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Sirmour News: नाहन के छोटा चौक में नर्क में रहने को लोग विवश
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रिपीट-
सचित्र--
नाहन के छोटा चौक में नर्क में रहने को लोग विवश
एक घर में रखे जा रहे लावारिस कुत्ते, गली और बाजार में फैली बदबू
गंदगी और बदबू के कारण दुकानदार और ग्राहक भी परेशान
पंकज तन्हा
नाहन (सिरमौर)। नाहन शहर के छोटा चौक में कई लोग नर्क से बदतर जीवन जी रहे हैं। छोटा चौक में राजीव बंसल के कपड़े की दुकान के सामने वाली गली में एक परिवार ने लावारिस कुत्तों को आश्रय दे रखा है। कुत्तों की संख्या 30 से 40 के बीच बताई जा रही है। इन कुत्तों के कारण पूरी गली और बाजार क्षेत्र में 24 घंटे बदबू ही बदबू रहती है।
तीन से चार साल से पूरा क्षेत्र भयंकर बदबू की चपेट में हैं। स्थानीय लोगों और दुकानदारों का जीना मुहाल हो गया है। इस क्षेत्र से लोग नाक पर कपड़ा रखकर आगे बढ़ जाते हैं, इससे दुकानदारी भी प्रभावित है। ग्राहक वहां रुकने को तैयार नहीं है।
दुकानदार बदबू से बचने के लिए सुगंधित स्प्रे, धूप, अगरबत्ती का इस्तेमाल कर रहे हैं लेकिन सब उपाय नाकाम हो रहे हैं। बता दें कि नगर परिषद ने डॉग शेल्टर के लिए 10 लाख रुपये स्वीकृत किए हैं लेकिन आज तक इसका निर्माण नहीं हो पाया। इस कारण कई डॉग लवर्स ने कुत्तों को अपने घर में ही आश्रय दे रखा है। जो आसपास के लोगों के लिए मुसीबत बना हुआ है।
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नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी संजय तोमर ने बताया कि डॉग शेल्टर के लिए 10 लाख रुपये स्वीकृत हैं। बनाने की औपचारिकताएं पूर्ण की जा रही हैं। छोटा चौक निवासी को जब तक डॉग शेल्टर नहीं बनता तब तक श्मशानघाट में जगह उपलब्ध करवाई गई थी।
-- -बाक्स
1. ग्राहक तक दुकान पर रुकने को तैयार नहीं
बर्तन व्यवसायी बुद्धि बल्लभ ने कहा कि बदबू के कारण ग्राहक दुकान पर रुकने को तैयार नहीं है। बदबू न रहे इसके लिए स्प्रे का भी उपयोग किया जा रहा है लेकिन सब व्यर्थ। सुबह दुकान खोलते हैं तो पोटी और पेशाब साफ करना पड़ता है। कई बार तो उल्टी तक का मन हो जाता है।
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कुत्तों को इस ढंग से रख खुद में क्रूरता
2. कपड़ा व्यवसायी रामकुमार सैनी ने कहा कि कोई कुत्तों को आश्रय दे इसमें किसी को आपत्ति नहीं है बशर्ते कुत्ते ढंग से रखे हों। साफ-सफाई होती तो बदबू नहीं होती। यहां दुकान पर बैठने के लिए अगरबत्ती, धूप जलानी पड़ रही है। बदबू इतनी है कि लोग नाक पर कपड़ा रखकर यहां से निकल जाते हैं। दुकानदारी भी प्रभावित हो रही है।
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3. व्यवसायी राजीव बंसल ने कहा कि गली के ठीक सामने मेरी दुकान है, भयंकर बदबू में कई बार दम घुटने लगता है। जहां कुत्ते रखे हैं वह मकान पुराने समय का है, इस कारण सीलन भी है, कुत्तोंं की पाेटी व पेशाब के कारण बदबू ने जीना हराम कर दिया है। प्रशासनिक अधिकारी मौके पर आएं और 10 मिनट रूककर दिखाएं।
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4. रात को सोना भी नहीं मिलता
गली निवासी सोनी शर्मा ने कहा कि पूरी रात कुत्तों के शोर और बदबू के कारण सोना भी नहीं मिलता। बेटी का आप्रेशन हुआ तो उसे 20 किलोमीटर दूर घर में भेजना पड़ा ताकि इंफेक्शन न हो जाए। सुबह गेट के अंदर बाहर पोटी व पेशाब की गंदगी रहती है। यहां जीते जी नर्क भुगतना पड़ रहा है। चार साल में भी प्रशासन इस नर्क से मुक्ति नहीं दिला पाया है।
