनी पड़ रही है।
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जांच की जरूरत पड़ने पर भी मरीजों को अलग-अलग स्थानों पर जाना पड़ता है। इससे गंभीर स्थिति वाली गर्भवती महिलाओं के लिए परेशानी और बढ़ जाती है। वार्ड के बाहर बरामदे में बिस्तर लगाने से मरीजों को संक्रमण समेत अन्य जोखिमों को लेकर भी चिंता बनी रहती है। हालांकि अस्पताल प्रबंधन उपलब्ध संसाधनों में व्यवस्थाएं बनाए रखने का प्रयास कर रहा है। गायनी विभाग में पीजी पाठ्यक्रम को लेकर निरीक्षण प्रस्तावित है। ऐसे में विभाग की मौजूदा व्यवस्थाएं भी महत्वपूर्ण होंगी।
गायनी विभाग के एचओडी डॉ. अमोद सिंह ने बताया कि सीमित संसाधनों के बावजूद मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं और सुविधाएं देने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने माना कि विभाग में मरीजों का भारी दबाव है और इसी कारण वार्ड के बाहर बरामदे में भी बेड लगाने पड़े हैं। उन्होंने बताया कि विभाग में पीजी निरीक्षण की प्रक्रिया प्रस्तावित है। मेडिकल कॉलेज के नए भवन का निर्माण करीब चार साल से बंद है। मातृ-शिशु अस्पताल का निर्माण कार्य की प्रक्रिया भी आगे नहीं बढ़ पाई है। मेडिकल कॉलेज प्रबंधन को पुराने और उपलब्ध भवनों में ही विभागों का संचालन करना पड़ रहा है। इसका असर मरीजों की सुविधा के साथ-साथ अस्पताल की कार्यप्रणाली पर भी पड़ रहा है।

मेडिकल कॉलेज की प्रधानाचार्य डॉ. संगीता ढिल्लो ने बताया कि भवन निर्माण का मामला सरकार के अधिकार क्षेत्र में है। उन्होंने माना कि भवन की कमी के कारण स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन में परेशानी आ रही है।
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