{"_id":"69ac11ca6653c300e506665f","slug":"described-the-childhood-pastimes-of-lord-krishna-nahan-news-c-177-1-nhn1002-173511-2026-03-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sirmour News: भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का किया वर्णन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sirmour News: भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का किया वर्णन
विज्ञापन
रेणुकाजी तीर्थ के निर्वाण आश्रम में भागवत महापुराण की आरती करते श्रद्धालु। संवाद
श्रीमद्भागवत कथा में रुढ़िवादी परंपराएं त्यागने का आह्वान
संवाद न्यूज एजेंसी
ददाहू (सिरमौर)। निर्वाण आश्रम रेणुकाजी में श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं, गोवर्धन महिमा और नंदोत्सव के प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया गया। कथा श्रवण के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु आश्रम परिसर में पहुंचे।
कथा व्यास आचार्य मोहनचन्द्र शास्त्री ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण बाल्यकाल से ही अत्यंत बलवान और पराक्रमी थे। माखन चुराकर खाना उनकी बाल लीलाओं का प्रमुख हिस्सा था। उन्होंने पराक्रम से कालिया नाग जैसे खतरनाक जीव को भी वश में किया। नंदग्राम में वे अपने सखाओं के साथ आनंदपूर्वक खेलकूद और मस्ती किया करते थे।
उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की लीलाएं हमें जीवन में सकारात्मकता, प्रेम और साहस का संदेश देती हैं। साथ ही लोगों से आह्वान किया कि रुढ़िवादी परंपराओं को त्याग कर बुद्धि और विवेक के साथ जीवन जीना चाहिए। कथा में संगीतकारों ने भजनों और मधुर संगीत की धुनों से वातावरण को भक्तिमय बना दिया। इस अवसर पर गोवर्धन पूजन के बाद भगवान को छप्पन भोग अर्पित किया गया। कार्यक्रम में निर्वाण आश्रम के महंत महात्मा रेणेन्द्र मुनि सहित अन्य संत-महात्मा और सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
ददाहू (सिरमौर)। निर्वाण आश्रम रेणुकाजी में श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं, गोवर्धन महिमा और नंदोत्सव के प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया गया। कथा श्रवण के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु आश्रम परिसर में पहुंचे।
कथा व्यास आचार्य मोहनचन्द्र शास्त्री ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण बाल्यकाल से ही अत्यंत बलवान और पराक्रमी थे। माखन चुराकर खाना उनकी बाल लीलाओं का प्रमुख हिस्सा था। उन्होंने पराक्रम से कालिया नाग जैसे खतरनाक जीव को भी वश में किया। नंदग्राम में वे अपने सखाओं के साथ आनंदपूर्वक खेलकूद और मस्ती किया करते थे।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की लीलाएं हमें जीवन में सकारात्मकता, प्रेम और साहस का संदेश देती हैं। साथ ही लोगों से आह्वान किया कि रुढ़िवादी परंपराओं को त्याग कर बुद्धि और विवेक के साथ जीवन जीना चाहिए। कथा में संगीतकारों ने भजनों और मधुर संगीत की धुनों से वातावरण को भक्तिमय बना दिया। इस अवसर पर गोवर्धन पूजन के बाद भगवान को छप्पन भोग अर्पित किया गया। कार्यक्रम में निर्वाण आश्रम के महंत महात्मा रेणेन्द्र मुनि सहित अन्य संत-महात्मा और सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद रहे।
विज्ञापन