-- -संवाद
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सचित्र
नाहन के छोटा चौक में नर्क में रहने को लोग विवश
एक घर में रखे जा रहे लावारिस कुत्ते, गली और बाजार में फैली बदबू
गंदगी और बदबू के कारण दुकानदार और ग्राहक भी परेशान
पंकज तन्हा
नाहन (सिरमौर)। नाहन शहर के छोटा चौक में कई लोग नर्क से बदतर जीवन जी रहे हैं। छोटा चौक में राजीव बंसल के कपड़े की दुकान के सामने वाली गली में एक परिवार ने लावारिस कुत्तों को आश्रय दे रखा है। कुत्तों की संख्या 30 से 40 के बीच बताई जा रही है। इन कुत्तों के कारण पूरी गली और बाजार क्षेत्र में 24 घंटे बदबू ही बदबू रहती है।
तीन से चार साल से पूरा क्षेत्र भयंकर बदबू की चपेट में हैं। स्थानीय लोगों और दुकानदारों का जीना मुहाल हो गया है। इस क्षेत्र से लोग नाक पर कपड़ा रखकर आगे बढ़ जाते हैं, इससे दुकानदारी भी प्रभावित है। ग्राहक वहां रुकने को तैयार नहीं है।
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दुकानदार बदबू से बचने के लिए सुगंधित स्प्रे, धूप, अगरबत्ती का इस्तेमाल कर रहे हैं लेकिन सब उपाय नाकाम हो रहे हैं। बता दें कि नगर परिषद ने डॉग शेल्टर के लिए 10 लाख रुपये स्वीकृत किए हैं लेकिन आज तक इसका निर्माण नहीं हो पाया। इस कारण कई डॉग लवर्स ने कुत्तों को अपने घर में ही आश्रय दे रखा है। जो आसपास के लोगों के लिए मुसीबत बना हुआ है।
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नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी संजय तोमर ने बताया कि डॉग शेल्टर के लिए 10 लाख रुपये स्वीकृत हैं। बनाने की औपचारिकताएं पूर्ण की जा रही हैं। छोटा चौक निवासी को जब तक डॉग शेल्टर नहीं बनता तब तक श्मशानघाट में जगह उपलब्ध करवाई गई थी।
1. ग्राहक तक दुकान पर रुकने को तैयार नहीं
बर्तन व्यवसायी बुद्धि बल्लभ ने कहा कि बदबू के कारण ग्राहक दुकान पर रुकने को तैयार नहीं है। बदबू न रहे इसके लिए स्प्रे का भी उपयोग किया जा रहा है लेकिन सब व्यर्थ। सुबह दुकान खोलते हैं तो पोटी और पेशाब साफ करना पड़ता है। कई बार तो उल्टी तक का मन हो जाता है।
कुत्तों को इस ढंग से रख खुद में क्रूरता
2. कपड़ा व्यवसायी रामकुमार सैनी ने कहा कि कोई कुत्तों को आश्रय दे इसमें किसी को आपत्ति नहीं है बशर्ते कुत्ते ढंग से रखे हों। साफ-सफाई होती तो बदबू नहीं होती। यहां दुकान पर बैठने के लिए अगरबत्ती, धूप जलानी पड़ रही है। बदबू इतनी है कि लोग नाक पर कपड़ा रखकर यहां से निकल जाते हैं। दुकानदारी भी प्रभावित हो रही है।
3. व्यवसायी राजीव बंसल ने कहा कि गली के ठीक सामने मेरी दुकान है, भयंकर बदबू में कई बार दम घुटने लगता है। जहां कुत्ते रखे हैं वह मकान पुराने समय का है, इस कारण सीलन भी है, कुत्तोंं की पाेटी व पेशाब के कारण बदबू ने जीना हराम कर दिया है। प्रशासनिक अधिकारी मौके पर आएं और 10 मिनट रूककर दिखाएं।
4. रात को सोना भी नहीं मिलता
गली निवासी सोनी शर्मा ने कहा कि पूरी रात कुत्तों के शोर और बदबू के कारण सोना भी नहीं मिलता। बेटी का आप्रेशन हुआ तो उसे 20 किलोमीटर दूर घर में भेजना पड़ा ताकि इंफेक्शन न हो जाए। सुबह गेट के अंदर बाहर पोटी व पेशाब की गंदगी रहती है। यहां जीते जी नर्क भुगतना पड़ रहा है। चार साल में भी प्रशासन इस नर्क से मुक्ति नहीं दिला पाया है।