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Sirmour News: देश की सेना के ऑपरेशन सिंदूर से हर नागरिक का सीना हुआ चौड़ा
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शहीद कुलविंदर सिंह के बेटे अंकित चौधरी। संवाद
देश की सेना के ऑपरेशन सिंदूर से हर नागरिक का सीना हुआ चौड़ा
पूर्व सैन्य अधिकारियों और सैनिकों ने खुलकर रखे अपने विचार
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन/कालाअंब/ददाहू (सिरमौर)। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद देश की सेनाओं की ओर से पाकिस्तान के आतंकी अड्डों पर किए गए सिंदूर ऑपरेशन के बाद देश के आम नागरिकों सहित पूर्व सैनिकों व अधिकारियों का सीना चौड़ा हुआ है। इस प्रकार की कार्रवाई की मांग देश का हर नागरिक कर रहा था। इस प्रकार की कार्रवाई से आने वाले समय में आतंकवाद पर लगाम लगेगी। जिला सिरमौर के पूर्व सैनिकों ने कुछ इस तरह से अपने विचार रखे।
1. भारतीय सेना को इस महान कार्य के लिए बधाई देता हूं : सलीम अहमद
भारतीय सेना से सेवानिवृत्त कैप्टन सलीम अहमद ने कहा कि मैं भारतीय सेना को इस महान कार्य के लिए बधाई देना चाहता हूं। यह जैसे को तैसा है, यह पाकिस्तान को सिखाया गया एक आवश्यक सबक है। यह एक बेहतरीन ऑपरेशन था और पूरी दुनिया ने देखा कि हम कैसे आतंकी ठिकानों को नष्ट कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि पहलगाम में हुए आतंकी हमले का जवाब देने के लिए जिस तरह से सत्ता पक्ष और विपक्ष एकजुट दिखा यह भी बेहतरीन रहा। उन्होंने कहा कि इस मामले में कोई भी राजनीति नहीं होनी चाहिए, देशवासियों की सुरक्षा सर्वोपरि है।
भारत आगे भी जारी रखे ऐसी कार्रवाई : दीपक धवन
2. उपनिदेशक सैनिक कल्याण बोर्ड सिरमौर एवं सेवानिवृत्त मेजर दीपक धवन ने कहा कि आतंकियों पर देश की सेनाओं ने बेहतरीन हमला बोला है। उन्होंने कहा कि हमें इसी से ही खुश नहीं होना चाहिए इससे आगे बढ़कर भी बड़ी कार्रवाई की जरूरत है ताकि देश के नागरिकों के लिए खतरा बने आतंकवादियों का सफाया हो सके। उन्होंने कहा कि 1971 की जंग में पाकिस्तान के करीब 93 हजार सैनिकों ने आत्मसमर्पण किया था जिसके बाद बांग्लादेश बना। अब समय आ गया है कि भारत को पाकिस्तान को सबक सिखाए और अपने कब्जे में ले। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में इतनी हिम्मत नहीं है कि वह भारत पर इस कार्रवाई के बाद वापस अटैक कर सके।
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सेनाओं को इसके लिए बधाई : सतपाल
3. कालाअंब। सन 1971 भारत-पाक युद्ध लड़ने वाले कालाअंब निवासी पूर्व सैनिक सतपाल ने ऑपरेशन सिंदूर पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि बीती रात भारतीय सेना ने पाकिस्तान स्थित मुख्य आतंकी शिविरों को ध्वस्त करके पहलगाम हमले के शहीद सैलानियों को सच्ची श्रद्धांजलि दी है। इसके लिए भारतीय सेना को दिल से बधाई देता हूं। उन्होंने सन 1971 के भारत-पाक युद्ध की याद ताजा करते हुए बताया कि उस दौरान वो भारतीय सेना के आर्म्ड रेजिमेंट कोर में तैनात थे और इस जंग में उन्होंने भी सक्रिय भूमिका निभाई थी। 03 दिसंबर से 16 दिसंबर 1971 तक चले इस युद्ध में सेना ने कम संसाधनों के बावजूद भी दुश्मन के दांत खट्टे किए थे। उन्होंने जोशीले स्वर में कहा कि आज हमारी फौज के पास पहले की अपेक्षा कई गुना ज्यादा संसाधन हैं। लिहाजा, दुश्मन को मुंह तोड़ जवाब देने में सेना पूर्ण रूप से सक्षम है। बीती रात सेना ने पाक के नौ आतंकी ठिकानों को ध्वस्त करके इसका छोटा सा उदाहरण प्रस्तुत कर दिया है। उन्होंने पहलगाम में शहीद हुए सैलानियों के परिवारों के प्रति भी संवेदना प्रकट की।
