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Sirmour News: सिरमौर में धान की फसल पर बौना विषाणु रोग का हमला

Fri, 01 Aug 2025 11:58 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Fri, 01 Aug 2025 11:58 PM IST
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diseses in dhaan crops in sirmaur
पांवटा साहिब क्षेत्र में धान की फसल की जांच करने पहुंची​ विशेषज्ञों की टीम व मौजूद किसान। स्रोत
सिरमौर में धान की फसल पर बौना विषाणु रोग का हमला
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मध्य पहाड़ी और निचले क्षेत्रों में धान की फसल में पाया जा रहा रोग

कृषि विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञों ने किसानों के लिए जारी की एडवाइजरी

संवाद न्यूज एजेंसी

धौलाकुआं (सिरमौर)। जिला सिरमौर में इन दिनों धान की फसल रोग की चपेट में है। धान की फसल की ग्रोथ सही न होने के चलते किसानों की चिंता बढ़ रही है। उधर, फसल में बौना विषाणु रोग का खतरा बताते हुए कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने किसानों के लिए एडवाइजरी भी जारी की है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार इन दिनों जिले के मध्य पहाड़ी व निचले क्षेत्रों में धान की फसल में यह रोग बड़े पैमाने पर देखा जा रहा है। एकाएक रोग के आने से किसानों की नींद हराम हुई है। बताया जा रहा है कि कई क्षेत्रों में तो किसानों ने फसल खराब होने पर पुन: धान की रोपाई का काम शुरू किया है। ऐसे में किसानों को दोहरी मार पड़ रही है।
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उधर, कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने धान की फसल में काली धारीदार बौना विषाणु (वायरस) के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए जिला के धान किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण सलाह जारी की है। कृषि विज्ञान केंद्र धौलाकुआं की विषय बाद विशेषज्ञ, पादप रोग डॉ. शिवाली धीमान ने बताया कि इस वर्ष, सिरमौर जिले की पांवटा घाटी के टोका नंगला, केदारपुर, जमानी वाला, सूरजपुर, नवादा, मिश्र वाला, फतेह पुर, कोलार, धौलाकुआं जैसे कई स्थानों सहित प्रमुख धान उत्पादक क्षेत्रों से इसके प्रकोप की सूचना मिली है। यह रोग पौधों की वृद्धि को रोकता है और यदि इसका उचित प्रबंधन नहीं किया गया, तो फसल को भारी नुकसान हो सकता है।
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फसल में ऐसे करें रोग की पहचान

विशेषज्ञों के अनुसार इस वायरस का फैलाव व्हाइटबैक्ड प्लांटहॉपर द्वारा होता है, जो कि एक कीट है इस कीट को पारदर्शी अग्रपंखों, गहरे रंग की शिराओं और पंखों के जोड़ों पर एक विशिष्ट सफेद पट्टी से पहचाना जा सकता है। संक्रमित पौधों की ऊंचाई सामान्य से एक-तिहाई या आधी हो जाती है तथा पत्तियां सीधी व संकरी, जड़ों हो जाती हैं और टहनियों का विकास रुक जाता है। वायरस का अत्यधिक होने पर पौधे समय से पहले मर सकते हैं, जिससे उपज में और गिरावट आ सकती है।

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ऐसे करें किसान अपनी फसल का बचाव

केंद्र ने किसानों को सलाह दी है कि वे अपने खेतों की नियमित रूप से निगरानी करें। वे धान के पौधों के आधार को धीरे से झुका सकते हैं और थपथपा सकते हैं; यदि कीट के शिशु या वयस्क मौजूद हैं तो उन्हें पानी की सतह पर तैरते हुए आसानी से देखा जा सकता है।


कीट का पता चलने पर, किसानों को तुरंत कृषि विश्वविद्यालय के कीट विज्ञान विभाग के दिशानिर्देशों के अनुसार किसी भी अनुशंसित कीटनाशक का छिड़काव करना चाहिए। इनमें इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एसएल 0.5 मिली/लीटर पानी, फिप्रोनिल 5 एससी 2 मिली/लीटर, डाइनोटेफ्यूरान 20 एसजी 0.4 ग्राम/लीटर, या फ्लोनिकैमिड 50 डब्ल्यूजी 0.3 ग्राम/लीटर शामिल हैं। बेहतर कवरेज के लिए, स्प्रे को पौधों के आधार पर उपयुक्त नोजल, जैसे फ्लैट-फैन या खोखले-शंकु, का उपयोग करके छिड़काव करें।

पांवटा साहिब क्षेत्र में धान की फसल की जांच करने पहुंची विशेषज्ञों की टीम व मौजूद किसान। स्रोत

पांवटा साहिब क्षेत्र में धान की फसल की जांच करने पहुंची विशेषज्ञों की टीम व मौजूद किसान। स्रोत

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