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बारूद के ढेर पर सिरमौर के उद्योग, सिर्फ 230 उद्योगों ने ली फायर एनओसी
अमर उजाला ब्यूराो नाहन
Updated Mon, 06 Mar 2017 10:38 PM IST
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नाहन (सिरमौर)। करोड़ों का पूंजी निवेश करने वाली औद्योगिक इकाइयां सुरक्षा नियमों को ताक पर रखकर चल रही हैं। सावधानी बरतने में जिला सिरमौर के उद्योग फिसड्डी साबित हो रहे हैं। हर साल होने वाली आग की घटनाओं से भी उद्योगों में सबक नहीं लिया जा रहा है।
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विद्रूप है कि जिला सिरमौर में चल रहे 1795 छोटे व बड़े उद्योगों में से मात्र 230 के करीब औद्योगिक इकाइयों के पास फायर एनओसी है। अन्य उद्योगों ने अपनी सुरक्षा के लिए कोई खास इंतजाम नहीं किए हैं। 2013 के सर्वे के अनुसार जिला सिरमौर में 45 फीसदी से ज्यादा उद्योग बिना फायर एनओसी के चल रहे हैं। यही हाल अभी भी बरकरार है।
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उद्योगों के अलावा होटल मालिक भी नियमों की धज्जियां उड़ाने में लगे हैं। अग्निशमन विभाग के पास वही लोग रिन्यूवल के लिए आवेदन कर रहे हैं जिनके पास पहले से ही एनओसी है। पिछले साल भी मार्च माह से लेकर दिसंबर तक सिर्फ 52 लोगों ने रिन्यूवल के लिए आवेदन किया था। इसमें प्राइवेट स्कूल और कुछ उद्योग ही शामिल हैं। कुछ उद्योग ऐसे भी हैं जो एक बार फायर एनओसी तो ले लेते हैं, लेकिन इसके बाद कई साल तक फायर एनओसी के रिन्यूवल के लिए भी आवेदन नहीं करते। जबकि, यह दो साल के लिए ही मान्य है। एक बार फायर संयंत्र लगने के बाद इसे कई साल तक नहीं बदला जाता।
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उधर जिला अग्निशमन अधिकारी शिवानंद शर्मा ने बताया कि पिछले साल औद्योगिक क्षेत्र कालाअंब में 30 उद्योगों को फायर एनओसी ली है। इस साल भी रिन्यूवल के लिए कुछ उद्योगों व प्राइवेट स्कूलों ने आवेदन किया है। इनके केस भेज दिए हैं। फायर एनओसी के लिए उद्योग, होटल व शिक्षण संस्थान गंभीर नहीं है।
सब फायर ऑफिसर पांवटा चरणजीत सिंह ने बताया कि पांवटा इलाके में चल रहे उद्योगों ने पिछले साल 200 के करीब इकाइयों ने फायर एनओसी के लिए आवेदन किया था। इसके बाद कुछ उद्योगों को एनओसी मिली है।
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मॉकड्रिल का भी असर नहीं
अग्निशमन विभाग उद्योगों व शिक्षण संस्थानों आदि संस्थाओं में हर साल मॉकड्रिल का आयोजन करता है। इस दौरान विभाग के अधिकारी व कर्मचारी अग्निकांड के समय बचाव व फायर सेफ्टी संयंत्र के तरीकों संबंधी जानकारी देते आ रहे हैं। इन सबके बावजूद भी उद्योग प्रबंधन बेपरवाह हैं। ---------
बिरोजा उद्योग में नहीं लगे थे फायर संयंत्र
आग की भेंट चढ़े कालाअंब स्थित बिरोजा उद्योग में भी फायर संयंत्र नहीं लगे थे। हालांकि फैक्टरी प्रबंधन की ओर से दावा किया जा रहा है कि उनके पास फायर एनओसी है और फायर सेफ्टी संयंत्र भी लगे थे लेकिन पिछले दो साल से दमकल विभाग के पास फैक्टरी प्रबंधन की ओर से फायर एनओसी के लिए आवेदन नहीं किया गया था। जिला अग्निशमन अधिकारी शिवानंद शर्मा ने कहा कि वहां आग लगने के प्रथम स्टेज में काम आने वाले यंत्र थे। जबकि बिरोजा और तारपीन का कारखाना होने के चलते यहां हाईड्रेंट, स्प्रींकलर और ऑटोमैटिक सिस्टम आदि की व्यवस्था होनी चाहिए थी। वहां पानी का भी प्रबंध नहीं पाया गया।
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आग बुझाने में लगे 22 कर्मी
बिरोजा फैक्ट्री में आग लेने के बाद नाहन, पांवटा साहिब व कालाअंब फायर स्टेशन के 22 कर्मियों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। दमकल विभाग के अथक प्रयासों के बाद लगभग 50 लाख रुपये का तारपीन तेल व बिरोजा बचा लिया गया। पहले नाहन की टीम पहुंची तो आग देखकर हाथ-पांव फूलने लगे। फिर पूरी योजना के साथ पूरी कार्रवाई को आगे बढ़ाने का फैसला लिया गया। फोम के 20 ड्रमों को मंगवाया गया। साथ ही पांवटा व कालाअंब के दमकल कर्मियों को भी तलब कर लिया गया। फोम के साथ पानी को मिलाकर छिड़काव शुरू किया गया, जो पूरी रात जारी रखा गया। पानी की 40 गाड़ियों का भी इस्तेमाल हुआ।