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ऑपरेशन सिंदूर सैलानियों को सच्ची श्रद्धांजलि : कैप्टन लीलाराम
4. ददाहू ( सिरमौर) कारगिल युद्ध विजेता ददाहू के जांबाज सेवानिवृत्त सैनिक कैप्टन लीला राम ने ऑपरेशन सिंदूर के प्रति अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि बीती मध्य रात्रि को पाकिस्तान में आतंकवादियों के मुख्य कैंपों पर हमला निर्दोष सैलानियों को सच्ची श्रद्धांजलि है। भारतीय सेवा ने आतंकवादियों के कोटली, बहालपुर, मुरीद व मुजफ्फराबाद आदि स्थानों पर आतंकवादियों के कैंपों को उड़ा कर अपनी बहादुरी ही नहीं अपितु भारत की ताकत को भी दर्शाया है। इसके लिए भारतीय सेना बधाई की पात्र है। उन्होंने कहा कि वह चाहते हैं कि युद्ध हो ओर भारतीय सेना पाकिस्तान पर भारी पड़े और भारत उन 26 निर्देश सैलानियों की मौत का बदला चुकाए जिनकी आतंकवादियों ने महजब पूछ कर हत्या की है।
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ऑपरेशन सिंदूर भारतीय सेना के प्रति गर्व : अंकित चौधरी।
5. ददाहू। कारगिल युद्ध में अपनी जान गवां चूके सिरमौर जिले के जांबाज राइफलमैन शाहिद कुलविंद्र सिंह के पुत्र अंकित चौधरी ने ऑपरेशन सिंदूर के प्रति गर्व जाहिर करते हुए कहा कि नाम मात्र के इस ऑपरेशन से भारत का सीना चौड़ा व माथा ऊंचा हुआ है। यह ऑपरेशन तो मात्र एक दिखावा है शुरुआत होना तो अभी बाकी है। भारतीय सेना को उन सभी 26 निर्दोष भारतीय सैलानियों की हत्या के दौरान निकली खून की हर बूंद का चुन-चुन कर बदला लेना चाहिए जिससे कि पाकिस्तान व आतंकवाद इस तरह की हरकतों को दोहराने का दुस्साहस दोबारा न कर सके। उन्होंने बताया कि उनके पिता ने भी सीना गोलियों से छलनी होने के बावजूद भी अंतिम सांस तक आतंकवादियों का डटकर सामना किया था और एक साथ कई दुश्मनों को मौत की नींद सुलाया। उन्होंने पाकिस्तान में रातोंरात किए गए इस हमले (ऑपरेशन) के लिए भारतीय सेना का आभार जताया है।
संवाद
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पूर्व सैन्य अधिकारियों और सैनिकों ने खुलकर रखे अपने विचार
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन/कालाअंब/ददाहू (सिरमौर)। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद देश की सेनाओं की ओर से पाकिस्तान के आतंकी अड्डों पर किए गए सिंदूर ऑपरेशन के बाद देश के आम नागरिकों सहित पूर्व सैनिकों व अधिकारियों का सीना चौड़ा हुआ है। इस प्रकार की कार्रवाई की मांग देश का हर नागरिक कर रहा था। इस प्रकार की कार्रवाई से आने वाले समय में आतंकवाद पर लगाम लगेगी। जिला सिरमौर के पूर्व सैनिकों ने कुछ इस तरह से अपने विचार रखे।
1. भारतीय सेना को इस महान कार्य के लिए बधाई देता हूं : सलीम अहमद
भारतीय सेना से सेवानिवृत्त कैप्टन सलीम अहमद ने कहा कि मैं भारतीय सेना को इस महान कार्य के लिए बधाई देना चाहता हूं। यह जैसे को तैसा है, यह पाकिस्तान को सिखाया गया एक आवश्यक सबक है। यह एक बेहतरीन ऑपरेशन था और पूरी दुनिया ने देखा कि हम कैसे आतंकी ठिकानों को नष्ट कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि पहलगाम में हुए आतंकी हमले का जवाब देने के लिए जिस तरह से सत्ता पक्ष और विपक्ष एकजुट दिखा यह भी बेहतरीन रहा। उन्होंने कहा कि इस मामले में कोई भी राजनीति नहीं होनी चाहिए, देशवासियों की सुरक्षा सर्वोपरि है।
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भारत आगे भी जारी रखे ऐसी कार्रवाई : दीपक धवन
