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ब्लास्टिंग के बाद पहाड़ी से गिरा मलबा, पांच घंटे तक बंद रहा एनएच-707
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ब्लास्टिंग के बाद मलबा गिरने से फेडवाला के पास बंद हुई शिलाई -मीनस सड़क। संवाद
- फोटो : NAHAN
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रोनहाट (सिरमौर)। राष्ट्रीय राजमार्ग-707 पर देर रात की गई ब्लास्टिंग के बाद मलबा पर गिरने से पांच घंटे तक यातायात बाधित रहा। इससे वाहन चालकों और यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
मीनस-शिलाई सड़क बंद होने से शिमला, उत्तराखंड, नाहन, चंडीगढ़ जाने वाले कई वाहन मार्ग के दोनों तरफ फंसे रहे। जानकारी के अनुसार पक्के पहाड़ को तोड़ने के लिए सड़क निर्माण कार्य कर रही निजी कंपनी ने देर रात फेडवाला के समीप ब्लास्टिंग की थी। इसके बाद पहाड़ी का सारा मलबा गिरकर सड़क पर आ गया।
लिहाजा, सड़क खोलने के लिए रातभर कड़ी मशक्कत के बाद कंपनी ने सुबह आठ बजे एनएच 707 को यातायात के लिए बहाल किया। बता दें कि इन दिनों एनएच-707 के चौड़ीकरण का कार्य किया जा रहा है। सड़क का कार्य कर रही निजी कंपनियां कच्चे पहाड़ों को मशीनों की सहायता से काट रही हैं तो वहीं पक्के पहाड़ों को ब्लास्टिंग के जरिये गिराया जा रहा है।
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केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की ओर से 1356 करोड़ की लागत से बनाए जा रहे इस राष्ट्रीय राजमार्ग पर वर्तमान में कुल पांच निजी कंपनियां कार्य कर रही हैं। पक्के पहाड़ों की कटिंग के लिए प्रशासन की अनुमति के बाद सुरक्षा के सभी मानकों को पूरा कर देर रात कंट्रोल्ड ब्लास्टिंग की जा रही है, जिसके बाद पहाड़ी के मलबे को कार्यस्थल से उठाकर डंपिंग साइट तक बड़े ट्रकों की सहायता से पहुंचाया जा रहा है। पैकेज तीन का कार्य कर रही निजी कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर विजय मिश्रा ने बताया कि ब्लास्टिंग के तुरंत बाद से ही सड़क पर यातायात बहाल करना प्राथमिकता रहती है। कई बार ब्लास्टिंग की जगह और डंपिंग साइट की दूरी ज्यादा होती है, इसलिए सड़क से मलबा हटाने में थोड़ा ज्यादा समय लग जाता है। उन्होंने बताया कि रोजाना ब्लास्टिंग नहीं की जाती है और अकसर इस दौरान किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए नियमानुसार सड़क बंद करने के लिए अनुमति भी ली जाती है।
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मीनस-शिलाई सड़क बंद होने से शिमला, उत्तराखंड, नाहन, चंडीगढ़ जाने वाले कई वाहन मार्ग के दोनों तरफ फंसे रहे। जानकारी के अनुसार पक्के पहाड़ को तोड़ने के लिए सड़क निर्माण कार्य कर रही निजी कंपनी ने देर रात फेडवाला के समीप ब्लास्टिंग की थी। इसके बाद पहाड़ी का सारा मलबा गिरकर सड़क पर आ गया।
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लिहाजा, सड़क खोलने के लिए रातभर कड़ी मशक्कत के बाद कंपनी ने सुबह आठ बजे एनएच 707 को यातायात के लिए बहाल किया। बता दें कि इन दिनों एनएच-707 के चौड़ीकरण का कार्य किया जा रहा है। सड़क का कार्य कर रही निजी कंपनियां कच्चे पहाड़ों को मशीनों की सहायता से काट रही हैं तो वहीं पक्के पहाड़ों को ब्लास्टिंग के जरिये गिराया जा रहा है।
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केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की ओर से 1356 करोड़ की लागत से बनाए जा रहे इस राष्ट्रीय राजमार्ग पर वर्तमान में कुल पांच निजी कंपनियां कार्य कर रही हैं। पक्के पहाड़ों की कटिंग के लिए प्रशासन की अनुमति के बाद सुरक्षा के सभी मानकों को पूरा कर देर रात कंट्रोल्ड ब्लास्टिंग की जा रही है, जिसके बाद पहाड़ी के मलबे को कार्यस्थल से उठाकर डंपिंग साइट तक बड़े ट्रकों की सहायता से पहुंचाया जा रहा है। पैकेज तीन का कार्य कर रही निजी कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर विजय मिश्रा ने बताया कि ब्लास्टिंग के तुरंत बाद से ही सड़क पर यातायात बहाल करना प्राथमिकता रहती है। कई बार ब्लास्टिंग की जगह और डंपिंग साइट की दूरी ज्यादा होती है, इसलिए सड़क से मलबा हटाने में थोड़ा ज्यादा समय लग जाता है। उन्होंने बताया कि रोजाना ब्लास्टिंग नहीं की जाती है और अकसर इस दौरान किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए नियमानुसार सड़क बंद करने के लिए अनुमति भी ली जाती है।