2. उपनिदेशक सैनिक कल्याण बोर्ड सिरमौर एवं सेवानिवृत्त मेजर दीपक धवन ने कहा कि आतंकियों पर देश की सेनाओं ने बेहतरीन हमला बोला है। उन्होंने कहा कि हमें इसी से ही खुश नहीं होना चाहिए इससे आगे बढ़कर भी बड़ी कार्रवाई की जरूरत है ताकि देश के नागरिकों के लिए खतरा बने आतंकवादियों का सफाया हो सके। उन्होंने कहा कि 1971 की जंग में पाकिस्तान के करीब 93 हजार सैनिकों ने आत्मसमर्पण किया था जिसके बाद बांग्लादेश बना। अब समय आ गया है कि भारत को पाकिस्तान को सबक सिखाए और अपने कब्जे में ले। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में इतनी हिम्मत नहीं है कि वह भारत पर इस कार्रवाई के बाद वापस अटैक कर सके।
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सेनाओं को इसके लिए बधाई : सतपाल
3. कालाअंब। सन 1971 भारत-पाक युद्ध लड़ने वाले कालाअंब निवासी पूर्व सैनिक सतपाल ने ऑपरेशन सिंदूर पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि बीती रात भारतीय सेना ने पाकिस्तान स्थित मुख्य आतंकी शिविरों को ध्वस्त करके पहलगाम हमले के शहीद सैलानियों को सच्ची श्रद्धांजलि दी है। इसके लिए भारतीय सेना को दिल से बधाई देता हूं। उन्होंने सन 1971 के भारत-पाक युद्ध की याद ताजा करते हुए बताया कि उस दौरान वो भारतीय सेना के आर्म्ड रेजिमेंट कोर में तैनात थे और इस जंग में उन्होंने भी सक्रिय भूमिका निभाई थी। 03 दिसंबर से 16 दिसंबर 1971 तक चले इस युद्ध में सेना ने कम संसाधनों के बावजूद भी दुश्मन के दांत खट्टे किए थे। उन्होंने जोशीले स्वर में कहा कि आज हमारी फौज के पास पहले की अपेक्षा कई गुना ज्यादा संसाधन हैं। लिहाजा, दुश्मन को मुंह तोड़ जवाब देने में सेना पूर्ण रूप से सक्षम है। बीती रात सेना ने पाक के नौ आतंकी ठिकानों को ध्वस्त करके इसका छोटा सा उदाहरण प्रस्तुत कर दिया है। उन्होंने पहलगाम में शहीद हुए सैलानियों के परिवारों के प्रति भी संवेदना प्रकट की।
ऑपरेशन सिंदूर सैलानियों को सच्ची श्रद्धांजलि : कैप्टन लीलाराम
4. ददाहू ( सिरमौर) कारगिल युद्ध विजेता ददाहू के जांबाज सेवानिवृत्त सैनिक कैप्टन लीला राम ने ऑपरेशन सिंदूर के प्रति अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि बीती मध्य रात्रि को पाकिस्तान में आतंकवादियों के मुख्य कैंपों पर हमला निर्दोष सैलानियों को सच्ची श्रद्धांजलि है। भारतीय सेवा ने आतंकवादियों के कोटली, बहालपुर, मुरीद व मुजफ्फराबाद आदि स्थानों पर आतंकवादियों के कैंपों को उड़ा कर अपनी बहादुरी ही नहीं अपितु भारत की ताकत को भी दर्शाया है। इसके लिए भारतीय सेना बधाई की पात्र है। उन्होंने कहा कि वह चाहते हैं कि युद्ध हो ओर भारतीय सेना पाकिस्तान पर भारी पड़े और भारत उन 26 निर्देश सैलानियों की मौत का बदला चुकाए जिनकी आतंकवादियों ने महजब पूछ कर हत्या की है।
ऑपरेशन सिंदूर भारतीय सेना के प्रति गर्व : अंकित चौधरी।
5. ददाहू। कारगिल युद्ध में अपनी जान गवां चूके सिरमौर जिले के जांबाज राइफलमैन शाहिद कुलविंद्र सिंह के पुत्र अंकित चौधरी ने ऑपरेशन सिंदूर के प्रति गर्व जाहिर करते हुए कहा कि नाम मात्र के इस ऑपरेशन से भारत का सीना चौड़ा व माथा ऊंचा हुआ है। यह ऑपरेशन तो मात्र एक दिखावा है शुरुआत होना तो अभी बाकी है। भारतीय सेना को उन सभी 26 निर्दोष भारतीय सैलानियों की हत्या के दौरान निकली खून की हर बूंद का चुन-चुन कर बदला लेना चाहिए जिससे कि पाकिस्तान व आतंकवाद इस तरह की हरकतों को दोहराने का दुस्साहस दोबारा न कर सके। उन्होंने बताया कि उनके पिता ने भी सीना गोलियों से छलनी होने के बावजूद भी अंतिम सांस तक आतंकवादियों का डटकर सामना किया था और एक साथ कई दुश्मनों को मौत की नींद सुलाया। उन्होंने पाकिस्तान में रातोंरात किए गए इस हमले (ऑपरेशन) के लिए भारतीय सेना का आभार जताया है।
संवाद

शहीद कुलविंदर सिंह के बेटे अंकित चौधरी। संवाद

शहीद कुलविंदर सिंह के बेटे अंकित चौधरी। संवाद

शहीद कुलविंदर सिंह के बेटे अंकित चौधरी। संवाद

शहीद कुलविंदर सिंह के बेटे अंकित चौधरी। संवाद